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मुख्यमंत्री की घोषणा का कार्य भूमि विवाद में अटका
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हरदोई। देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ऐतिहासिक पहचान बनाने वाली रुइयागढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने का कार्य भूमि विवाद में अटक गया है। वन विभाग की आपत्ति के बाद समाज कल्याण निर्माण निगम ने काम बंद कर दिया है। महत्वपूर्ण यह है कि मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़े उक्त कार्य को पूरा करने में कोई सहयोग कर पाने में वन विभाग ने असमर्थता जाहिर की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिलग्राम मल्लावां के भाजपा विधायक आशीष सिंह आशू के प्रस्ताव पर बिलग्राम तहसील क्षेत्र अंतर्गत रुइयागढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मंजूरी प्रदान की थी। 44 लाख 64 हजार रुपये के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी। इसके सापेक्ष 22 लाख 32 हजार रुपये अवमुक्त भी कर दिए गए थे। शासन ने यहां निर्माण कार्य कराने के लिए समाज कल्याण निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया था। संस्था के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए नींव भी खुदवा ली थी, लेकिन इस बीच वन विभाग के प्रभागीय निदेशक ने निर्माण कार्य स्थल की भूमि को वन विभाग का बता आपत्ति जता दी। आपत्ति लगने के बाद समाज कल्याण निर्माण निगम के अभियंताओं ने कार्य रोक दिया। फिलहाल बजट होने के बावजूद रुइयागढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और 15 अगस्त तक इसका लोकार्पण कराने की उम्मीद पर ब्रेक लग गया है।
260 स्क्वायर मीटर में होना है निर्माण
समाज कल्याण निर्माण निगम से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की मानें तो मौके पर 260 स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में निर्माण कार्य होना है। एक सभागार का निर्माण कराने के अलावा दो कमरे, स्वागत द्वार, प्रसाधन गृह का निर्माण कराना है। जहां निर्माण प्रस्तावित है, फिलहाल वहां पर वन विभाग ने अपनी जमीन का दावा करते हुए आपत्ति जताई है। आपत्ति जताए जाने के बाद निर्माण कार्य प्रभावित है।
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प्रभागीय निदेशक का कथन
वन विभाग के प्रभागीय निदेशक राकेश चंद्रा का कहना है कि जो निर्माण समाज कल्याण निर्माण निगम करा रहा था, उसमें डेढ़ बिसवा भूमि वन विभाग की है। वन विभाग की भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य निर्माण कार्य के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि फारेस्ट कनजर्वेशन एक्ट के तहत केंद्र सरकार ही भूमि परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी देगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जितनी भूमि ली जाएगी। उसकी जगह उतनी ही भूमि देनी भी पड़ेगी। उक्त भूमि का इस्तेमाल सिर्फ पौधरोपण के लिए किया जा सकता है।
स्वर्णिम है रुइयागढ़ी का इतिहास
1857 में हुए पहले स्वतंत्रता संग्राम में रुइया नरेश राजा नरपति सिंह ने अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। 15 अप्रैल 1858 को ब्रिगेडियर एडेरियल ईवी होप को उसके पांच लेफ्टीनेंट कर्नल और 55 अंग्रेजी सैनिकों के साथ राजा नरपति सिंह और उनकी वीर सेना ने मार दिया था। इतना ही नहीं मल्लावां में स्थित अंग्रेजों के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पर भी कब्जा कर लिया था। अंग्रेजी शासन के कलक्टर डब्ल्यूसी चैपर को बंधक बना लिया था। 15 अप्रैल 1858 को राजा नरपति सिंह के हाथों मारे गए अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर होप की मौत पर ब्रिटेन में एक सप्ताह का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। दरअसल होप रानी विक्टोरिया का ममेरा भाई था। उसकी मौत से पूरा परिवार सकते में आ गया था। गजेटियर में उल्लेख है कि होप के युद्ध में मारे जाने के कई माह बाद तक अंग्रेजी सेना हरदोई में संघर्ष छेड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। राजा नरपति सिंह की वीरता के आल्हे भी इलाके में खूब गाए जाते हैं।
12 अक्टूबर 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था लोकार्पण
संस्थान के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सोमवंशी, उपाध्यक्ष अशोक सिंह और कोषाध्यक्ष नवल महेश्वरी के संयुक्त प्रयासों से तत्कालीन सांसद जय प्रकाश ने रुइयागढ़ी की चर्चा शासन स्तर तक पहुंचाई थी। इसके बाद 1999 में तत्कालीन गन्ना मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने हथकरघा निगम के तत्कालीन अध्यक्ष गंगा भक्त सिंह की मौजूदगी में शहीद स्मारक और रुइया नरेश की प्रतिमा स्थापित करने के लिए आधारशिला रखी। 12 अक्टूबर 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने रुइया नरेश की प्रतिमा और शहीद स्मारक का लोकार्पण किया था।
इनकी भी सुनिए
रुइयागढ़ी को लेकर लंबा संघर्ष करने वाले भाजपा नेता अशोक सिंह मुनौरापुर कहते हैं कि भूमि विवाद के चलते पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने का कार्य बंद है। क्षेत्रीय विधायक आशीष सिंह आशू के प्रयासों ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना को अमली जामा पहनाया था, लेकिन अब दो विभागों के बीच विकास फंस गया है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिलग्राम मल्लावां के भाजपा विधायक आशीष सिंह आशू के प्रस्ताव पर बिलग्राम तहसील क्षेत्र अंतर्गत रुइयागढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मंजूरी प्रदान की थी। 44 लाख 64 हजार रुपये के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने मंजूरी दी थी। इसके सापेक्ष 22 लाख 32 हजार रुपये अवमुक्त भी कर दिए गए थे। शासन ने यहां निर्माण कार्य कराने के लिए समाज कल्याण निर्माण निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया था। संस्था के अभियंताओं ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए नींव भी खुदवा ली थी, लेकिन इस बीच वन विभाग के प्रभागीय निदेशक ने निर्माण कार्य स्थल की भूमि को वन विभाग का बता आपत्ति जता दी। आपत्ति लगने के बाद समाज कल्याण निर्माण निगम के अभियंताओं ने कार्य रोक दिया। फिलहाल बजट होने के बावजूद रुइयागढ़ी को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और 15 अगस्त तक इसका लोकार्पण कराने की उम्मीद पर ब्रेक लग गया है।
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260 स्क्वायर मीटर में होना है निर्माण
समाज कल्याण निर्माण निगम से जुड़े विश्वस्त सूत्रों की मानें तो मौके पर 260 स्क्वायर मीटर क्षेत्रफल में निर्माण कार्य होना है। एक सभागार का निर्माण कराने के अलावा दो कमरे, स्वागत द्वार, प्रसाधन गृह का निर्माण कराना है। जहां निर्माण प्रस्तावित है, फिलहाल वहां पर वन विभाग ने अपनी जमीन का दावा करते हुए आपत्ति जताई है। आपत्ति जताए जाने के बाद निर्माण कार्य प्रभावित है।
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प्रभागीय निदेशक का कथन
वन विभाग के प्रभागीय निदेशक राकेश चंद्रा का कहना है कि जो निर्माण समाज कल्याण निर्माण निगम करा रहा था, उसमें डेढ़ बिसवा भूमि वन विभाग की है। वन विभाग की भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य निर्माण कार्य के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि फारेस्ट कनजर्वेशन एक्ट के तहत केंद्र सरकार ही भूमि परिवर्तन के प्रस्ताव को मंजूरी देगी। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी कराना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि जितनी भूमि ली जाएगी। उसकी जगह उतनी ही भूमि देनी भी पड़ेगी। उक्त भूमि का इस्तेमाल सिर्फ पौधरोपण के लिए किया जा सकता है।
स्वर्णिम है रुइयागढ़ी का इतिहास
1857 में हुए पहले स्वतंत्रता संग्राम में रुइया नरेश राजा नरपति सिंह ने अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। 15 अप्रैल 1858 को ब्रिगेडियर एडेरियल ईवी होप को उसके पांच लेफ्टीनेंट कर्नल और 55 अंग्रेजी सैनिकों के साथ राजा नरपति सिंह और उनकी वीर सेना ने मार दिया था। इतना ही नहीं मल्लावां में स्थित अंग्रेजों के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पर भी कब्जा कर लिया था। अंग्रेजी शासन के कलक्टर डब्ल्यूसी चैपर को बंधक बना लिया था। 15 अप्रैल 1858 को राजा नरपति सिंह के हाथों मारे गए अंग्रेजी सेना के ब्रिगेडियर होप की मौत पर ब्रिटेन में एक सप्ताह का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। दरअसल होप रानी विक्टोरिया का ममेरा भाई था। उसकी मौत से पूरा परिवार सकते में आ गया था। गजेटियर में उल्लेख है कि होप के युद्ध में मारे जाने के कई माह बाद तक अंग्रेजी सेना हरदोई में संघर्ष छेड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाई। राजा नरपति सिंह की वीरता के आल्हे भी इलाके में खूब गाए जाते हैं।
12 अक्टूबर 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था लोकार्पण
संस्थान के अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सोमवंशी, उपाध्यक्ष अशोक सिंह और कोषाध्यक्ष नवल महेश्वरी के संयुक्त प्रयासों से तत्कालीन सांसद जय प्रकाश ने रुइयागढ़ी की चर्चा शासन स्तर तक पहुंचाई थी। इसके बाद 1999 में तत्कालीन गन्ना मंत्री नरेंद्र सिंह गौर ने हथकरघा निगम के तत्कालीन अध्यक्ष गंगा भक्त सिंह की मौजूदगी में शहीद स्मारक और रुइया नरेश की प्रतिमा स्थापित करने के लिए आधारशिला रखी। 12 अक्टूबर 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने रुइया नरेश की प्रतिमा और शहीद स्मारक का लोकार्पण किया था।
इनकी भी सुनिए
रुइयागढ़ी को लेकर लंबा संघर्ष करने वाले भाजपा नेता अशोक सिंह मुनौरापुर कहते हैं कि भूमि विवाद के चलते पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने का कार्य बंद है। क्षेत्रीय विधायक आशीष सिंह आशू के प्रयासों ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना को अमली जामा पहनाया था, लेकिन अब दो विभागों के बीच विकास फंस गया है।