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Hardoi News: सीमेंट सस्ता फिर भी आशियाना बनाना आसान नहीं
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फोटो-06- निर्माणाधीन भवन। संवाद
हरदोई। सरकार ने जीएसटी के दो स्लैब कर दिए हैं। कई उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी घटकर अब 18 प्रतिशत लग रही है। इन उत्पादों में से एक सीमेंट भी है। जीएसटी कम होने से सीमेंट भले ही 10 प्रतिशत सस्ता हुआ है लेकिन अपना आशियाना बना पाना अब भी आसान नहीं है। आने वाले दिनों में ईंट की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है। ऐसे में आम आदमी को राहत मिलना मुश्किल ही नजर आ रहा है।
जीएसटी की संशोधित दरों के अनुसार सीमेंट को अब 18 प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया गया है। इससे प्रति बोरी सीमेंट के दाम में 25 से 30 रुपये की कमी आई है। सीमेंट व्यापारी विभू गुप्ता ने बताया कि जो सीमेंट की बोरी 390 में बिक रही थी वह अब 360 में बिक रही है और जो 355 में बिक रही थी वह 325 में बिक रही है।
सीमेंट के दाम तो कम हो गए लेकिन कोयले पर संशोधित जीएसटी दर को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ईंट भठ्ठा व्यवसायी अभी तो पुराने कोयले से काम चला रहे हैं। जब नई खरीदारी करेंगे तो कोयला महंगा मिलेगा। इससे ईंटों का दाम बढ़ना तय है। ईंट भट्ठा व्यवसायी शिशिर अग्रवाल ने बताया कि अभी ईंट 5500 से 6000 रुपये ट्रॉली चल रहा है। अव्वल ईंट इतने रुपयों की है बाकी कम गुणवत्ता की ईंटे कम की हैं लेकिन कोयले के दाम बढ़ने से बढ़ोतरी होना संभव है।
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कोयले में बढ़ोतरी ने कर दी महंगाई
जीएसटी स्लैब में परिवर्तन के साथ कई उत्पादाें पर जीएसटी बढ़ भी गई है। इनमें से एक कोयला है। ईंटों को पकाने के लिए भट्ठों में कोयले का इस्तेमाल होता है। अब पांच से 18 प्रतिशत जीएसटी होने से 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि सीमेंट सिर्फ 10 प्रतिशत ही कम हुआ है। इससे सीमेंट की एक बोरी पर व्यक्ति ने 30 से 40 रुपये बचाए हैं, ऐसे में 100 बोरियों पर सिर्फ 300 से 400 रुपये ही बचे। वहीं, एक हजार ईंटों की खरीद पर पांच से छह सौ रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ेंगे। हालांकि, अन्य सामग्री मौरंग, टाइल्स, सरिया, बालू पहले की तरह 18 प्रतिशत के स्लैब में ही हैं।
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जीएसटी की संशोधित दरों के अनुसार सीमेंट को अब 18 प्रतिशत के स्लैब में डाल दिया गया है। इससे प्रति बोरी सीमेंट के दाम में 25 से 30 रुपये की कमी आई है। सीमेंट व्यापारी विभू गुप्ता ने बताया कि जो सीमेंट की बोरी 390 में बिक रही थी वह अब 360 में बिक रही है और जो 355 में बिक रही थी वह 325 में बिक रही है।
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सीमेंट के दाम तो कम हो गए लेकिन कोयले पर संशोधित जीएसटी दर को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। ईंट भठ्ठा व्यवसायी अभी तो पुराने कोयले से काम चला रहे हैं। जब नई खरीदारी करेंगे तो कोयला महंगा मिलेगा। इससे ईंटों का दाम बढ़ना तय है। ईंट भट्ठा व्यवसायी शिशिर अग्रवाल ने बताया कि अभी ईंट 5500 से 6000 रुपये ट्रॉली चल रहा है। अव्वल ईंट इतने रुपयों की है बाकी कम गुणवत्ता की ईंटे कम की हैं लेकिन कोयले के दाम बढ़ने से बढ़ोतरी होना संभव है।
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कोयले में बढ़ोतरी ने कर दी महंगाई
जीएसटी स्लैब में परिवर्तन के साथ कई उत्पादाें पर जीएसटी बढ़ भी गई है। इनमें से एक कोयला है। ईंटों को पकाने के लिए भट्ठों में कोयले का इस्तेमाल होता है। अब पांच से 18 प्रतिशत जीएसटी होने से 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि सीमेंट सिर्फ 10 प्रतिशत ही कम हुआ है। इससे सीमेंट की एक बोरी पर व्यक्ति ने 30 से 40 रुपये बचाए हैं, ऐसे में 100 बोरियों पर सिर्फ 300 से 400 रुपये ही बचे। वहीं, एक हजार ईंटों की खरीद पर पांच से छह सौ रुपये तक अतिरिक्त देने पड़ेंगे। हालांकि, अन्य सामग्री मौरंग, टाइल्स, सरिया, बालू पहले की तरह 18 प्रतिशत के स्लैब में ही हैं।