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चाट विक्रेता का बेटा सचिन चौरसिया आईएनएस टीम में
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बेंहदर। गौसापुर गांव के चौराहे पर चाट का ठेला लगाने वाले बेचेलाल चौरसिया के बेटे सचिन स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत की टीम का हिस्सा बन गए हैं। शुक्रवार को केरल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिमोट के जरिए आईएनएस विक्रांत को देश को समर्पित किया था। समारोह के मंच पर सचिन उद्घाटन के लिए रिमोट ट्रे में रखकर पहुंचे थे। भारतीय नौसेना में वह मेकेनिकल इंजीनियर के रूप में सीनियर सेकेंडरी रिक्रूट (एसएसआर) के पद पर नियुक्त हैं।
मूलरूप से संडीला ब्लॉक के गांव बघुवामऊ निवासी बेचेलाल बेटे की उपलब्धि पर खुश हैं। बेचेलाल ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। एक बेटा शुभम कुमार चौरसिया लखनऊ मेडिकल कॉलेज में ओटी टेक्नीशियन है।
सबसे बड़ा बेटा राजकुमार चौरसिया लखनऊ में मेडिकल स्टोर चलाता है। सबसे छोटे बेटे सचिन भारतीय नौसेना में हैं। सचिन ने नेवी की एक साल तैयारी की। उनका चयन वर्ष 2019 में हुआ था। वर्ष 2020 में उड़ीसा में आठ महीने की ट्रेनिंग ली। प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए महाराष्ट्र के शिवाजी इंस्टीट्यूट भेजा गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ट्रेनिंग के लिए वर्ष 2021 में कोच्चि गए। कोच्चि में पहली ही पोस्टिंग विक्रांत पर हुई है।
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पिता ने बेच दी थी जमीन
बेचेलाल ने बताया कि वह भूमिहीन हैं। एक बीघा का पट्टा हुआ था। वह भी बेटे सचिन को एनडीए की कोचिंग कराने के लिए 90 हजार रुपये में बेच दी थी। खुशी की बात है कि बेटे ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।
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मूलरूप से संडीला ब्लॉक के गांव बघुवामऊ निवासी बेचेलाल बेटे की उपलब्धि पर खुश हैं। बेचेलाल ने बताया कि उनके तीन बेटे हैं। एक बेटा शुभम कुमार चौरसिया लखनऊ मेडिकल कॉलेज में ओटी टेक्नीशियन है।
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सबसे बड़ा बेटा राजकुमार चौरसिया लखनऊ में मेडिकल स्टोर चलाता है। सबसे छोटे बेटे सचिन भारतीय नौसेना में हैं। सचिन ने नेवी की एक साल तैयारी की। उनका चयन वर्ष 2019 में हुआ था। वर्ष 2020 में उड़ीसा में आठ महीने की ट्रेनिंग ली। प्रोफेशनल ट्रेनिंग के लिए महाराष्ट्र के शिवाजी इंस्टीट्यूट भेजा गया। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ट्रेनिंग के लिए वर्ष 2021 में कोच्चि गए। कोच्चि में पहली ही पोस्टिंग विक्रांत पर हुई है।
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पिता ने बेच दी थी जमीन
बेचेलाल ने बताया कि वह भूमिहीन हैं। एक बीघा का पट्टा हुआ था। वह भी बेटे सचिन को एनडीए की कोचिंग कराने के लिए 90 हजार रुपये में बेच दी थी। खुशी की बात है कि बेटे ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया।