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Hardoi News: बदले मौसम में बढ़ी बीमारियों से दवाओं की खपत ज्यादा, इसलिए दवाओं का टोटा
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हरदोई। मेडिकल कॉलेज में दवाओं का टोटा यूं ही नहीं हो गया। मौसम के बदलाव के बीच खांसी, जुकाम और वायरल तेजी से फैला है। इस कारण मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। यही वजह है कि मेडिकल कॉलेज में दवाइयों की खपत बढ़ गई है। बीते एक माह में ही लगभग 23 लाख पैरासिटामॉल की गोलियों की खपत हुई है।
मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। ओपीडी का समय सुबह आठ बजे भले ही है लेकिन चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीज आधा घंटे पहले ही पहुंच जाते हैं। इन दिनों वायरल बुखार के साथ ही टाइफाइड और मलेरिया के रोगी भी बढ़े हैं। इसके अलावा अन्य रोगियों की भी संख्या काफी अधिक है।
इस कारण मेडिकल कॉलेज में दवाओं की काफी किल्लत हो रही है। मेडिकल कॉलेज दवाओं की किल्लत को पूरा करने का लगातार प्रयास कर रहा है लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण दवाओं की उपलब्धता बना पाना कठिन हो रहा है। दर्द निवारक और बुखार में काम आने वाली पैरासिटामॉल की गोली की खपत करीब 23 लाख गोलियों तक पहुंच गई थी। इसके अलावा खांसी सिरप भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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इनकी भी खपत बढ़ी
पैरासिटामॉल की तरह ही एंटीबायोटिक एमोक्सिसिलिन 500 एमजी, पोटेशियम क्लैवुलैनेट 125 एमजी टैबलेट की खपत बढ़ी है। वहीं कफ सिरप की बिक्री में भी इजाफा हुआ है। फार्मेसी में अभी बीते दो दिन पहले से खांसी के 400 सिरप मंगवाए गए थे। दो दिन में ही सभी सिरप खत्म हो गए। इसी प्रकार सिफरॉमाइसिन, रैनटेक की उपलब्धता इन दिनाें नहीं बन पा रही हैं। हालांकि दवाएं फिर से मंगवा ली गई हैं। चोट का बिटाडीन ट्यूब तो मिल ही नहीं पा रहा है।
मिल गया बजट, भेजी जाएगी डिमांड
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए ड्रग कॉरपोरेशन की साइट पर डिमांड भेजनी होती है। सीएमएस डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि बजट मिल गया है। दवाओं के लिए करीब 15 लाख रुपये का बजट आया है। कॉरपोरेशन की साइट पर डिमांड भेजी जानी है। जिन दवाओं की कमी हो गई है उनकी सूची बनाकर अपलोड कर दी जाएगी। वह भी दवाएं तीन से चार दिन में फार्मेसी को उपलब्ध करवा दी जाएंगी।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। ओपीडी का समय सुबह आठ बजे भले ही है लेकिन चिकित्सीय परामर्श के लिए मरीज आधा घंटे पहले ही पहुंच जाते हैं। इन दिनों वायरल बुखार के साथ ही टाइफाइड और मलेरिया के रोगी भी बढ़े हैं। इसके अलावा अन्य रोगियों की भी संख्या काफी अधिक है।
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इस कारण मेडिकल कॉलेज में दवाओं की काफी किल्लत हो रही है। मेडिकल कॉलेज दवाओं की किल्लत को पूरा करने का लगातार प्रयास कर रहा है लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण दवाओं की उपलब्धता बना पाना कठिन हो रहा है। दर्द निवारक और बुखार में काम आने वाली पैरासिटामॉल की गोली की खपत करीब 23 लाख गोलियों तक पहुंच गई थी। इसके अलावा खांसी सिरप भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
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इनकी भी खपत बढ़ी
पैरासिटामॉल की तरह ही एंटीबायोटिक एमोक्सिसिलिन 500 एमजी, पोटेशियम क्लैवुलैनेट 125 एमजी टैबलेट की खपत बढ़ी है। वहीं कफ सिरप की बिक्री में भी इजाफा हुआ है। फार्मेसी में अभी बीते दो दिन पहले से खांसी के 400 सिरप मंगवाए गए थे। दो दिन में ही सभी सिरप खत्म हो गए। इसी प्रकार सिफरॉमाइसिन, रैनटेक की उपलब्धता इन दिनाें नहीं बन पा रही हैं। हालांकि दवाएं फिर से मंगवा ली गई हैं। चोट का बिटाडीन ट्यूब तो मिल ही नहीं पा रहा है।
मिल गया बजट, भेजी जाएगी डिमांड
मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए ड्रग कॉरपोरेशन की साइट पर डिमांड भेजनी होती है। सीएमएस डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि बजट मिल गया है। दवाओं के लिए करीब 15 लाख रुपये का बजट आया है। कॉरपोरेशन की साइट पर डिमांड भेजी जानी है। जिन दवाओं की कमी हो गई है उनकी सूची बनाकर अपलोड कर दी जाएगी। वह भी दवाएं तीन से चार दिन में फार्मेसी को उपलब्ध करवा दी जाएंगी।