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Hardoi News: बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा पर दवा निकाल रहीं मरीजों का दीवाला

Wed, 21 May 2025 10:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 21 May 2025 10:36 PM IST
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Better health services are being claimed but medicines are making patients bankrupt
हरदोई। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का दावा भले ही किया जा रहा है, लेकिन मरीजों को दवाएं तक पूरी नहीं मिल रहीं हैं। चिकित्सक की लिखी दर्द, विटामिन की दवा और आई ड्रॉप के लिए भी मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर पर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। विभागीय जिम्मेदार अभी तक मेडिकल कॉलेज में दवाओं की कमियों को पूरा नहीं कर पाए हैं।
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स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी का दावा लगातार किया जा रहा है। इसके बाद भी मरीजों को सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। मरीजों को जांचों के लिए तो परेशान होना पड़ रहा है, दवाओं की किल्लत भी समाप्त नहीं हो रही है। दवा काउंटर पर मामूली दवाओं तक की कमी पूरी नहीं हो रही है। दवा वितरण काउंटर पर दर्द का डाइक्लो ट्यूब कई महिनों से उपलब्ध नहीं है। नेक्सडॉन, नारफ्लॉक्स टीजेड, बिजॉक्सीन, एलिटियाजोन, फलेक्सटाइन, बी-कॉमप्लेक्स सहित मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन, क्लोबसेव, इथिस्लोन, किमराल समेत विटामिन-सी की टेबलेट तक नहीं है। चिकित्सक की लिखी सभी दवाएं ही मिल रहीं हैं। मरीज काउंटर से आधी अधूरी दवाएं लेकर लौट रहे हैं और बाहर से 150 से 200 रुपये में खरीदने को मजबूर हाे रहे हैं।
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बाहर से दवा खरीदने की मजबूरी
केस-1- टड़ियावां ब्लाक के जंसरी गांव के निवासी अभिनव को गिरने से पसलियाें में चोट लग गई। हड्डी रोग विशेषज्ञ ने दवाएं लिखीं, लेकिन उसमें से दर्द का ट्यूब और एंटीबायोटिक दवा तक नहीं मिली। मरीज ने बताया कि निजी मेडिकल स्टाेर से दवा खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा। बाहर से दवा और रिब्स बैंड खरीदने में 285 रुपये दिए हैं।
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दवा बाहर से ले लो...
केस-2- सांडी के मुकेश यादव ने बताया कि वह बुखार व खांसी की दवा लेने आए थे। तीन दवाएं मिल गई हैं, लेकिन एक दवा नहीं मिली है। काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने पर्चा पर गोला बनाकर दे दिया है और बोला की बाहर से दवा खरीद लो। बाहर से दवा लेने पर जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।

वर्जन

दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए शासन को पत्र भेजकर बजट की डिमांड की गई है। अगले कुछ दिनों में बजट आते ही दवाओं की किल्लत को दूर कर दिया जाएगा।
- डॉ. जेविन बिष्णु गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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