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Hardoi News: सवायजपुर एसडीएम समेत आठ पर फर्जीवाड़े की रिपोर्ट
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पाली (हरदोई)। न्यायालय के आदेश पर सवायजपुर एसडीएम समेत आठ लोगों के खिलाफ जालसाजी और कूटरचित अभिलेख तैयार करने समेत कई धाराओं में रिपोर्ट पाली थाने में दर्ज की गई है। एसडीएम के खिलाफ जालसाजी और फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज होने से प्रशासन में भी चर्चाओं का दौर तेज है।
पाली थाना क्षेत्र के ग्राम भाहपुर निवासी श्रीकृष्ण उर्फ श्रीकेसन की तहरीर पर पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज किया है। दर्ज कराए गए मामले में श्रीकृष्ण ने कहा है कि उसके छोटे भाई रमेश की बीमारी के कारण वर्ष 2013 में मौत हो गई थी। रमेश अविवाहित था। श्रीकृष्ण के ही एक और भाई सुरेश के पुत्र जगतराम उर्फ जगतपाल ने कूटरचित दस्तावेज से खुद को रमेश का पुत्र बता दिया। तहसील में वरासत के लिए वाद दाखिल किया।
श्रीकृष्ण का आरोप है कि वरासत के मामले में सुनवाई के दौरान उसने तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा एसडीएम डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव को फर्जी अभिलेख के बारे में पूरी जानकारी दी थी। फिर भी एक अप्रैल 2023 को तत्कालीन तहसीलदार ने रमेश की भूमि की वरासत जगतराम उर्फ जगतपाल के नाम दर्ज करने का आदेश सुना दिया।
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श्रीकृष्ण ने फर्जीवाड़े की जानकारी पुलिस को दी। कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा एसडीएम सवायजपुर डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव, भाहपुर निवासी सुरेश, उर्फ सुरेशचंद्र, उसके पुत्र जगतराम उर्फ जगतपाल, जगतपाल की पत्नी नीलम देवी, रिश्तेदारों कमलेश और हरपालपुर के बहेलियनपुरवा निवासी महेंद्र, प्राथमिक विद्यालय भाहपुर के प्रधानाचार्य और डाॅ. बीआर आंबेडकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहमदपुर के प्रधानाचार्य के खिलाफ पाली थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दुर्गेश सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले में जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए प्रधानाचार्याें पर हुई एफआईआर
श्रीकृष्ण उर्फ केसन ने तहसीलदार न्यायालय में चल रहे वाद के दौरान दावा किया था कि जगतराम उर्फ जगतपाल के पिता का नाम सुरेश हैं। जगतपाल गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार तक पढ़ा है। तहसीलदार न्यायालय में जगतपाल ने दावा किया था कि उसके पिता का नाम रमेश है और वह कक्षा आठ तक पढ़ा है। इसके लिए उसने डाॅ. बीआर अंबेडकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहमदपुर पाली की टीसी भी दाखिल की थी। यह फर्जीवाड़े की श्रेणी में माना गया। वास्तव में जगतपाल गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा था। जब इसके लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य से जानकारी मांगी गई, तो विद्यालय ने कोई जानकारी ही नहीं दी।
आठ बीघा भूमि हड़पने के लिए किया फर्जीवाड़ा
श्रीकृष्ण के मुताबिक रमेश के नाम आठ बीघा भूमि थी। रमेश की मौत के बाद यह भूमि उसके तीनों जीवित भाइयों के बीच बराबर बंटनी थी। श्रीकृष्ण कहते हैं कि जगतपाल के मन में लालच आ गया और उसने रमेश को पिता बताकर पूरी भूमि अपने नाम करा ली। ग्रामीणों के मुताबिक भाहपुर में जिस जमीन की वरासत दर्ज हुई है उसकी कीमत लगभग 24 लाख रुपये है। मतलब यह कि तीन लाख रुपये बीघा जमीन है।
एसडीएम बोलीं- हाईकोर्ट में दायर करेंगी रिट
एसडीएम डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने कहा है कि वर्ष 2013 में रमेश की वरासत इनके भाइयों श्रीकृष्ण, सुरेश और दिनेश के हक में हुई थी। इसके खिलाफ जगतपाल ने वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि गलत तरीके से वरासत की गई है। जगतपाल ने खुद को रमेश का पुत्र बताया था और इसकी पुष्टि के लिए अभिलेख भी दिए थे। कानूनी प्रक्रिया का पालन कर वरासत दर्ज कराई गई है। एसडीएम ने बताया कि न्यायालय के फैसले का सम्मान और इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट में रिट करेंगी।
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पाली थाना क्षेत्र के ग्राम भाहपुर निवासी श्रीकृष्ण उर्फ श्रीकेसन की तहरीर पर पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर मामला दर्ज किया है। दर्ज कराए गए मामले में श्रीकृष्ण ने कहा है कि उसके छोटे भाई रमेश की बीमारी के कारण वर्ष 2013 में मौत हो गई थी। रमेश अविवाहित था। श्रीकृष्ण के ही एक और भाई सुरेश के पुत्र जगतराम उर्फ जगतपाल ने कूटरचित दस्तावेज से खुद को रमेश का पुत्र बता दिया। तहसील में वरासत के लिए वाद दाखिल किया।
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श्रीकृष्ण का आरोप है कि वरासत के मामले में सुनवाई के दौरान उसने तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा एसडीएम डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव को फर्जी अभिलेख के बारे में पूरी जानकारी दी थी। फिर भी एक अप्रैल 2023 को तत्कालीन तहसीलदार ने रमेश की भूमि की वरासत जगतराम उर्फ जगतपाल के नाम दर्ज करने का आदेश सुना दिया।
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श्रीकृष्ण ने फर्जीवाड़े की जानकारी पुलिस को दी। कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा एसडीएम सवायजपुर डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव, भाहपुर निवासी सुरेश, उर्फ सुरेशचंद्र, उसके पुत्र जगतराम उर्फ जगतपाल, जगतपाल की पत्नी नीलम देवी, रिश्तेदारों कमलेश और हरपालपुर के बहेलियनपुरवा निवासी महेंद्र, प्राथमिक विद्यालय भाहपुर के प्रधानाचार्य और डाॅ. बीआर आंबेडकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहमदपुर के प्रधानाचार्य के खिलाफ पाली थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दुर्गेश सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले में जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए प्रधानाचार्याें पर हुई एफआईआर
श्रीकृष्ण उर्फ केसन ने तहसीलदार न्यायालय में चल रहे वाद के दौरान दावा किया था कि जगतराम उर्फ जगतपाल के पिता का नाम सुरेश हैं। जगतपाल गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा चार तक पढ़ा है। तहसीलदार न्यायालय में जगतपाल ने दावा किया था कि उसके पिता का नाम रमेश है और वह कक्षा आठ तक पढ़ा है। इसके लिए उसने डाॅ. बीआर अंबेडकर पूर्व माध्यमिक विद्यालय अहमदपुर पाली की टीसी भी दाखिल की थी। यह फर्जीवाड़े की श्रेणी में माना गया। वास्तव में जगतपाल गांव के ही प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा था। जब इसके लिए विद्यालय के प्रधानाचार्य से जानकारी मांगी गई, तो विद्यालय ने कोई जानकारी ही नहीं दी।
आठ बीघा भूमि हड़पने के लिए किया फर्जीवाड़ा
श्रीकृष्ण के मुताबिक रमेश के नाम आठ बीघा भूमि थी। रमेश की मौत के बाद यह भूमि उसके तीनों जीवित भाइयों के बीच बराबर बंटनी थी। श्रीकृष्ण कहते हैं कि जगतपाल के मन में लालच आ गया और उसने रमेश को पिता बताकर पूरी भूमि अपने नाम करा ली। ग्रामीणों के मुताबिक भाहपुर में जिस जमीन की वरासत दर्ज हुई है उसकी कीमत लगभग 24 लाख रुपये है। मतलब यह कि तीन लाख रुपये बीघा जमीन है।
एसडीएम बोलीं- हाईकोर्ट में दायर करेंगी रिट
एसडीएम डाॅ. अरुणिमा श्रीवास्तव ने कहा है कि वर्ष 2013 में रमेश की वरासत इनके भाइयों श्रीकृष्ण, सुरेश और दिनेश के हक में हुई थी। इसके खिलाफ जगतपाल ने वाद दायर किया था। आरोप लगाया था कि गलत तरीके से वरासत की गई है। जगतपाल ने खुद को रमेश का पुत्र बताया था और इसकी पुष्टि के लिए अभिलेख भी दिए थे। कानूनी प्रक्रिया का पालन कर वरासत दर्ज कराई गई है। एसडीएम ने बताया कि न्यायालय के फैसले का सम्मान और इसके खिलाफ वह हाईकोर्ट में रिट करेंगी।