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सीएचसी का हाल-बेहाल : दशकों से दे रहीं उपचार, खुद की सुरक्षा में लाचार

Thu, 09 Jul 2026 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 11:15 PM IST
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CHC in a sorry state: Providing treatment for decades, yet helpless regarding its own security.
फोटो-19-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर। आर्काइव
हरदोई। जिला मुख्यालय पर संचालित 100 बेड की मदर एंड चाइल्ड हेल्थ विंग में अग्नि सुरक्षा से बचाव की एनओसी ही नहीं, ब्लॉकों और तहसीलों में संचालित 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर भी अग्निशमन की एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) नहीं हैं। यह सीएचसी वर्षों से लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दे रही हैं लेकिन आग से बचाव के लिए अपनी ही सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं हैं। 20 सीएचसी के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी न होने से आग लगने की स्थिति में मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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हाल ही में लखनऊ में एक कोचिंग संस्थान में हुए हादसे के बाद प्रशासन और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीमों ने विभिन्न निजी और सरकारी संस्थानों की सुरक्षा बंदोबस्त की पड़ताल शुरू की। इसी जांच में स्वास्थ्य केंद्रों की लाचारी की स्थिति भी सामने आई है। सीएचसी केवल ओपीडी तक सीमित नहीं बल्कि यहां मरीजों को भर्ती किए जाने के भी इंतजाम होते हैं। प्रसव, आपातकालीन उपचार, वार्ड, दवा भंडार और विभिन्न चिकित्सा इकाइयों में 24 घंटे रोगी, उनके तीमारदार और चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी रहते हैं। ऐसे में आग लगने जैसी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समुचित सुरक्षा इंतजाम का होना आवश्यक है।
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आग से बचाव के लिए फायर एनओसी नहीं है जबकि भवन में बचाव के सभी बंदोबस्त होना जरूरी है। इसलिए एनओसी जारी किए जाने से पहले भवन में फायर अलार्म सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास, विद्युत सुरक्षा, जलस्रोत और बचाव व्यवस्था सहित कई बिंदुओं को जांचा जाता है। इनमें से एक भी व्यवस्था के न होने पर किसी भी बहुमंजिला, सार्वजनिक और सरकारी भवन में जोखिम बढ़ जाता है। वहीं अग्निशमन से बचाव के इंतजाम होने का अनापत्ति प्रमाणपत्र भी नहीं मिल पाता है।
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यह सीएचसी बिना एनओसी के हैं संचालित

प्रशासन और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम की पड़ताल में जिले के 20 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिना एनओसी के मिले हैं। इनमें सीएचसी संडीला, बिलग्राम, शाहाबाद, सवायजपुर, मल्लावां, भरावन, पिहानी, माधौगंज, टड़ियावां, बाबटमऊ, सुरसा, बेहंदर, गोपामऊ, अहिरोरी, हरियावां, सांडी, टोडरपुर, हरपालपुर, कछौना और कोथावां शामिल हैं।



क्यों जरूरी है फायर एनओसी
.भवन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का तकनीकी परीक्षण होता है।

.फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन निकास की जांच की जाती है।
.आग लगने की स्थिति में भवन में मौजूद लोगों की सुरक्षित निकास की व्यवस्था सुनिश्चित होती है।
.मरीजों, तीमारदारों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा का मानक तय होता है।
.समय-समय पर निरीक्षण और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की पुष्टि की जाती है।


लखनऊ हादसे के बाद नगर में स्वयं जांच की है। वहीं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डीएम के निर्देश पर संयुक्त जांच अभियान चलाया गया। इसमें निजी, सार्वजनिक और सरकारी भवनों में अग्नि सुरक्षा से जुड़े मानकों का परीक्षण कराया जा रहा है। कमियां मिलने और फायर एनओसी न होने वाले भवनों को चिह्नित कर कार्रवाई और प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों को पूरी तरह सुरक्षित बनाना है ताकि मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को किसी प्रकार का खतरा न रहे। -संजय कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट

फोटो-19-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर। आर्काइव

फोटो-19-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हरपालपुर। आर्काइव

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