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Hardoi News: डीएम का नहीं माना आदेश, अब पकड़ रहे मवेशी
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हरदोई। छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किए जाने के लिए फरवरी में अभियान चलाया गया।
डीएम ने शासन की व्यवस्था पर पंचायतों और नगरीय निकायों के जिम्मेदारों को मवेशियों को पकड़कर संरक्षित किए जाने के आदेश भी दिए लेकिन, तब जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। लोकसभा चुनाव में अब मंत्रियों और मुख्यमंत्री की जनसभा वाले प्रस्तावित क्षेत्रों में मवेशियों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।
छुट्टा मवेशी को संरक्षित किए जाने के अभियान के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। दिसंबर 2023 से फरवरी तक कई बार अभियान चलाए गए। पंचायत और नगरीय निकायों के जिम्मेदारों ने अभियान में मवेशी को पकड़ने और संरक्षित किए जाने की रिपोर्ट भी दी। मवेशियों को संरक्षित किए जाने में की गई लापरवाही से अभी भी मवेशी छुट्टा घूम रहे हैं और नगरीय निकायों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इनसे लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह छुट्टा मवेशी खेतों में फसलों को चर जा रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार और जनसभा के लिए आने वाले मंत्रियों और खासकर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित जनसभा स्थल वाले क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों को जिम्मेदार पकड़ते नजर आ जा रहे हैं। मल्लावां और शाहाबाद में तो कई दिन तक पंचायत, नगरीय निकाय और पशुपालन विभाग के जिम्मेदार छुट्टा मवेशियों को पकड़कर संरक्षित कराते रहे।
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पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किए जाने के समय कराए गए सर्वे में करीब 22,000 मवेशी छुट्टा श्रेणी में चिह्नित किए गए थे। इनके संरक्षण के लिए नयागांव मुबारकपुर और बहर में एक-एक आश्रयस्थल बनवाया गया था। मवेशियों को संरक्षित किए जाने का अभियान चलाया गया। वर्तमान में 69,382 मवेशी संरक्षित कराए जा चुके हैं, इसके बाद भी सड़कों पर छुट्टा मवेशी घूम रहे हैं।
सीवीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्थाई, अस्थाई पशु आश्रयस्थल, कान्हा गोशाला, पंजीकृत गोशाला मिलाकर 371 आश्रयस्थल का संचालन कराया जा रहा है। इसमें 69,382 मवेशी संरक्षित हैं। 6,482 मवेशी सहभागिता योजना में पशुपालकों को गोद दिए गए हैं। छुट्टा मवेशियों को पकड़ने और संरक्षित किए जाने का काम पंचायत, नगरीय निकाय के साथ समन्वय से कराया जा रहा है। जिले में छुट्टा मवेशियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इन मवेशियों को भी संरक्षित कराए जाने के लिए आठ वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 23 आश्रयस्थलों का निर्माण कराया जा रहा है।
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डीएम ने शासन की व्यवस्था पर पंचायतों और नगरीय निकायों के जिम्मेदारों को मवेशियों को पकड़कर संरक्षित किए जाने के आदेश भी दिए लेकिन, तब जिम्मेदारों ने ध्यान नहीं दिया। लोकसभा चुनाव में अब मंत्रियों और मुख्यमंत्री की जनसभा वाले प्रस्तावित क्षेत्रों में मवेशियों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है।
छुट्टा मवेशी को संरक्षित किए जाने के अभियान के बाद भी इस समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। दिसंबर 2023 से फरवरी तक कई बार अभियान चलाए गए। पंचायत और नगरीय निकायों के जिम्मेदारों ने अभियान में मवेशी को पकड़ने और संरक्षित किए जाने की रिपोर्ट भी दी। मवेशियों को संरक्षित किए जाने में की गई लापरवाही से अभी भी मवेशी छुट्टा घूम रहे हैं और नगरीय निकायों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में इनसे लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह छुट्टा मवेशी खेतों में फसलों को चर जा रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं। लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार और जनसभा के लिए आने वाले मंत्रियों और खासकर मुख्यमंत्री के प्रस्तावित जनसभा स्थल वाले क्षेत्र में छुट्टा मवेशियों को जिम्मेदार पकड़ते नजर आ जा रहे हैं। मल्लावां और शाहाबाद में तो कई दिन तक पंचायत, नगरीय निकाय और पशुपालन विभाग के जिम्मेदार छुट्टा मवेशियों को पकड़कर संरक्षित कराते रहे।
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पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार छुट्टा मवेशियों को संरक्षित किए जाने के समय कराए गए सर्वे में करीब 22,000 मवेशी छुट्टा श्रेणी में चिह्नित किए गए थे। इनके संरक्षण के लिए नयागांव मुबारकपुर और बहर में एक-एक आश्रयस्थल बनवाया गया था। मवेशियों को संरक्षित किए जाने का अभियान चलाया गया। वर्तमान में 69,382 मवेशी संरक्षित कराए जा चुके हैं, इसके बाद भी सड़कों पर छुट्टा मवेशी घूम रहे हैं।
सीवीओ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि स्थाई, अस्थाई पशु आश्रयस्थल, कान्हा गोशाला, पंजीकृत गोशाला मिलाकर 371 आश्रयस्थल का संचालन कराया जा रहा है। इसमें 69,382 मवेशी संरक्षित हैं। 6,482 मवेशी सहभागिता योजना में पशुपालकों को गोद दिए गए हैं। छुट्टा मवेशियों को पकड़ने और संरक्षित किए जाने का काम पंचायत, नगरीय निकाय के साथ समन्वय से कराया जा रहा है। जिले में छुट्टा मवेशियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इन मवेशियों को भी संरक्षित कराए जाने के लिए आठ वृहद गोसंरक्षण केंद्र, 23 आश्रयस्थलों का निर्माण कराया जा रहा है।