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अतिकुपोषित निकला जिले का बचपन
ब्यूरो/अमर उजाला,हरदोई
Updated Mon, 14 Sep 2015 11:46 PM IST
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जिले में अतिकुपोषण से बचपन अभी भी सिसक रहा है।
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राज्य पोषण मिशन द्वारा वजन दिवस का आयोजन कराया गया। सात व 10 सितंबर को
वजन दिवस मनाकर शून्य से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों का वजन कर अतिकुपोषित
बच्चों को चिह्नित किया गया।
वजन दिवस अभियान पूरा हो गया है और इसके बाद जो स्थिति उभरकर आई है, उसने आज तक विभाग द्वारा कराए गए सभी सर्वों को पोल खोल दी। जनपद में 38,671 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। अतिकुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज दिलाने तथा कुपोषण से मुक्त कराने के लिए सरकार ने राज्य पोषण मिशन ने अब कमर कस ली है।
प्रदेश में अतिकुपोषण बच्चों की संख्या को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। बाल विकास विभाग द्वारा जनपद में कराए गए सर्वे में भी अभी तक सिर्फ 7142 बच्चे ही अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) में पंजीकृत थे, जबकि संस्थाओं द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़ों में भारी अंतर था।
ऐसे में अतिकुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए सबसे पहले अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करने की कवायद की गई और इसी क्रम में वजन दिवस अभियान का आयोजन हुआ। ज्ञात हो कि सरकार ने सात सितंबर व 10 सितंबर को वजन दिवस का आयोजन किया, जिसमें जनपद की 20 परियोजनाओं के 3930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 6,81,552 बच्चों का वजन किया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर कराए गए वजन की अब रिपोर्ट तैयार हो गई है।
जिसमें जिले के अतिकुपोषित बच्चों की भी स्थिति साफ हो गई है। बाल विकास विभाग से अभी तक कराए गए सभी सर्वे के आंकड़ों की पोल भी खुल गई और यह भी साफ हो गया कि जिले का बचपन अतिकुपोषण की काली छाया से सिसक रहा है। वजन अभियान के बाद आए आंकड़ाें के अनुसार जिले के 38,671 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। जिनको अपग्रेड कराने के लिए अब कवायद की जाएगी। जनपद के अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।
वजन दिवस अभियान पूरा हो गया है और इसके बाद जो स्थिति उभरकर आई है, उसने आज तक विभाग द्वारा कराए गए सभी सर्वों को पोल खोल दी। जनपद में 38,671 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं, जिसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। अतिकुपोषित बच्चों को बेहतर इलाज दिलाने तथा कुपोषण से मुक्त कराने के लिए सरकार ने राज्य पोषण मिशन ने अब कमर कस ली है।
प्रदेश में अतिकुपोषण बच्चों की संख्या को लेकर काफी भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। बाल विकास विभाग द्वारा जनपद में कराए गए सर्वे में भी अभी तक सिर्फ 7142 बच्चे ही अतिकुपोषित (लाल श्रेणी) में पंजीकृत थे, जबकि संस्थाओं द्वारा कराए गए सर्वे के आंकड़ों में भारी अंतर था।
ऐसे में अतिकुपोषण को जड़ से समाप्त करने के लिए सबसे पहले अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित करने की कवायद की गई और इसी क्रम में वजन दिवस अभियान का आयोजन हुआ। ज्ञात हो कि सरकार ने सात सितंबर व 10 सितंबर को वजन दिवस का आयोजन किया, जिसमें जनपद की 20 परियोजनाओं के 3930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत 6,81,552 बच्चों का वजन किया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों पर कराए गए वजन की अब रिपोर्ट तैयार हो गई है।
जिसमें जिले के अतिकुपोषित बच्चों की भी स्थिति साफ हो गई है। बाल विकास विभाग से अभी तक कराए गए सभी सर्वे के आंकड़ों की पोल भी खुल गई और यह भी साफ हो गया कि जिले का बचपन अतिकुपोषण की काली छाया से सिसक रहा है। वजन अभियान के बाद आए आंकड़ाें के अनुसार जिले के 38,671 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं। जिनको अपग्रेड कराने के लिए अब कवायद की जाएगी। जनपद के अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़ों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई।