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उज्ज्वला योजना में मिले सिलिंडर बने शोपीस
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बिलग्राम। क्षेत्र के तमाम घरों की रसोई में धुएं का गुबार सुबह से शाम तक उठता है। उज्ज्वला योजना में एक बार मिला भरा सिलिंडर आमदनी का पर्याप्त जरिया न होने से घरों में खाली रखा है।
ऐसे में लोग लकड़ी और गोबर के कंडों पर खाना बनने को मजबूर हैं। पड़ताल में सामने आया कि ऐसे भी लोग हैं जो दोबारा अपने सिलिंडर ही नहीं भरवा सके ।
ग्राम रहुला निवासी जुम्मन की पत्नी रेहाना ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व उन्होंने उज्ज्वला योजना में आवेदन किया था। इसके बाद चूल्हा व सिलिंडर मिला था। तब रेट कम थे, एक दो बार भरवाया, बाद में रेट बढ़ गए और आमदनी पर बोझ पड़ने लगा।
इसके कारण लकड़ी चूल्हे पर निर्भर हो गईं। जरौली नेवादा गांव की सुरभि ने बताया कि उज्ज्वला योजना में सिलिंडर चूल्हा मिला, लेकिन आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण वह सिलिंडर नहीं भरवा सकी। ऐसे में गोबर के कंडों और लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाती हैं।
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उधर, गांव रहुला निवासी अनीस की पत्नी ने बताया कि उसने भी योजना में सिलिंडर चूल्हा लिया था। तमाम झंझटों के बाद सफल हुई, पर बाद में सिलिंडर भरवा नहीं सकी। अब धुएं वाले लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रही हैं।
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ऐसे में लोग लकड़ी और गोबर के कंडों पर खाना बनने को मजबूर हैं। पड़ताल में सामने आया कि ऐसे भी लोग हैं जो दोबारा अपने सिलिंडर ही नहीं भरवा सके ।
ग्राम रहुला निवासी जुम्मन की पत्नी रेहाना ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व उन्होंने उज्ज्वला योजना में आवेदन किया था। इसके बाद चूल्हा व सिलिंडर मिला था। तब रेट कम थे, एक दो बार भरवाया, बाद में रेट बढ़ गए और आमदनी पर बोझ पड़ने लगा।
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इसके कारण लकड़ी चूल्हे पर निर्भर हो गईं। जरौली नेवादा गांव की सुरभि ने बताया कि उज्ज्वला योजना में सिलिंडर चूल्हा मिला, लेकिन आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण वह सिलिंडर नहीं भरवा सकी। ऐसे में गोबर के कंडों और लकड़ी से चूल्हे पर खाना बनाती हैं।
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उधर, गांव रहुला निवासी अनीस की पत्नी ने बताया कि उसने भी योजना में सिलिंडर चूल्हा लिया था। तमाम झंझटों के बाद सफल हुई, पर बाद में सिलिंडर भरवा नहीं सकी। अब धुएं वाले लकड़ी के चूल्हे पर खाना बना रही हैं।