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सीएमएस के नोट घोटाले में कई और लोग हैं शामिल

Sun, 20 Nov 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई
अमर उजाला ब्यूरो, हरदोई Updated Sun, 20 Nov 2016 12:22 AM IST
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CMS and the people involved in the scandal
सीएमएस स्कैम - फोटो : प्रतीकात्मक

हरदोई। सीएमएस कंपनी के करीब सवा करोड़ रुपये के घोटाले में नामजद केशव और आदित्य के अलावा कई और लोग भी शामिल हैं। कंपनी के एक चालक ने कुछ ही वर्षों में लाखों कमा लिए जबकि एक अधिकारी ने 14 नवंबर को दोपहर में फोन कर दोनों आरोपियों से 50 लाख रुपयों की व्यवस्था करने को कहा था। बात नहीं बनी तो शाम को रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। कोतवाल ने भी जांच में कुछ अहम बिंदु सामने आने की बात कही है। 

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शहर के मोहल्ला गौरी नगर निवासी आदित्य विजय सिंह पुत्र सुरेंद्र सिंह और मोहल्ला नघेटा पश्चिमी निवासी केशव प्रताप सिंह पुत्र सतेंद्र प्रताप सिंह सीएमएस कंपनी लखनऊ में काम करते थे। दोनों का काम कंपनी की गाड़ी से एटीएम में रुपये लोड करना था। 14 नवंबर की शाम कंपनी के मैनेजर विनोद राय ने आदित्य और केशव के खिलाफ 1,22,48000 रुपये गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

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तहरीर के अनुसार ये रुपये हरदोई जिले के 12 एटीएम से निकाले गए। तहरीर में रुपये कब कब निकाले गए इसका कोई जिक्र नहीं है। तहरीर के अनुसार गड़बड़ी का पता चलने पर कंपनी से आडीटर संजय यादव और प्रवीण श्रीवास्तव ने 13 नवंबर को हरदोई के एटीएम चेक किए। रुपये कम मिलने पर 14 नवंबर पर केशव और आदित्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई।

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हरदोई में नोट डालने के काम में तीन गाड़ियां और छह लोग लगे थे। इनमें आडीटर संजय यादव का चचेरा भाई भी है। इसके अलावा जिले के पाली थाना क्षेत्र के गांव का वैन चालक भी है। ये वैन चालक हर रविवार को रुपये लोड करता था, उसके फुटेज एक बैंक के सीसीटीवी में मौजूद हैं। वैन चालक ने पिछले तीन साल में गांव पर आलीशान मकान बनवाया और ट्रैक्टर-ट्राली सहित करीब 10 लाख के कृषि यंत्र भी खरीदे हैं।

 

मामूली वेतन पाने वाले चालक के पास इतना रुपया कहां से आया और उस पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया। इसके अलावा 14 नवंबर की दोपहर 12 से 1 के बीच कंपनी के एक अधिकारी का फोन केशव के मोबाइल पर आया था। कंपनी अधिकारी ने केशव से 50 लाख रुपये की व्यवस्था करने की बात कही थी और शाम को रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। अगर केशव व आदित्य ने गबन किया है तो कंपनी के अधिकारी को फोन पर 50 लाख मांगने क्या जरूरत पड़ गई। इससे जाहिर होता है कि कहीं न कहीं गड़बड़ी में शराब के लती केशव और आदित्य को मोहरा बनाया जा रहा है। 

 8 नंवबर को प्रधानमंत्री ने बड़े नोट बंदी की घोषणा कर दी। दो दिन एटीएम बंद रहे। इस दौरान एटीएम से 1000 और 500 रुपये के निकाले गए। कुल मिलाकर आईसीआई बैंक के रेलवेगंज एटीएम से  18 लाख तीन हजार, घंटाघर रोड एटीएम से 4 लाख 59 हजार, एमजीमार्ग एटीएम से 14 लाख 3 हजार, वैटगंज एटीएम से 9 लाख 50 हजार, एक्सिस बैंक के  पिहानीचुंगी एटीएम से 18 लाख 62 हजार 500, सदर बाजार एटीएम से 7 लाख 80 हजार, यूनियन बैंक के बिलग्रामचुंगी एटीएम से 10 लाख, लखनऊ चुंगी से एटीएम से 10 लाख एक हजार, कारपोरेशन बैंक नघेटा रोड एटीएम से 10 लाख, शाहाबाद एटीएम से 5 लाख 36 हजार, दूसरे एटीएम से 5 लाख 32500 रुपये निकाले गए।

 

सूत्रों के अनुसार निकाली गई रकम में 1000 और 500 के ही नोट थे। केशव और आदित्य से 8 तारीख के बाद नोट निकालने के लिए कहा गया था, निकाले गए नोट लखनऊ न पहुंचे पर 13को आडीटर हरदोई आए। इससे लगता है कि नोट आठ तारीख के बाद ही निकाले गए। अब सवाल ये उठाता है कि चलन से बाहर हो चुके 1,22,48000 रुपये सामान्य परिवार से ताल्लुक रखने वाले केशव और आदित्य क्यों ले जाएंगे। अगर ले भी गए तो कहां खपाएंगे। स्वाभाविक है इस घोटाले में छोटी मछलियों के साथ कोई न कोई मगरमच्छ भी शामिल है।

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