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चाय की चुस्कियों संग चौपालों तक पर सुप्रीम फैसले की चर्चा
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मंगलीपुरवा में अखबार पढ़ते हुए फैसले पर चर्चा करते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। अयोध्या मामले पर आए फैसले को लेकर रविवार को भी शहर में चाय की दुकानों से लेकर गांव की चौपालों तक चर्चा होती रही। हर कोई यह कहता नजर आया कि कोर्ट के फैसले का सभी को सम्मान करना चाहिए। इस सबके बीच रविवार का अखबार भी दिलचस्पी के साथ पढ़ा गया।
शहर में सिनेमा रोड पर एक चबूतरे पर रविवार सुबह नीर बहर गांव के रामशरण और रामस्वरूप अमर उजाला पढ़ते मिले। दोनों साधु वेशधारी बुजुर्ग श्रवण देवी मंदिर जाने से पहले अखबार में अयोध्या विवाद पर आए फैसले को बारीकी से पढ़ रहे थे। दोनों को अखबार पढ़ते देखा तो धीरू नाम का युवक भी इनके पास बैठकर अखबार की सुर्खियों पर चाय पीते हुए निगाह डालने लगा। इसी दौरान रामशरण और रामस्वरूप की भी चाय आ गई और फिर फैसले पर चर्चा चल निकली।
रामशरण बोले कि फैसला आना जरूरी था। कम से कम रोज-रोज के विवाद से छुटकारा मिला। अब कोर्ट ने जो कह दिया वही सही। जवाब में रामस्वरूप भी बोले बचपन से मंदिर-मस्जिद को लेकर हो रही तकरार देखते रहे लेकिन सुकून है कि आगे आने वाली पीढिय़ों को यह सब नहीं झेलना होगा। मंगलीपुरवा रेलवे क्रासिंग के निकट जीशान खान, मुन्ने मियां खां, मोहम्मद नसीब, संगम पांडेय, बंटी, उमाशंकर गुप्ता और मुकुल भी अखबार लेकर फैसले से जुड़ी खबरें पढ़ते जा रहे थे और बातचीत का दौर भी जारी था। जीशान खान ने तो यहां तक कहा कि कम से कम अब सभी राजनीतिक दल अहम मुद्दों पर बात करेंगे।
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शहर में सिनेमा रोड पर एक चबूतरे पर रविवार सुबह नीर बहर गांव के रामशरण और रामस्वरूप अमर उजाला पढ़ते मिले। दोनों साधु वेशधारी बुजुर्ग श्रवण देवी मंदिर जाने से पहले अखबार में अयोध्या विवाद पर आए फैसले को बारीकी से पढ़ रहे थे। दोनों को अखबार पढ़ते देखा तो धीरू नाम का युवक भी इनके पास बैठकर अखबार की सुर्खियों पर चाय पीते हुए निगाह डालने लगा। इसी दौरान रामशरण और रामस्वरूप की भी चाय आ गई और फिर फैसले पर चर्चा चल निकली।
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रामशरण बोले कि फैसला आना जरूरी था। कम से कम रोज-रोज के विवाद से छुटकारा मिला। अब कोर्ट ने जो कह दिया वही सही। जवाब में रामस्वरूप भी बोले बचपन से मंदिर-मस्जिद को लेकर हो रही तकरार देखते रहे लेकिन सुकून है कि आगे आने वाली पीढिय़ों को यह सब नहीं झेलना होगा। मंगलीपुरवा रेलवे क्रासिंग के निकट जीशान खान, मुन्ने मियां खां, मोहम्मद नसीब, संगम पांडेय, बंटी, उमाशंकर गुप्ता और मुकुल भी अखबार लेकर फैसले से जुड़ी खबरें पढ़ते जा रहे थे और बातचीत का दौर भी जारी था। जीशान खान ने तो यहां तक कहा कि कम से कम अब सभी राजनीतिक दल अहम मुद्दों पर बात करेंगे।
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