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Hardoi News: वार्मर भरपूर फिर भी एक ही बेड पर तीन बच्चे भर्ती करने को मजबूर

Thu, 09 Jul 2026 11:16 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:16 PM IST
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Despite having plenty of warmers, they are forced to admit three babies to a single bed.
फोटो- 22- एसएनसीयू वार्ड के बाहर लगी स्क्रीन पर दिख रहे एक वार्मर पर भर्ती तीन नवजात। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज परिसर में न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में एक ही वार्मर पर दो से तीन नवजात भर्ती किए जा रहे हैं। एसएनसीयू में 30 वार्मर हैं और इसकी तुलना में 24 नवजात ही भर्ती हैं। फिर भी एक ही वार्मर पर दो से तीन नवजात रखने की वजह स्टाफ की कमी है। अत्याधुनिक मशीनों की उपलब्धता के बीच मानव संसाधन न होना पहले से ही बीमार नवजातों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ा रहा है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू वार्ड बना है। यहां समय से पहले जन्म लेने वाले नवजातों (प्री-मैच्योर) के साथ ही जन्म से ही बीमार बच्चों को रखा जाता है। कम वजन होने, जन्म के दौरान न रोने वाले, शरीर नीला पड़ने या फिर पीलिया होने के कारण ही नवजात को भर्ती किया जाता है।
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औसतन हर रोज 12 से 15 नवजात एसएनसीयू में भर्ती कराए जाते हैं। कुछ को छुट्टी भी दे दी जाती है। एसएनसीयू में कुल 30 वार्मर लगे हैं और वृहस्पतिवार को यहां 24 बच्चे भर्ती मिले। पर्याप्त वार्मर होने के बाद भी एक वार्मर में दो से तीन बच्चों को भर्ती किया गया। ऐसे में नवजातों में एक से दूसरे में संक्रमण फैलने की संभावना बनी रहती है।
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केस-1- शहर के मोमिनाबाद निवासी आयशा को करीब एक सप्ताह पहले बच्चा हुआ था। जन्म के समय बच्चा रोया नहीं तो उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। परिजन रेहाना ने बताया कि उनके नवजात के साथ दो अन्य बच्चे भी भर्ती हैं।

केस-2- पीतांबरगंज निवासी माया ने बताया कि उनके नवजात के साथ भी एक वार्मर पर दूसरा बच्चा भर्ती है जबकि तमाम वार्मर खाली पड़े हुए हैं। डॉक्टराें से कहो तो वह सुन नहीं रहे हैं।


स्टाफ की कमी बनी मुसीबत
एसएनसीयू का संचालन तीन कक्षों में होता है। इन तीन कक्षों में कुल 30 वार्मर बेड हैं। इनमें से एक कक्ष के लिए पांच वार्मर रखकर ट्रायज एरिया भी बनाया गया है। यहां अति गंभीर बच्चों काे रखा जाता है। ट्रायज एरिया तो बन गया लेकिन निगरानी के लिए स्टाफ नहीं है।
एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. आशीष वर्मा का कहना है कि सभी वार्मर बेडों का एक साथ संचालन करने के लिए पर्याप्त स्टाफ नहीं है। स्टाफ कम होने के कारण समस्या है। नर्स और वार्ड आया को मिलाकर 11 लोगों का ही स्टाफ है। इसी स्टाफ को आठ-आठ घंटे की ड्यूटी पर रोटेशन से बुलाया जाता है। डॉ. आशीष का कहना है कि सभी वार्मर पर मरीज भर्ती होने पर संचालन करने के लिए कम से कम 36 लोगों के स्टाफ की जरूरत है।



मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण व्यवस्था बेहतर करने के उद्देश्य से वार्मरों की संख्या बढ़ाई गई थी। स्टाफ की कमी है और इस वजह से सभी वार्मरों पर मरीज भर्ती नहीं हो पा रहे हैं। महिला अस्पताल के सीएमएस से जानकारी लेकर पर्याप्त स्टाफ तैनात कर दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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