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Hardoi News: धर्म ध्वजा और प्रभु श्रीराम नाम के साथ एक और पड़ाव पार किया

Tue, 04 Mar 2025 10:58 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Mar 2025 10:58 PM IST
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Crossed another milestone with the religious flag and the name of Lord Shri Ram
बेनीगंज। मुख पर प्रभु श्रीराम नाम, हाथ में धर्म ध्वजा और सिर पर जरूरी सामग्री की गठरी।
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रामादल में शामिल श्रद्धालुओं की मंगलवार सुबह कदम-ताल से नगवा कोथावां से गिरधरपुर उमरारी तक वातावरण भक्तिमय हो गया। रात दो बजे से ही रामादल में शामिल श्रद्धालु चौरासी कोसी परिक्रमा के अगले पड़ाव के लिए निकल पड़ते हैं। जिससे क्षेत्र में माहौल धार्मिक और आध्यात्मिक हो जाता है। बुधवार को परिक्रमा जिले के चौथे पड़ाव साखिन गोपालपुर के लिए रवाना होगी।
चौरासी कोसी परिक्रमा अपने चौथे और जिले के तीसरे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी पहुंची। वहां पर श्रद्धालु, साधु-संत, महंत और महामंडलेश्वर अपने-अपने वाहनों से भी पहुंचे। पैदल शामिल श्रद्धालुओं के सिर पर जररूत की सामग्री की गठरी, हाथ में धर्म ध्वजा और मुख से निकलने वाले प्रभु सीताराम के उच्चारण पूरे माहौल में प्रभु श्रीराम नाम को घोल रहा है।
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परिक्रमा अध्यक्ष पहला आश्रम के महंत नारायण दास, महासचिव मलूक पीठाधीश्वर बनगढ़ महंत संतोषदास खाकी, नैमिष व्यास पीठाधीश्वर अनिल शास्त्री, महंत नागेंद्र दास आदि अपने-अपने वाहनों पर परिक्रमा में शामिल हैं। सभी संडीला एसडीएम डॉ. अरुणिमा श्रीवास्तव सहित अधिकारियों ने स्वागत किया। नैमिष व्यासपीठाधीश्वर अनिल शास्त्री का प्रताप नगर चौराहा पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। बताया कि वह परिक्रमा में अपने एक हजार साथियों के साथ शामिल हुए हैं।
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परिक्रमा की यह है धार्मिक और पौराणिक मान्यता :

सीतापुर जनपद के नैमिषारण्य तीर्थ से आदिकाल से चली आ रही 84 कोसी परिक्रमा एक मार्च से शुरू हो गई। परिक्रमा के संबंध में धार्मिक और पौराणिक मान्यता है कि सतयुग में पहली बार महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियों को दान किए जाने से पहले परिक्रमा की। तभी से फाल्गुन मास में यह परंपरा जारी है।

त्रेतायुग में रावण वध के बाद प्रभु श्रीराम ने रामादल के साथ ब्रह्महत्या के निवारण के लिए महर्षि वशिष्ठ की आज्ञा पर नैमिषारण्य के 84 कोसी परिक्रमा में आने वाले हत्याहरण तीर्थ में स्नान किया था। धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास की प्रतिपदा को नैमिषारण्य से शुरू होने वाली परिक्रमा 11 पड़ावों पर होते हुए होली के दिन महर्षि दधीचि की तपोस्थली मिश्रिख में विश्राम लेती है।
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