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भोजन से हलुआ दूर, खिचड़ी खाने को बच्चे मजबूर
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
Updated Wed, 07 Jan 2015 12:59 AM IST
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बाल विकास विभाग द्वारा छह वर्ष तक बच्चों, गर्भवती
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महिलाओं को कुपोषण से मुक्त रखने को आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। बच्चों व
महिलाओं को पोषाहार वितरण के साथ छह माह से छह वर्ष के बच्चों को हाटकुक्ड
भोजन योजना से गरमा गरम भोजन परोसा जाता है, जिसकी जिम्मेदारी अब स्वयं
सेवी संस्थाओं की है। स्वयं सेवी संस्थाओं अपने किचन में बच्चों के लिए
भोजन बनाकर आंगनबाड़ी केंद्रों पर सप्लाई करते हैं। हाटकुक्ड भोजन योजना से
बच्चों को प्रतिदिन अलग अलग भोजन देनेे का मीनू शासन ने निर्धारित किया
है। इसके बावजूद मनमानी हावी है और शासन की मंशा को प्रश्न चिन्ह लग रहा
है।
बच्चों को नियमित व निर्धारित मीनू से भोजन नहीं मिल रहा और जो भोजन पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता भी बेहतर नहीं है। शहर मेें अमर उजाला टीम ने कई आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल देखा तो पता चला कि आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। केंद्र बंद पाए गए तो कार्यकत्रियां नदारद मिलीं, जबकि कुछ केंद्र तो जर्जर भवनों में भी चलते पाए गए। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श बनाने की शासन की मंशा फेल होती नजर आ रही है। उधर, बाल विकास विभाग ने हाटकुक्ड भोजन योजना का मीनू बदल दिया है, लेकिन बच्चों को बदले मीनू से भोजन नहीं मिल रहा है। बच्चों को अब तक दलिया, तहरी व खिचड़ी ही दी जाती थी, पर अब निदेशक आनंद कुमार सिंह ने सप्ताह में दो दिन हलुआ भी देने को निर्देश दिए हैं।
स्वयं सेवी संस्थाओं ने बदले मीनू से भोजन की सप्लाई शुरू तो की है, पर नियमित रूप से बच्चों को उसी मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा, जबकि केंद्रों पर भी बदले गए मीनू का चार्ट नहीं लगाया गया। इसके अलावा निदेशक ने बच्चों को मार्निंग स्नैक और मौसमी फल भी खिलाने के निर्देश दिए हैं, पर यह तो बस सिर्फ कागजों पर ही बच्चे खा रहे हैं। हकीकत में किसी भी बच्चे को मार्निंग स्नैक में निर्धारित पदार्थ तो मिल नहीं रहा है, मौसमी फल मिलना तो बहुत दूर की बात है। उधर, विभाग द्वारा जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन भवन बना रहा, वहीं शहर में एक आंगनबाड़ी केंद्र अत्यंत जर्जर बिल्डिंग में संचालित है। सांडी रोड स्थित आलूथोक-वैटंगज दक्षिणी का आंगनबाड़ी केंद्र के भवन इतना खस्ताहाल हो चुका है।
छत की सरिया भी नजर आने लगी हैं, जबकि भवन देखने भी पूरी तरह से खस्ता हालत में दिखता है, पर फिर भी भवन में केंद्र संचालित हो रहा है, जहां प्रतिदिन कई बच्चे आते हैं। ऐसे में उनके जीवन पर भी खतरा मंडराता रहता है। जिसकी ओर न तो जिम्मेदार ध्यान दे रहे और न ही विभाग भी कुछ सोच रहा है। उधर, हाटकुक्ड में क्वालिटी और नियमित रूप से पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की है, पर शहर में जो संस्था सप्लाई कर रही, उसे नियमित ढंग से भोजन न पहुंचाने पर एक बार नोटिस भी दी जा चुकी है।
इंसेट---
डा. भूरावाली गली आंगनबाड़ी केंद्र---
समय-पूर्वाह्न 11:30 बजे। शहर में ही डा. भूरावाली गली में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर दिन में दरवाजे भी नहीं खुले थे। बाहर आंगनबाड़ी केंद्र का कोई बोर्ड होने से यह भी पता नहीं चल रहा कि यहां कोई केंद्र भी संचालित होता है। आसपास के लोगों से जानकारी की गई तो पता चला कि पोषाहार वितरण दिवस होने के कारण कार्यकत्री व सहायिका वहां गई हैं, बच्चे भी नहीं मिले।
इंसेट---
आंगनबाड़ी केंद्र देवीनपुरवा---
समय-11:45 बजे। सांडी रोड स्थित मोहल्ला देवीनुपरवा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र एक घर के बाहर वाले कमरे में संचालित पाया गया। आंगनबाड़ी केंद्र पर करीब एक दर्जन बच्चे मिले जिनकी देखभाल सहायिका बबली द्वारा की जा रही थी। कार्यकत्री प्रमिला दीक्षित के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि वह आवश्यक कार्य से अभी गई हुई हैं। बच्चों को हाटकुक्ड तक नहीं मिला था।
इंसेट---
आलूथोक-वैटगंज दक्षिणी केंद्र---
समय-12 बजे। शहर के मोहल्ला आलूथोक-वैटगंज दक्षिणी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र एक जर्जर मकान में संचालित मिला। यहां भी बच्चों की संख्या अधिक नहीं मिली और सहायिका शैलेंद्री द्वारा बच्चों को बच्चों को हाटकुक्ड में मिली खिचड़ी का वितरण करते पाया गया। कार्यकत्री जमुना देवी की जानकारी की गई तो उनके पोषाहार का उठान के बारे में बताया गया।
उक्त तीन आंगनबाड़ी केंद्र तो महज एक प्रमाण हैं, शहर में संचालित 125 आंगनबाड़ी केंद्र पर कमोवेश यही स्थिति है। आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से संचालित तो नहीं हो रहा है। बच्चों की उपस्थिति भी सिर्फ कागजों पर ही पंजीकृत है। केंद्रों पर बच्चों की बहुत कम संख्या दिखाई देती है। वहीं शासन आंगनबाड़ी केंद्रों को अब आदर्श बनाने पर जोर दिया जा रहा, पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकत्रियां नहीं मिलती और सहायिकाओं के भरोसे ही केंद्र संचालित हो रहा हैं।
इंसेट---
हाटकुक्ड मीनू एक नजर में---
सोमवार, शुक्रवार-मीठा दलिया-150 ग्राम प्रति बच्चा, बुधवार, शनिवार-हुलआ-100 ग्राम प्रति बच्चा, मंगलवार-खिचड़ी-170 ग्राम प्रति बच्चा, गुरुवार-तहरी-120 ग्राम प्रति बच्चा।
इंसेट---
सुपरवाइजर भी नहीं करती नियमित निरीक्षण
हरदोई। विभाग ने हर परियोजना कार्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आधा दर्जन से एक दर्जन सुपरवाइजर नियुक्त किए हैं, पर जिस स्थिति में शहर के केंद्र संचालित हो रहे हैं उसको देखकर तो यही लग रहा कि केंद्र को सुपरवाइजरों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण नहीं किया जा रहा या फिर निरीक्षण की सिर्फ औपचारिकता भर निभाई जा रही है। समय से न तो केंद्रों का संचालन हो रहा है और न ही कार्यकत्रियां मिल रही हैं।
इंसेट---
धरातल पर नहीं दिखा वैटगंज आंगनबाड़ी केंद्र
हरदोई। वैटगंज में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र तो धरातल पर ही नजर नहीं आया। परियोजना कार्यालय के लिपिक शिवाकांत अग्निहोत्री से वैटगंज के आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी की गई तो उन्होंने वैटगंज में नगर पालिका के बारात घर के पास एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन अभिलेख में दर्ज बताया, पर जब केंद्र की हकीकत देखी गई तो आसपास के लोगाें को ही नहीं मालूम की उनके पड़ोस में कोई आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है।
इंसेट---
‘आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण कराया जाता है और कार्यकत्रियों की उपस्थिति जांची जाती है, पर यदि कोई अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पोषाहार और हाटकुक्ड का भी नियमित रूप से सत्यापन किया जाता है।’ ऊषा साहनी, सीडीपीओ शहर
बच्चों को नियमित व निर्धारित मीनू से भोजन नहीं मिल रहा और जो भोजन पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता भी बेहतर नहीं है। शहर मेें अमर उजाला टीम ने कई आंगनबाड़ी केंद्रों का हाल देखा तो पता चला कि आंगनबाड़ी केंद्र नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। केंद्र बंद पाए गए तो कार्यकत्रियां नदारद मिलीं, जबकि कुछ केंद्र तो जर्जर भवनों में भी चलते पाए गए। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों को आदर्श बनाने की शासन की मंशा फेल होती नजर आ रही है। उधर, बाल विकास विभाग ने हाटकुक्ड भोजन योजना का मीनू बदल दिया है, लेकिन बच्चों को बदले मीनू से भोजन नहीं मिल रहा है। बच्चों को अब तक दलिया, तहरी व खिचड़ी ही दी जाती थी, पर अब निदेशक आनंद कुमार सिंह ने सप्ताह में दो दिन हलुआ भी देने को निर्देश दिए हैं।
स्वयं सेवी संस्थाओं ने बदले मीनू से भोजन की सप्लाई शुरू तो की है, पर नियमित रूप से बच्चों को उसी मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिल रहा, जबकि केंद्रों पर भी बदले गए मीनू का चार्ट नहीं लगाया गया। इसके अलावा निदेशक ने बच्चों को मार्निंग स्नैक और मौसमी फल भी खिलाने के निर्देश दिए हैं, पर यह तो बस सिर्फ कागजों पर ही बच्चे खा रहे हैं। हकीकत में किसी भी बच्चे को मार्निंग स्नैक में निर्धारित पदार्थ तो मिल नहीं रहा है, मौसमी फल मिलना तो बहुत दूर की बात है। उधर, विभाग द्वारा जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में नवीन भवन बना रहा, वहीं शहर में एक आंगनबाड़ी केंद्र अत्यंत जर्जर बिल्डिंग में संचालित है। सांडी रोड स्थित आलूथोक-वैटंगज दक्षिणी का आंगनबाड़ी केंद्र के भवन इतना खस्ताहाल हो चुका है।
छत की सरिया भी नजर आने लगी हैं, जबकि भवन देखने भी पूरी तरह से खस्ता हालत में दिखता है, पर फिर भी भवन में केंद्र संचालित हो रहा है, जहां प्रतिदिन कई बच्चे आते हैं। ऐसे में उनके जीवन पर भी खतरा मंडराता रहता है। जिसकी ओर न तो जिम्मेदार ध्यान दे रहे और न ही विभाग भी कुछ सोच रहा है। उधर, हाटकुक्ड में क्वालिटी और नियमित रूप से पहुंचाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूह की है, पर शहर में जो संस्था सप्लाई कर रही, उसे नियमित ढंग से भोजन न पहुंचाने पर एक बार नोटिस भी दी जा चुकी है।
इंसेट---
डा. भूरावाली गली आंगनबाड़ी केंद्र---
समय-पूर्वाह्न 11:30 बजे। शहर में ही डा. भूरावाली गली में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र पर दिन में दरवाजे भी नहीं खुले थे। बाहर आंगनबाड़ी केंद्र का कोई बोर्ड होने से यह भी पता नहीं चल रहा कि यहां कोई केंद्र भी संचालित होता है। आसपास के लोगों से जानकारी की गई तो पता चला कि पोषाहार वितरण दिवस होने के कारण कार्यकत्री व सहायिका वहां गई हैं, बच्चे भी नहीं मिले।
इंसेट---
आंगनबाड़ी केंद्र देवीनपुरवा---
समय-11:45 बजे। सांडी रोड स्थित मोहल्ला देवीनुपरवा में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र एक घर के बाहर वाले कमरे में संचालित पाया गया। आंगनबाड़ी केंद्र पर करीब एक दर्जन बच्चे मिले जिनकी देखभाल सहायिका बबली द्वारा की जा रही थी। कार्यकत्री प्रमिला दीक्षित के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि वह आवश्यक कार्य से अभी गई हुई हैं। बच्चों को हाटकुक्ड तक नहीं मिला था।
इंसेट---
आलूथोक-वैटगंज दक्षिणी केंद्र---
समय-12 बजे। शहर के मोहल्ला आलूथोक-वैटगंज दक्षिणी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र एक जर्जर मकान में संचालित मिला। यहां भी बच्चों की संख्या अधिक नहीं मिली और सहायिका शैलेंद्री द्वारा बच्चों को बच्चों को हाटकुक्ड में मिली खिचड़ी का वितरण करते पाया गया। कार्यकत्री जमुना देवी की जानकारी की गई तो उनके पोषाहार का उठान के बारे में बताया गया।
उक्त तीन आंगनबाड़ी केंद्र तो महज एक प्रमाण हैं, शहर में संचालित 125 आंगनबाड़ी केंद्र पर कमोवेश यही स्थिति है। आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से संचालित तो नहीं हो रहा है। बच्चों की उपस्थिति भी सिर्फ कागजों पर ही पंजीकृत है। केंद्रों पर बच्चों की बहुत कम संख्या दिखाई देती है। वहीं शासन आंगनबाड़ी केंद्रों को अब आदर्श बनाने पर जोर दिया जा रहा, पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकत्रियां नहीं मिलती और सहायिकाओं के भरोसे ही केंद्र संचालित हो रहा हैं।
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हाटकुक्ड मीनू एक नजर में---
सोमवार, शुक्रवार-मीठा दलिया-150 ग्राम प्रति बच्चा, बुधवार, शनिवार-हुलआ-100 ग्राम प्रति बच्चा, मंगलवार-खिचड़ी-170 ग्राम प्रति बच्चा, गुरुवार-तहरी-120 ग्राम प्रति बच्चा।
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सुपरवाइजर भी नहीं करती नियमित निरीक्षण
हरदोई। विभाग ने हर परियोजना कार्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आधा दर्जन से एक दर्जन सुपरवाइजर नियुक्त किए हैं, पर जिस स्थिति में शहर के केंद्र संचालित हो रहे हैं उसको देखकर तो यही लग रहा कि केंद्र को सुपरवाइजरों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण नहीं किया जा रहा या फिर निरीक्षण की सिर्फ औपचारिकता भर निभाई जा रही है। समय से न तो केंद्रों का संचालन हो रहा है और न ही कार्यकत्रियां मिल रही हैं।
इंसेट---
धरातल पर नहीं दिखा वैटगंज आंगनबाड़ी केंद्र
हरदोई। वैटगंज में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र तो धरातल पर ही नजर नहीं आया। परियोजना कार्यालय के लिपिक शिवाकांत अग्निहोत्री से वैटगंज के आंगनबाड़ी केंद्रों की जानकारी की गई तो उन्होंने वैटगंज में नगर पालिका के बारात घर के पास एक आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन अभिलेख में दर्ज बताया, पर जब केंद्र की हकीकत देखी गई तो आसपास के लोगाें को ही नहीं मालूम की उनके पड़ोस में कोई आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित होता है।
इंसेट---
‘आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण कराया जाता है और कार्यकत्रियों की उपस्थिति जांची जाती है, पर यदि कोई अनुपस्थित पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। पोषाहार और हाटकुक्ड का भी नियमित रूप से सत्यापन किया जाता है।’ ऊषा साहनी, सीडीपीओ शहर