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Hardoi News: अस्पताल में बेड फुल, स्ट्रेचर पर मरीजों का इलाज
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हरदोई। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए अभियान भले ही बड़े पैमाने पर चलाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसका कोई असर नहीं नजर आ रहा है। संक्रामक रोगों और वायरल की चपेट में आकर बड़ी संख्या में मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में आलम यह है कि सभी 184 बेड मरीजों से भरे हुए हैं। गंभीर मरीजों को बेड के इंतजार में स्ट्रेचर पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है।
यूं तो जिले में मेडिकल काॅलेज का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही है। मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल के सभी वार्डाें को मिलाकर 184 बेड का इंतजाम है। इन दिनों संक्रामक रोग कहर बरपा रहे हैं। वायरल फीवर भी लोगों को चपेट में ले रहा है। इन दोनों बीमारियों के कारण हर रोज औसतन 70-80 मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैं। सामान्य दिनों में यह औसत चालीस का रहता है। अन्य रोगों से परेशान मरीज भी कई बार हालत बिगड़ने पर भर्ती होने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। यही वजह है कि अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर पर ही लिटाकर इलाज किया जाता है। जैसे ही वार्ड से किसी मरीज की छुट्टी की जाती है वैसे ही दूसरे मरीज को उधर शिफ्ट कर दिया जाता है।
हमारे पास अभी 184 मरीजों को ही भर्ती करने का इंतजाम है। मेडिकल काॅलेज के अधीन कई वार्डाें की इमारत निर्माणाधीन है। कोशिश की जाती है कि किसी भी मरीज को परेशानी न हो, लेकिन उपलब्ध संसाधनों से ही काम चलाने की मजबूरी भी है।
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- डाॅ. जेके वर्मा, सीएमएस, जिला चिकित्सालय
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यूं तो जिले में मेडिकल काॅलेज का संचालन शुरू हो गया है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर ही है। मेडिकल काॅलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल के सभी वार्डाें को मिलाकर 184 बेड का इंतजाम है। इन दिनों संक्रामक रोग कहर बरपा रहे हैं। वायरल फीवर भी लोगों को चपेट में ले रहा है। इन दोनों बीमारियों के कारण हर रोज औसतन 70-80 मरीज इमरजेंसी वार्ड में पहुंच रहे हैं। सामान्य दिनों में यह औसत चालीस का रहता है। अन्य रोगों से परेशान मरीज भी कई बार हालत बिगड़ने पर भर्ती होने के लिए अस्पताल पहुंचते हैं। यही वजह है कि अस्पताल में बेड फुल हो गए हैं। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को स्ट्रेचर पर ही लिटाकर इलाज किया जाता है। जैसे ही वार्ड से किसी मरीज की छुट्टी की जाती है वैसे ही दूसरे मरीज को उधर शिफ्ट कर दिया जाता है।
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हमारे पास अभी 184 मरीजों को ही भर्ती करने का इंतजाम है। मेडिकल काॅलेज के अधीन कई वार्डाें की इमारत निर्माणाधीन है। कोशिश की जाती है कि किसी भी मरीज को परेशानी न हो, लेकिन उपलब्ध संसाधनों से ही काम चलाने की मजबूरी भी है।
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- डाॅ. जेके वर्मा, सीएमएस, जिला चिकित्सालय