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18 दिन में 1372 किलोमीटर चलकर बिलग्राम पहुंचे 12 मजदूर

Thu, 16 Apr 2020 11:10 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2020 11:10 PM IST
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corona
बिलग्राम(हरदोई)। घोर विपदा या विवशता में ही इतना दम था कि 12 मजदूर हैदराबाद के तेलंगाना से पैदल चलकर 18 दिनों में बिलग्राम के गांव पहुंचे। उन्होंने कभी दिन तो कभी रात में चलकर एक दूसरे को ढांढस बंधाते हुए रास्ता तय किया तब जाकर 1372 किलोमीटर का लंबा लक्ष्य प्राप्त कर पाए। गांव पहुंचने पर जिसने ही उनकी पीड़ा जानी यही कहा कि मजदूरों में नहीं यह विवशता में दम था कि तेलंगाना से वह यहां जैसे-तैसे यहां पहुंच सके।
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कोरोना के कारण देश मे लॉकडाउन ने पूरे देश को प्रभावित करने में कोई कोर कसर नहीं रखी। खासकर विपदा रोज कमाने खाने वालों को झेलनी पड़ रही है। अपने अपने घरों में रूक रहे मजदूर तो जैसे तैसे अपने परिवार का भरण पोषण कर भी पा रहे हैं लेकिन जो अब भी दूसरी जगह फंसे हैं और भूख से तड़प रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं बिलग्राम क्षेत्र के गांव खालेपुरवा के यह 12 मजदूर जो तेलंगाना के जनपद मेडक क्षेत्र के नसीरपुर कस्बे मे एक आइसक्रीम फैक्टरी मे काम कर रहे थे।
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लॅाकडाउन के दौरान काम बंद हो गया और सभी खाली हो गए। पहले तो जैसे तैसे काम चल गया। कभी समाजसेवा करने वालों के हाथों से भी भोजन मिल गया लेकिन उसके बाद भी जब जान पर बनने लगी तो विवश होकर सभी को गांव की माटी ही याद आई। सभी ने एक साथ गांव की ओर पैदल चलने का मन बना लिया।
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पहले इतना बड़ा लक्ष्य देखकर वह डरे लेकिन यहां मरने से अच्छा गांव में परिवार का प्यार उनके मनोबल को बढ़ा गया। इसके बाद 18 दिन पूर्व सभी मजदूर कमल किशोर, वीरेंद्र प्रताप, अरविंद कुमार, अमर सिंह ,संजय, कुलदीप कुमार, संदीप, शुभम, विष्णु दयाल, जितेंद्र, अंकित, अनिल कुमार तेलगाना से निकले और जैसे तैसे गुरुवार को बिलग्राम के अपने गांव पहुंच पाए। गांव वालों में जिसने भी उनकी आपबीती सुनी उनकी आंखों में आंसू आ गए कि हालात कभी किसी ने ऐसे सोचे भी न थे कि यह दिन भी देखने पड़ सकते हैं।

बिलग्राम। क्षेत्र के गांव खालेपुरवा में मजदूरों के पहुंचते ही वहां के ग्रामीणों ने प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद सभी को बिलग्राम स्थित बने क्वारंटीन केंद्र रामस्वरूप पटेल डिग्री कालेज में ठहराया गया है।
बिलग्राम। क्वारंटीन केंद्र में मजदूरों ने बताया कि इतना चलने के बाद वह आ तो गए हैं लेकिन शरीर में दम बिल्कुल नहीं रह गया है।
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