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कोर्ट पहुंची अरबन कोआपरेटिव बैंक
अमर उजाला ब्यूराो/हरदोई
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:32 PM IST
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हरदोई। रिजर्व बैंक की ओर से अरबन कोआपरेटिव बैंक प्राइवेट लिमिटेड की वित्तीय गतिविधियों पर रोक लगाने के बाद बैंक सचिव ने न्यायालय की शरण ली है। उन्होंने उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की है।
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सिनेमा रोड स्थित अरबन कोआपरेटिव बैंक प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 1995 में हुई थी। 16 वर्षों में ग्राहकों के 25 हजार खाते हैं और करीब 10 करोड़ रुपये का डिपाजिट है। 800 लोगों में 20 फीसदी बकाएदारों से एक करोड़ रुपये वसूली नहीं हो पाई है। बैंक सचिव व शाखा प्रबंधक की ओर से बकाएदारों से वसूली को लेकर प्रयास किए गए थे, कुछ खातों में धनराशि जमा भी कराई गई। बाद में अधिकतर बकाएदारों से वसूली नहीं हो पाई।
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इसके चलते खाते एनपीए हो गए। इसको लेकर रिजर्व बैंक ने सोमवार को बैंकिंग गतिविधियों पर रोक लगा दी। पुराने लोन के नवीनीकरण न करने और नए लोन देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सिर्फ खाताधारक को छह माह में एक बार अपने खाते से एक हजार रुपये तक का लेनदेन करने की छूट दी गई है। शाखा प्रबंधक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि रिजर्व बैंक की ओर से लगाए गए प्रतिबंध के बाद बैंक सचिव की ओर से उच्च न्यायालय में रिट दाखिल की गई है।
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बकाएदारों से वसूली के लिए चलेगा सघन अभियान
शाखा प्रबंधक एसके श्रीवास्तव ने बताया कि काफी वर्ष पुराने लोन की वसूली के लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। बकाएदारों की प्रापर्टी बैंक में बंधक है। जरूरत हुई तो उनकी प्रापर्टी की नीलामी कर बकाया धनराशि की वसूली की जाएगी।