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Hardoi News: अस्पताल में आग से निपटने के इंतजाम ढेर, हाईड्रेंट प्वाइंट बने कूड़ेदान

Mon, 14 Apr 2025 11:34 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Mon, 14 Apr 2025 11:34 PM IST
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Arrangements to fight fire in the hospital are in a mess, hydrant points have become dustbins
फोटो-09- महिला चिकित्सालय परिसर में लगा हाइडेंट प्वाइंट। संवाद
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फोटो-10- महिला चिकित्सालय परिसर में लगा हाइडेंट प्वाइंट का यह हाल। संवाद
- मेडिकल कॉलेज के वार्डाें में लगे अग्निशमन यंत्र फांक रहे धूल
- गर्मी में आग लगने की आशंकाओं के बावजूद पुख्ता नहीं हो रहे इंतजाम
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। गर्मी के दिनों में आग लगने की संभावनाओं के बाद भी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए काफी प्रयास हो रहे हैं लेकिन सुरक्षा के इंतजामों पर जिम्मेदार आंखें मूंदे बैठे हैं।
झांसी मेडिकल कॉलेज में नवंबर माह में आग से भयावह घटना हो चुकी है। इसके बावजूद महिला अस्पताल में आग बुझाने के इंतजाम बेहतर नहीं किए गए। निष्प्रोज्य अग्निशमन यंत्र और कूड़ेदान बन चुके हाईड्रेंट प्वाइंट मरीजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
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अस्पताल की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहते हैं। कोई हादसा हो जाता है तब जिम्मेदारों की नींद खुलती है। मामला भी खानापूर्ति करके मामले को बंद कर दिया जाता है। हरदोई के मेडिकल कॉलेज के अधीन महिला अस्पताल में वार्डाें से लेकर परिसर में हाईड्रेंट प्वाइंट और अग्निशमन यंत्रों की अनदेखी से किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
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जिम्मेदार अग्निशमन यंत्रों की देखरेख में काफी कोताही बरतते हैं। वार्ड में अग्निशमन यंत्र ढूंढे नहीं मिल रहे हैं और जहां अग्निशमन यंत्र लगे हैं वह भी धूल फांक रहे हैं। कई अग्निशमन यंत्रों में रिफिलिंग तो दूर लगाने के बाद उन्हें कभी साफ भी नहीं किया गया।

खुद प्यासे आग कहां से बुझाएंगे हाईड्रेंट प्वाइंट
हरदोई। मेडिकल कॉलेज के अधीन महिला अस्पताल मरीजों की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। महिला अस्पताल में प्रसूताओं के साथ ही नवजात बच्चे तक भर्ती रहते हैं। फिर भी अस्पताल में आग से बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल परिसर में अग्निशमन यंत्र तो लगे हुए हैं लेकिन कई यंत्रों की रिफलिंग नहीं हुई है। वहीं अस्पताल परिसर में हाईड्रेंट प्वाइंट भी बने हुए हैं लेकिन उनकी दशा देखकर तो यही लग रहा है कि उनमें बीते काफी समय से पानी ही नहीं आया है। अब हाईड्रेंट प्वाइंट ही सूखे पड़े हैं तो आग कैसे बुझाएंगे। यह तो अस्पताल के जिम्मेदार ही बता सकते हैं।

इमरजेंसी कक्ष में ही नहीं कोई आपातकाल दरवाजा
मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी कक्ष के निर्माण में मानकों की जमकर अनदेखी की गई है। इमरजेंसी में रेड, ग्रीन और यलो जोन बने हुए हैं, लेकिन सभी में बाहर से आने जाने का एक ही रास्ता है। अब तो इमरजेंसी कक्ष का विस्तार कर दिया गया है। बाहर निकलने का रास्ता अब तो और भी लंबा हो गया है। निर्माण कार्य होने के बाद भी इमरजेंसी कक्ष में ही आपातकाल के लिए कोई दरवाजा नहीं बनाया गया है। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी कक्ष में आग से बचाव के इंतजाम भी बेहतर नहीं है। कभी भी आग से संबंधित कोई भी अप्रिय घटना घटित होती है तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इमरजेंसी कक्ष में इमरजेंसी डोर न होने से कोई हादसा होता है तो मरीजों की जान पर बनना लगभग तय है।


कोट
मेडिकल कॉलेज में आग से बचाव के सभी उपकरण दुरुस्त हैं और सभी की जांच कर रिपोर्ट भी भेजी जा चुकी है। आगे से बचाव के लिए अस्पताल में पूरी व्यवस्था है। सिलेंडरों की साफ सफाई अगर नहीं हो रही है तो उसे करा दिया जाएगा।- डॉ. शिवम यादव, मीडिया प्रभारी, मेडिकल कॉलेज
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