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योगी सरकार में बढ़ा जिले का कद

Fri, 25 Mar 2022 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 25 Mar 2022 11:33 PM IST
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District's stature increased in Yogi government
हरदोई। जिले के मूल निवासी एवं लखनऊ से भाजपा विधायक बृजेश पाठक का कद योगी सरकार 2.0 में बढ़ गया है। पिछली सरकार में वह कानून मंत्री थे, जबकि इस बार उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
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उधर, सदर विधायक नितिन अग्रवाल और शाहाबाद की विधायक रजनी तिवारी भी योगी सरकार में राज्यमंत्री बनाए गए हैं। डिप्टी सीएम पहली बार अपने गृह जिले से 2002 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस से लड़े थे और बेहद मामूली अंतर से हार गए थे।
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इसके बाद वह बसपा से उन्नाव जिले से सांसद भी रहे। बाद में वह भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा में योगी सरकार में 1.0 में कानून मंत्री रहे और अब उनके डिप्टी सीएम बनने पर जिले में हर्ष की लहर है।
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उनके भाई राजेश पाठक जिले की राजनीति में सक्रिय हैं। उनके गृह नगर में बधाइयों का तांता लगा हुआ है। वहीं, हरदोई सदर से भाजपा विधायक नितिन अग्रवाल पहली बार 2008 के उपचुनाव में सदर से विधायक चुने गए थे।
उनके पिता नरेश अग्रवाल ने इस्तीफा देकर उनके लिए सीट खाली की थी। सियासत में एंट्री के साथ विजय हासिल करने वाले नितिन लगातार चौथी बार सदर से विधायक हैं।
नितिन अग्रवाल योगी सरकार में राज्यमंत्री रह चुके हैं। साथ ही विस उपाध्यक्ष भी रह चुके नितिन को राज्य मंत्री बनाने से लोगों में हर्ष की लहर है। उधर, शाहाबाद से भाजपा विधायक रजनी तिवारी लगातार चौथी बार विधायक हैं।
उन्हें राज्यमंत्री बनाने से जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है। रजनी पहली बार बसपा के टिकट पर 2007 के उपचुनाव में चुनी गईं थी। उनके पति उपेंद्र तिवारी के निधन से रिक्त हुई सीट पर बिलग्राम सीट से पहली बार उपचुनाव में चुनी गईं थी।
2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा से सवायजपुर सीट से चुनी गईं तो 2017 का चुनाव भाजपा से शाहाबाद सीट से लड़ा और जीत हासिल की। इस बार वह इस सीट से दोबारा भाजपा चुनाव जीत कर अब राज्यमंत्री बन गई हैं।
जब 12 घंटे के लिए नरेश बने थे डिप्टी सीएम
कांग्रेस तोड़कर लोकतांत्रिक कांग्रेस बनाकर भाजपा से गठबंधन कर ऊर्जामंत्री बने तत्कालीन लोकां अध्यक्ष नरेश अग्रवाल उस समय अचानक सुर्खियों में आए थे, जब 1998 में 12 घंटे के लिए प्रदेश के डिप्टी सीएम बने थे।
इसके बाद नरेश ने कल्याण सिंह के साथ वापसी कर ली थी। लोकां नेता जगदंबिका पाल ने अचानक पाला बदलते हुए भाजपा से अलग रातों रात सीएम की शपथ ली तो नरेश ने भी उनके साथ डिप्टी सीएम की शपथ ले ली।
तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी के कार्यकाल में हुए इस घटनाक्रम को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी एवं भाजपा नेताओं ने मामले में हस्तक्षेप करते हुए कल्याण सरकार को बचाने के लिए कोर्ट की शरण ली थी।

इसके बाद पुन: बहुमत साबित करने को लेकर हुई परेड में नरेश अग्रवाल ने कल्याण सिंह में विश्वास जताया था। कुछ घंटे के चर्चा वाले डिप्टी सीएम रहे नरेश और इस सियासी घटनाक्रम को सिर्फ सियासी चर्चा माना जाता है, क्योंकि पूरे मसले को असंविधानिक माना गया था।
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