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झूम के बरसे बदरा
ब्यूूराे/अमर उजाला, हरदाेई
Updated Thu, 17 Sep 2015 11:23 PM IST
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बारिश को लेकर पिछले काफी समय से इंतजार कर रहे लोगों
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को गुरुवार की दोपहर निराशा नहीं हुई। उमड़ घुमड़ कर आए काले बदरा कुछ देर
ही सही पर झूम कर बरसे, जिससे गर्मी से बिलबिला रहे लोगों ने राहत महसूस
की। यह बात और है कि अंतिम पड़ाव पर हुई बारिश के बाद किसानों के चेहरे पर
कम ही रंगत आ पाई।
अबकी मानसून आने से लेकर अब तक चार से पांच बार ही अच्छी बारिश हो सकी है, जिससे न सिर्फ किसानों की धान की फसल एक बार फिर से सूखे की चपेट में आ चुकी है, वहीं चिलचिलाती धूप और उमस से लोग बिलबिलाते जा रहे हैं। जिनको गुरुवार की दोपहर हुई बारिश से काफी हद तक राहत मिली, पर किसानों को कोई खास फायदा नहीं हुई है।
चंद मिनटों की बारिश सूख चुकी फसलों को हरा तो न कर सकी, पर बची हुई फसलों के लिए जरूर आक्सीजन का काम कर गई। जिसके बाद कुछ किसानों के चेहरों पर रंगत नजर आई। इधर, बारिश होने के दौरान सड़कों पर जहां लोगों ने बारिश की बौछारों में भीग कर पूरा लुत्फ उठाया, वहीं घरों में भी लोगों ने छतों पर बारिश में भीग कर आनंद उठाया।
मौसम वैज्ञानिक जयशंकर मिश्रा ने बताया कि पानी न बरसने से सूखती जा रही फसलों को इस बारिश से थोड़ी ही सही पर आक्सीजन मिली है। जिससे उन किसानों में खुशी हुई जो किसी तरह से सिंचाई की व्यवस्था कर फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं, जबकि उन किसानों की जिनकी फसलें सूख चुकी हैं, को कहावत चरितार्थ हुई कि का बरसा जब कृषि सुखानी।
हालांकि, इससे पहले काले बादलों को घिरता देख-देख कर लोग निराश हो चुके थे और झमाझम बारिश नहीं हुई थी। मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि बारिश के बाद दो डिग्री तापमान गिरा है। अधिकतम तापमान 31 डिग्री एवं न्यूनतम 27 डिग्री मापा गया है, जबकि 21 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।
अबकी मानसून आने से लेकर अब तक चार से पांच बार ही अच्छी बारिश हो सकी है, जिससे न सिर्फ किसानों की धान की फसल एक बार फिर से सूखे की चपेट में आ चुकी है, वहीं चिलचिलाती धूप और उमस से लोग बिलबिलाते जा रहे हैं। जिनको गुरुवार की दोपहर हुई बारिश से काफी हद तक राहत मिली, पर किसानों को कोई खास फायदा नहीं हुई है।
चंद मिनटों की बारिश सूख चुकी फसलों को हरा तो न कर सकी, पर बची हुई फसलों के लिए जरूर आक्सीजन का काम कर गई। जिसके बाद कुछ किसानों के चेहरों पर रंगत नजर आई। इधर, बारिश होने के दौरान सड़कों पर जहां लोगों ने बारिश की बौछारों में भीग कर पूरा लुत्फ उठाया, वहीं घरों में भी लोगों ने छतों पर बारिश में भीग कर आनंद उठाया।
मौसम वैज्ञानिक जयशंकर मिश्रा ने बताया कि पानी न बरसने से सूखती जा रही फसलों को इस बारिश से थोड़ी ही सही पर आक्सीजन मिली है। जिससे उन किसानों में खुशी हुई जो किसी तरह से सिंचाई की व्यवस्था कर फसलों को बचाने के लिए जूझ रहे हैं, जबकि उन किसानों की जिनकी फसलें सूख चुकी हैं, को कहावत चरितार्थ हुई कि का बरसा जब कृषि सुखानी।
हालांकि, इससे पहले काले बादलों को घिरता देख-देख कर लोग निराश हो चुके थे और झमाझम बारिश नहीं हुई थी। मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि बारिश के बाद दो डिग्री तापमान गिरा है। अधिकतम तापमान 31 डिग्री एवं न्यूनतम 27 डिग्री मापा गया है, जबकि 21 मिमी बारिश रिकार्ड की गई।