{"_id":"56a37c5891daabe81a27c6e1a2dacf78","slug":"devotthani-wish-happiness-on-ekadashi-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवोत्थानी एकादशी पर सुख की कामना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवोत्थानी एकादशी पर सुख की कामना
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Mon, 23 Nov 2015 12:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरदोई।
विज्ञापन
देवोत्थानी एकादशी जिलेभर में मनाई गई। इस मौके पर वैदिक रीति नीति के
अनुसार भगवत भजन कर सुख समृद्धि की कामना की गई। घरों में वैदिक रीति नीति
के अनुसार भगवान को नई फसलों का भोग लगाया गया। भगवान विष्णु को गन्ना,
गुड, मूंगफली, सिंघाडे का भोग लगाया गया है।
आचार्य उमाकांत शास्त्री ने बताया कि देवोत्थानी एकादशी को पर्व के रूप में मनाने का खासा महत्व है। मान्यता है कि आषाड़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली हरिसैनी एकादशी वाले दिन से भगवान विष्णु विश्राम के लिए चले जाते हैं। चतुर्मास तक विश्राम करने के बाद दीवाली के बाद पड़ने वाले देवोत्थान एकादशी के दिन विश्राम से बाहर आते हैं।
इसके कारण देवोत्थानी एकादशी का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बताया कि इस चतुर्मास में विश्राम करने वाले सभी देव देवोत्थान एकादशी को विश्राम अवधि से बाहर आते है और लोगों द्वारा आस्था तथा विश्वास के साथ उनकी पूजा अर्चना करने के साथ तैयार हुई नई फसलों का भोग भी लगाया जाता है।
आचार्य उमाकांत शास्त्री ने बताया कि देवोत्थानी एकादशी को पर्व के रूप में मनाने का खासा महत्व है। मान्यता है कि आषाड़ माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली हरिसैनी एकादशी वाले दिन से भगवान विष्णु विश्राम के लिए चले जाते हैं। चतुर्मास तक विश्राम करने के बाद दीवाली के बाद पड़ने वाले देवोत्थान एकादशी के दिन विश्राम से बाहर आते हैं।
इसके कारण देवोत्थानी एकादशी का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
बताया कि इस चतुर्मास में विश्राम करने वाले सभी देव देवोत्थान एकादशी को विश्राम अवधि से बाहर आते है और लोगों द्वारा आस्था तथा विश्वास के साथ उनकी पूजा अर्चना करने के साथ तैयार हुई नई फसलों का भोग भी लगाया जाता है।