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चार दावेदारों के बीच ही लड़ाई
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हरदोई। बिलग्राम-मल्लावां सीट पर इस बार मुकाबला बेहद रोचक है। यहां से चार पार्टियों भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के आसार हैं।
चारों ही प्रत्याशियों ने मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक आशीष सिंह आशू दूसरी जीत दर्ज करने के लिए जोर लगाए हुए हैं।
पिछली बार सपा से चुनाव लड़े सुभाष पाल अबकी कांग्रेस से और भाजपा की पूर्व सांसद व अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य अंजू बाला के पति सतीश वर्मा बसपा से मैदान में हैं।
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इसके अलावा विधायक आशीष सिंह आशू फिर से कमल खिलाने के लिए मैदान में हैं। इसी तरह सपा से बृजेश वर्मा टिल्लू पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं।
सभी प्रत्याशी जनता को अपने पक्ष में करने के लिए सब कुछ झोंक रहे हैं। बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा सीट परिसीमन के बाद बनी। इससे पहले मल्लावां और बिलग्राम सीटें अलग-अलग हुआ करतीं थी और दोनों सीटें सामान्य थीं।
नए परिसीमन में दोनों सीटों को मिलाकर बनाई गई मल्लावां-बिलग्राम सीट सामान्य है और नए परिसीमन के बाद यहां पहले चुनाव 2012 में हुए। इस बार के चुनाव में यहां भाजपा के सिटिंग विधायक आशीष सिंह आशू व यहां से विधायक रह चुके बसपा प्रत्याशी सतीश वर्मा के अलावा यहां से तीसरा चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष पाल और सपा के प्रत्याशी बृजेश वर्मा टिल्लू के बीच मुख्य रूप से चुनावी मुकाबला है।
वैसे तो इस सीट से बसपा के बृजेश वर्मा ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में अपना पहला चुनाव लड़े भाजपा के युवा नेता आशीष सिंह आशू ने जीत दर्ज की। अब इस सीट पर नए परिसीमन के बाद इस बार तीसरा चुनाव है। इस बार पिछले चुनावों की अपेक्षा मुकाबला काफी दिलचस्प है।
इस बार फिर से पूर्व विधायक सतीश वर्मा अपनी पुरानी पार्टी बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं, तो इसी क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ चुके सुभाष पाल कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सपा से बृजेश वर्मा टिल्लू पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं।
इन चारों के बीच सिमट रहे मुख्य मुकाबले के अलावा अन्य दलों एवं निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। अब चुनाव को लेकर मतदान के लिए कमोवेश चार दिन शेष रहे गए।
ऐसे में मुख्य मुकाबले में मौजूद प्रत्याशियों द्वारा चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए प्रचार अभियान से लेकर संपर्क अभियान को पूरी रफ्तार दी जा रही है। सबकी यहां अपनी अपनी आस है और इस आस के पूरे होने के लिए हर कोई अपने-अपने प्रयास कर रहा है।
मतदाताओं का रुख भांपने की कोशिश
फिलहाल बेहद रोचक एवं दिलचस्प हो रहे यहां के मुकाबले को लेकर लोगों की निगाहें मतदाताओं के मन को भांपने पर लगी हुई हैं। मतदाताओं के बीच उनके मन को समझना इस बार आसान नहीं रह गया है।
इस सीट पर करीब तीन लाख 80 हजार मतदाता हैं। जिन्हें होने वाले मतदान के दिन अपना निर्णय ईवीएम में लॉक करना है।
मतदाताओं का निर्णय किसके पक्ष में जाएगा, इसकी जानकारी तो मतगणना के बाद हो सकेगी मगर राजनीतिक दल अपने पक्ष एवं विपक्ष पर पूरी तरह से निगाह रखे हुए है। हर कोई अपनी जीत के लिए जुटा हुआ है।
परिसीमन के बाद तीसरा विस चुनाव
दरअसल नए परिसीमन के बाद इस सीट पर इस बार तीसरा विधानसभा चुनाव है। पहले चुनाव में यहां बसपा ने जीत दर्ज की तो दूसरे में भाजपा ने फतह हासिल की।
ऐसे में भाजपा लगातार दूसरी जीत दर्ज करने की आस लगाए हुए हैं, तो बसपा इस बार के चुुनाव में अपनी वापसी की उम्मीदें लगाए हुए है, जबकि सपा और कांग्रेस इस सीट पर अपना खाता खोलने की आशा के साथ चुनाव में तेजी बनाए हुए है।
दो चुनावों में बने थे नए समीकरण
नए परिसीमन के बाद बनी इस सीट से पहले मल्लावां सामान्य सीट पर कुर्मी वर्चस्व वाली सीट माना जाता रहा और ज्यादातर समय में यहां पर जातीय समीकरणों पर चुनाव बनते और बिगड़ते रहे,
लेकिन नए परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर पिछले दो चुनावों पर नजर डालें तो चुनावों के नए-नएक समीकरण बनते रहे हैं। इस बार के चुनाव में किसके कैसे और कौन से समीकरण बनेंगे यह अंदाजा लगा पाना सहज नहीं रह गया है।
इसके पीछे कहीं न कहीं वोटरों में मतदान को लेकर आई जागरुकता एवं पक्ष विपक्ष के खुल्लमखुल्ला इजहार से परहेज रखने को कारण माना जा रहा है।
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चारों ही प्रत्याशियों ने मतदाताओं को अपने-अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक आशीष सिंह आशू दूसरी जीत दर्ज करने के लिए जोर लगाए हुए हैं।
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पिछली बार सपा से चुनाव लड़े सुभाष पाल अबकी कांग्रेस से और भाजपा की पूर्व सांसद व अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य अंजू बाला के पति सतीश वर्मा बसपा से मैदान में हैं।
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इसके अलावा विधायक आशीष सिंह आशू फिर से कमल खिलाने के लिए मैदान में हैं। इसी तरह सपा से बृजेश वर्मा टिल्लू पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं।
सभी प्रत्याशी जनता को अपने पक्ष में करने के लिए सब कुछ झोंक रहे हैं। बिलग्राम-मल्लावां विधानसभा सीट परिसीमन के बाद बनी। इससे पहले मल्लावां और बिलग्राम सीटें अलग-अलग हुआ करतीं थी और दोनों सीटें सामान्य थीं।
नए परिसीमन में दोनों सीटों को मिलाकर बनाई गई मल्लावां-बिलग्राम सीट सामान्य है और नए परिसीमन के बाद यहां पहले चुनाव 2012 में हुए। इस बार के चुनाव में यहां भाजपा के सिटिंग विधायक आशीष सिंह आशू व यहां से विधायक रह चुके बसपा प्रत्याशी सतीश वर्मा के अलावा यहां से तीसरा चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष पाल और सपा के प्रत्याशी बृजेश वर्मा टिल्लू के बीच मुख्य रूप से चुनावी मुकाबला है।
वैसे तो इस सीट से बसपा के बृजेश वर्मा ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 में अपना पहला चुनाव लड़े भाजपा के युवा नेता आशीष सिंह आशू ने जीत दर्ज की। अब इस सीट पर नए परिसीमन के बाद इस बार तीसरा चुनाव है। इस बार पिछले चुनावों की अपेक्षा मुकाबला काफी दिलचस्प है।
इस बार फिर से पूर्व विधायक सतीश वर्मा अपनी पुरानी पार्टी बसपा से चुनाव लड़ रहे हैं, तो इसी क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ चुके सुभाष पाल कांग्रेस से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि सपा से बृजेश वर्मा टिल्लू पहली बार विधायकी का चुनाव लड़ रहे हैं।
इन चारों के बीच सिमट रहे मुख्य मुकाबले के अलावा अन्य दलों एवं निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं। अब चुनाव को लेकर मतदान के लिए कमोवेश चार दिन शेष रहे गए।
ऐसे में मुख्य मुकाबले में मौजूद प्रत्याशियों द्वारा चुनाव को अपने पक्ष में करने के लिए प्रचार अभियान से लेकर संपर्क अभियान को पूरी रफ्तार दी जा रही है। सबकी यहां अपनी अपनी आस है और इस आस के पूरे होने के लिए हर कोई अपने-अपने प्रयास कर रहा है।
मतदाताओं का रुख भांपने की कोशिश
फिलहाल बेहद रोचक एवं दिलचस्प हो रहे यहां के मुकाबले को लेकर लोगों की निगाहें मतदाताओं के मन को भांपने पर लगी हुई हैं। मतदाताओं के बीच उनके मन को समझना इस बार आसान नहीं रह गया है।
इस सीट पर करीब तीन लाख 80 हजार मतदाता हैं। जिन्हें होने वाले मतदान के दिन अपना निर्णय ईवीएम में लॉक करना है।
मतदाताओं का निर्णय किसके पक्ष में जाएगा, इसकी जानकारी तो मतगणना के बाद हो सकेगी मगर राजनीतिक दल अपने पक्ष एवं विपक्ष पर पूरी तरह से निगाह रखे हुए है। हर कोई अपनी जीत के लिए जुटा हुआ है।
परिसीमन के बाद तीसरा विस चुनाव
दरअसल नए परिसीमन के बाद इस सीट पर इस बार तीसरा विधानसभा चुनाव है। पहले चुनाव में यहां बसपा ने जीत दर्ज की तो दूसरे में भाजपा ने फतह हासिल की।
ऐसे में भाजपा लगातार दूसरी जीत दर्ज करने की आस लगाए हुए हैं, तो बसपा इस बार के चुुनाव में अपनी वापसी की उम्मीदें लगाए हुए है, जबकि सपा और कांग्रेस इस सीट पर अपना खाता खोलने की आशा के साथ चुनाव में तेजी बनाए हुए है।
दो चुनावों में बने थे नए समीकरण
नए परिसीमन के बाद बनी इस सीट से पहले मल्लावां सामान्य सीट पर कुर्मी वर्चस्व वाली सीट माना जाता रहा और ज्यादातर समय में यहां पर जातीय समीकरणों पर चुनाव बनते और बिगड़ते रहे,
लेकिन नए परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर पिछले दो चुनावों पर नजर डालें तो चुनावों के नए-नएक समीकरण बनते रहे हैं। इस बार के चुनाव में किसके कैसे और कौन से समीकरण बनेंगे यह अंदाजा लगा पाना सहज नहीं रह गया है।
इसके पीछे कहीं न कहीं वोटरों में मतदान को लेकर आई जागरुकता एवं पक्ष विपक्ष के खुल्लमखुल्ला इजहार से परहेज रखने को कारण माना जा रहा है।