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सूखे नल, कूड़े के ढेर खोल रहे पोल
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Tue, 28 Apr 2015 12:40 AM IST
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ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के दावों की पोल खोलने
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को अहिरोरी विकास खंड की ग्राम पंचायत हूसेपुर की गलियां ही काफी है। गांव
में घुसते ही जगह-जगह गंदगी के ढेर और चोक नालियाें से सड़क पर गंदा पानी
बहता दिखा। गांव के विनोद व लाला ने बताया कि हैंडपंपों से पीने का पानी
नहीं निकल रहा और न ही कोटेदार समय पर अनाज देता है।
हूसेपुर के दो मजरे कन्हई खेड़ा, पिरकापुर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। करीब 4 हजार की आबादी वाली इस ग्राम सभा का जायजा लिया तो हकीकत देखने को मिली। गांव के राजकुमार, बृजमोहन ने कहा कि करीब चार माह से गांव में सफाई कर्मी नहीं आ रहे, जिससे कूड़े के ढेर लगे हैं।
नालियाें का पानी भी सड़क के ऊपर आ रहा। अरुण कुमार, मोहन सिंह और रामलाल ने कहा कि ग्राम सभा में करीब 22 हैंडपंप लगे हैं, पर इनमें से करीब 18 हैंडपंप अर्से से खराब पड़े हैं। कुछ समय पहले जो हैंडपंप रिबोर हुए थे, वह भी अब पानी नहीं दे रहे, ऐसे में पेयजल के लिए कुुओं व निजी हैंडपंप ही सहारा हैं।
नीम के पेड़ के नीचे बैठे करीब 5-6 ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि गांव के कोटेदार की दबंगई से उन्हें साल में 4-5 बार ही राशन मिलता है। शिकायत करने पर अभद्रता पर उतारू हो जाता है। गांव के आंगनबाड़ी केेंद्र के बाबत कहा कि सप्ताह में बुधवार को ही खुलता है।
बाकी दिनों बंद रहता। गांव में जब भी कोई बीमार होता है तो उसे जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। निकटवर्ती सीएचसी पर चिकित्सक नहीं रहते, केवल कंपाउंडर रहता है। उधर, ब्लाक में ऐसे कई गांव हैं, जहां के बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं।
हूसेपुर के दो मजरे कन्हई खेड़ा, पिरकापुर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। करीब 4 हजार की आबादी वाली इस ग्राम सभा का जायजा लिया तो हकीकत देखने को मिली। गांव के राजकुमार, बृजमोहन ने कहा कि करीब चार माह से गांव में सफाई कर्मी नहीं आ रहे, जिससे कूड़े के ढेर लगे हैं।
नालियाें का पानी भी सड़क के ऊपर आ रहा। अरुण कुमार, मोहन सिंह और रामलाल ने कहा कि ग्राम सभा में करीब 22 हैंडपंप लगे हैं, पर इनमें से करीब 18 हैंडपंप अर्से से खराब पड़े हैं। कुछ समय पहले जो हैंडपंप रिबोर हुए थे, वह भी अब पानी नहीं दे रहे, ऐसे में पेयजल के लिए कुुओं व निजी हैंडपंप ही सहारा हैं।
नीम के पेड़ के नीचे बैठे करीब 5-6 ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि गांव के कोटेदार की दबंगई से उन्हें साल में 4-5 बार ही राशन मिलता है। शिकायत करने पर अभद्रता पर उतारू हो जाता है। गांव के आंगनबाड़ी केेंद्र के बाबत कहा कि सप्ताह में बुधवार को ही खुलता है।
बाकी दिनों बंद रहता। गांव में जब भी कोई बीमार होता है तो उसे जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। निकटवर्ती सीएचसी पर चिकित्सक नहीं रहते, केवल कंपाउंडर रहता है। उधर, ब्लाक में ऐसे कई गांव हैं, जहां के बाशिंदे मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं।