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खेतों में उगाई शिमला मिर्च, जिंदगी में भरी मिठास

Thu, 19 Mar 2020 11:06 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2020 11:06 PM IST
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Capsicum grown in fields, sweetness filled with life
फोटो- 29- प्रगतिशील किसान सर्वेंद्र सिंह। संवाद - फोटो : HARDOI
खेती में विविधता के जरिये आर्थिक स्थिति में बदलाव लाने की चर्चा गोष्ठियों से लेकर किसान चौपालों तक में होती है, लेकिन इसे भरावन विकास खंड के कुकही गांव निवासी किसान ने साबित भी कर दिखाया।
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12 वर्ष पहले तक परंपरागत खेती करने वाले किसान ने शिमला मिर्च की खेती शुरू की तो फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब दूसरे किसानों को भी उनका उदाहरण देकर कृषि विभाग के जिम्मेदार भी जागरूक कर रहे हैं।
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कुकही निवासी सर्वेंद्र सिंह ने वर्ष 2008 में शिमला मिर्च की खेती एक एकड़ क्षेत्रफल में शुरू की थी। सर्वेंद्र ने जब शिमला मिर्च की खेती की बात शुरू की तो स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें हतोत्साहित किया।
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यहां तक कहा गया कि सिर्फ गेहूं, धान और गन्ना ही इस इलाके में हो सकता है, लेकिन सर्वेेंद्र ने कभी लखनऊ तो कभी हरदोई के कृषि विशेषज्ञों से राय ली और शिमला मिर्च की खेती शुरू कर दी।
धीरे-धीरे उपज भी बढ़ी और सफलता ने सर्वेंद्र को उत्साहित कर दिया। इसके बाद उन्होंने दूसरों के खेत किराए पर लेकर भी शिमला मिर्च की खेती शुरू की। इस समय 38 बीघा खेत उन्होंने किराए पर भी ले रखा है और 12 एकड़ क्षेत्रफल में वह शिमला मिर्च की खेती कर रहे हैं।
सर्वेंद्र सिंह बताते हैं कि महाराष्ट्र से उन्होंने एक लाख 20 हजार रुपये प्रति किलो की दर से बीज लेकर आए थे। उत्पादन अच्छा हुआ तो फिर बीज अपने स्तर से ही विकसित करना शुरू कर दिया। बीज का छिड़काव भी सर्वेंद्र खुद करते हैं और इससे पौध तैयार करते हैं। यही पौध मुनाफे का सबब भी बनती है।
आम तौर पर पौध लगाने के बाद सिंचाई हर रोज की जाती है। 20-25 डिग्री सेल्सियस तापमान में उपज अच्छी होती है। पौधरोपण के तुरंत बाद ही सिंचाई शुरू हो जाती है।
सर्वेंद्र बताते हैं कि एक एकड़ शिमला मिर्च तैयार करने में लगभग दो लाख रुपये लागत आती है। मंडी में शिमला मिर्च का मूल्य 25 से 30 रुपये प्रति किलो होता है तो लगभग छह लाख रुपये की शिमला मिर्च निकलती है। एक एकड़ पर औसतन चार लाख रुपये की बचत हो जाती है।

शिमला मिर्च की फसल में सिंचाई की आवश्यकता अधिक होती है, लेकिन पानी की बर्बादी रोकने का इंतजाम भी किया गया है। 12 एकड़ के खेत में सर्वेंद्र ने जैन एरिकेटर ड्रिप (विशेष प्रकार की पाइप लाइन) बिछा रखी है। खेत में सिंचाई के लिए मोटर लगा है। ड्रिप से सिंचाई करने पर पानी सीधे पौध को मिलता है और बर्बाद नहीं होता है।
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