फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   CM office seeks report on deleting and re-feeding of bills worth Rs 7 crore

Hardoi News: सात करोड़ रुपये के बिल डिलीट कर दोबारा फीड करने पर सीएम कार्यालय ने मांगी आख्या

Mon, 09 Oct 2023 11:37 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Oct 2023 11:37 PM IST
विज्ञापन
CM office seeks report on deleting and re-feeding of bills worth Rs 7 crore
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

हरदोई। श्रम सामग्री अनुपात बिगड़ने पर मनरेगा में भुगतान पर रोक लगाए जाने के बाद बिल डिलीट किए जाने का मामला तूल पकड़ गया है। पूर मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय ने पूरी मामले पर विस्तृत और स्पष्ट आख्या तलब की है। इससे विभाग में खलबली है और फाइलें खंगाली जा रही हैं।
मनरेगा के तहत बड़ी संख्या में विकास कार्य कराए जाते हैं। इन कार्याें की आड़ में चहेतों को उपकृत करने से लेकर भुगतान तक में मनमानी जिम्मेदारों के स्तर से होती है। मनरेगा में किए जाने वाले कार्याें और भुगतान में 60:40 का अनुपात बनाए रखना जरूरी है। 60 फीसदी राशि श्रमांश यानी मजदूरी पर और 40 फीसदी राशि सामग्री अंश पर खर्च की जा सकती है।
विज्ञापन

जनपद में वित्तीय वर्ष 2022-23 में मनरेगा के श्रम सामग्री अंश का अनुपात बिगड़ने पर डीएम एमपी सिंह ने भुगतान किए जाने पर रोक लगा दी थी। मनरेगा के जिम्मेदारों ने जिले के आला अफसरों को गलत तथ्यों की जानकारी देते हुए वित्तीय वर्ष 2022-23 के बिल ही डिलीट करा दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

सिर्फ हरपालपुर विकास खंड में ही 7.12 करोड़ रुपये के बिल डिलीट करा दिए गए थे। इसके बाद इन बिलों को चालू वित्तीय वर्ष में फीड कर दिया गया था। इस पूरे खेल को लेकर अमर उजाला ने 30 सितंबर के अंक में खबर प्रकाशित की थी। खबर को संज्ञान में लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय ने विस्तृत आख्या मांगी है। मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव अजय कुमार ओझा ने डीएम से दस दिन के अंदर पूरी रिपोर्ट देने को कहा है। रिपोर्ट मांगे जाने के बाद मनरेगा से जुड़े अफसरों में खलबली मची हुई है। इससे संंबंधित अभिलेख खंगाले जा रहे हैं।


इनसेट
यह कहता है शासनादेश
मनरेगा से जुड़े शासनादेश में स्पष्ट है कि बिल डिलीट किए जाने का काेई नियम नहीं है। बिल और फीडिंग फर्जी होने की आशंका पर इन्हें डिलीट किया जा सकता है, लेकिन फिर इन्हें दोबारा फीड नहीं किया जाना चाहिए। जनपद में मनरेगा के जिम्मेदारों ने बिल डिलीट तो कर दिए, लेकिन इन बिलों को अगले वित्तीय वर्ष में फीड कर दिया। मतलब यह कि पहले बिलों के फर्जी होने की आशंका में कार्रवाई हुई और बाद में इन्हीं बिलों को सही मानकर नए वित्तीय वर्ष में फीड कर दिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed