{"_id":"6a9c50b6882dd8c6a20a8091","slug":"cracks-in-the-walls-of-the-tuberculosis-center-water-dripping-from-the-ceiling-and-peeling-plaster-hardoi-news-c-213-1-hra1004-156133-2026-09-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Hardoi News: क्षय रोग केंद्र की दीवारों में दरार, छत से टपकता पानी और प्लास्टर भी उखड़ा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Hardoi News: क्षय रोग केंद्र की दीवारों में दरार, छत से टपकता पानी और प्लास्टर भी उखड़ा
विज्ञापन
फोटो- 43- जिला क्षय केंद्र की दीवारों से नमी के चलते उखड़ा प्लास्टर व जमी काई। संवाद
हरदोई। मेडिकल कॉलेज परिसर में जहां एक तरफ चारों ओर नई बिल्डिंग और निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं इसी परिसर में संचालित जिला क्षय रोग केंद्र आज भी जर्जर इमारत में संचालित है। इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि हर पल किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। दीवारों पर पड़ी लंबी-लंबी दरारें, उखड़ता प्लास्टर और छत से टपकती सीलन इसकी गवाही दे रही है। यहां आने वाले मरीजों के साथ डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी हर समय अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
क्षय रोग केंद्र में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। टीबी की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और दवाओं के लिए मरीजों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य कर्मचारी भी नियमित रूप से केंद्र पर कार्य अवधि में मौजूद रहकर सेवाएं देते हैं। जर्जर भवन के बीच काम करना उनके लिए भी जोखिम भरा है। डॉक्टर और कर्मचारी हर समय खौफ के साए में ड्यूटी करने को मजबूर हैं। जरा सी आहट या छत से प्लास्टर का टुकड़ा गिरते ही परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है।
वहीं इन दिनों लगातार हो रही बारिश के कारण भवन की स्थिति और भी भयावह हो गई है। दीवारों में नमी के कारण सीलन पूरे भवन में फैल चुकी है जिससे इमारत की नींव और छत लगातार कमजोर हो रही है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण न केवल कागजात और दवाइयां खराब हो रही हैं बल्कि परिसर में खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
सीलन भरे परिसर में सांस रोगियों को भी दिक्कत
नमी और सीलन सांस के रोगियों के लिए काफी घातक होती है। बता दें कि क्षय केंद्र पर टीबी और चेस्ट विभाग की ओपीडी भी होती है। रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार व परामर्श लेने पहुंचते हैं। सीलन भरे परिसर में उन्हें घंटों तक अपनी बारी के इंतजार में बैठना पड़ता है। ऐसे कक्ष में बैठने पर उन्हें कई बार सांस लेने में दिक्कत की समस्या का सामना करना पड़ता है।
क्षय केंद्र की इमारत काफी जर्जर हो गई है ऐसे में केंद्र को स्थानांतरित करने का विचार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में ही स्थान का चयन किया जा रहा है। आने वाले कुछ माह में क्षय केंद्र को वहां पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
क्षय रोग केंद्र में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। टीबी की जांच, चिकित्सकीय परामर्श और दवाओं के लिए मरीजों की आवाजाही बनी रहती है। इसके अलावा चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य कर्मचारी भी नियमित रूप से केंद्र पर कार्य अवधि में मौजूद रहकर सेवाएं देते हैं। जर्जर भवन के बीच काम करना उनके लिए भी जोखिम भरा है। डॉक्टर और कर्मचारी हर समय खौफ के साए में ड्यूटी करने को मजबूर हैं। जरा सी आहट या छत से प्लास्टर का टुकड़ा गिरते ही परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है।
विज्ञापन
वहीं इन दिनों लगातार हो रही बारिश के कारण भवन की स्थिति और भी भयावह हो गई है। दीवारों में नमी के कारण सीलन पूरे भवन में फैल चुकी है जिससे इमारत की नींव और छत लगातार कमजोर हो रही है। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने के कारण न केवल कागजात और दवाइयां खराब हो रही हैं बल्कि परिसर में खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है।
विज्ञापन
सीलन भरे परिसर में सांस रोगियों को भी दिक्कत
नमी और सीलन सांस के रोगियों के लिए काफी घातक होती है। बता दें कि क्षय केंद्र पर टीबी और चेस्ट विभाग की ओपीडी भी होती है। रोजाना सैकड़ों मरीज उपचार व परामर्श लेने पहुंचते हैं। सीलन भरे परिसर में उन्हें घंटों तक अपनी बारी के इंतजार में बैठना पड़ता है। ऐसे कक्ष में बैठने पर उन्हें कई बार सांस लेने में दिक्कत की समस्या का सामना करना पड़ता है।
क्षय केंद्र की इमारत काफी जर्जर हो गई है ऐसे में केंद्र को स्थानांतरित करने का विचार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में ही स्थान का चयन किया जा रहा है। आने वाले कुछ माह में क्षय केंद्र को वहां पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। -डॉ. जेबी गोगोई, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज

फोटो- 43- जिला क्षय केंद्र की दीवारों से नमी के चलते उखड़ा प्लास्टर व जमी काई। संवाद

फोटो- 43- जिला क्षय केंद्र की दीवारों से नमी के चलते उखड़ा प्लास्टर व जमी काई। संवाद