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जिले में तीन हजार शस्त्र लाइसेंस धारक लापता!
अमर उजाला ब्यूरो हरदोई।
Updated Wed, 23 Dec 2015 12:21 AM IST
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शासन द्वारा शस्त्र लाइसेंस धारकों के लिए एनडीएएल योजना के तहत यूनिक कोड प्राप्त करने के लिए बढ़ाई गई तिथि भी 31 दिसंबर को समाप्त होने वाली है। इसके बाद भी जिले में करीब तीन हजार शस्त्र लाइसेंस धारकों का पता नहीं चल रहा है। यूनिक कोड देने के लिए कंप्यूटर फीडिंग कार्य का इंतजार कर रहे हैं। पर इनके बारे में कोई सूचना नहीं मिल रही है। विभाग के रिकॉर्ड में भी इनका कोई अता पता नहीं है। पेश है एक रिपोर्ट -
गफलत है या फिर गलत हैं पुराने आंकड़े
जिले में शस्त्र लाइसेंसों की संख्या को लेकर गफलत है या फिर पुराने आंकड़े गलत है। एनडीएल योजना आने से पहले तक बताए जा रही लाइसेंसों की संख्या 32 हजार के आंकड़े को आधार माना जाए तो कमोवेश जिले में तीन हजार शस्त्र लाइसेंस धारक लापता है। ज्ञात हो कि एनडीएएल यानी नेशनल डाटाबेस आफ आर्म लाइसेंस कार्यक्रम के तहत पूरे देश मेें सभी जिलो में शस्त्र लाइसेंस धारकों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। जिसके लिए हरदोई में करीब दो साल से फीडिंग कार्य चल रहा है। अभी तक फीडिंग का आंकड़ा करीब 27850 के आस पास है। करीब 1150 लाइसेंस विरासत के विचाराधीन बताए जा रहे है। इस हिसाब से यह संख्या करीब 29 हजार के आस पास पहुुंच रही । ऐसे में शेष 3 हजार लाइसेंस के बारे में जानकारी महकमे के पास नहीं है।
पहली से अवैध हो जाएंगे बिना यूनिक कोड वाले लाइसेंस
शस्त्र अनुभाग की पटल प्रभारी मधु शुक्ला ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयुध अधिनियम 1959 की नियमावली में किए गए संशोधन आयुध अधिनियम 2012 के तहत सभी शस्त्र लाइसेंसाें के लिए इलेक्ट्रानिक प्रारूप पर यूनिक कोड होना अनिवार्य है। इसको लेकर पूरे देश में नेशनल डाटाबेस आफ आर्म लाइसेंस एनडीएल कार्यक्रम के तहत आनलाइन फीड़िग कार्य कर यूनिक कोड एलाट किए जा रहे है। फीडिंग कार्य के लिए अंतिम तिथि 30 सिंतबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई थी। अगर इस तिथि को शासन ने आगे न बढ़ाया तो नियमानसार बिना यूनिक कोड वाले लाइसेंस 1 जनवरी से अवैध हो जाएंगे ।
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तो बाहर के हैं लाइसेंस
शस्त्र अनुभाग पटल प्रभारी , मधु शुक्ला ने बताया कि 32 हजार शस्त्र लाइसेंस होने के आंकड़ों की जानकारी पूर्व के पटल प्रभारियों द्वारा दी गई थी । वास्तव में अभी तक करीब 27850 लाइसेंस की फीडिंग हुई नियमानुसार एक से अधिक लाइसेंस के लिए एक धारक को एक ही कोड एलाट होता है इस लिए यूनिक कोड एलाट होने की संख्या लगभग 21016 है। करीब 1150 के आसपास विरासत आदि के केस पेंडिग है इनका विवरण तैयार कराया जा रहा है। पुराने आंकड़ों को सही माने तो अब करीब तीन हजार लाइसेंस धारकों का पता नहीं है । वे बाहर के लाइसेंस होने की संभावना है क्योंकि यूनिक कोड सिर्फ उसी जिले से एलाट होता है जहां से लाइसेंस जारी होता है।
आंकड़ों का रिकॉर्ड से कराएंगे मिलान - डीएम
जिलाधिकारी रमेश मिश्रा ने कहा कि अगर 32 हजार लाइसेंस के आंकड़े सही है तो फिर तीन हजार लाइसेंस को लेकर आंकड़ों का मिलान न होना गंभीर मामला है। इसमें लाइसेंस धारकों के लापता होने जैसी बात नहीं है । आंकड़ों की गलती भी हो सकती है। जब तक आंकड़ों का मिलान शस्त्र लाइसेंस रिकार्ड रजिस्टर आदि से नहीं होता तब तक कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी । मैनुअल रिकॉर्ड से आंकड़ों का मिलान कराया जाएगा और शस्त्र लाइसेंसों की संख्या को लेकर तस्वीर साफ की जाएगी ।
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गफलत है या फिर गलत हैं पुराने आंकड़े
जिले में शस्त्र लाइसेंसों की संख्या को लेकर गफलत है या फिर पुराने आंकड़े गलत है। एनडीएल योजना आने से पहले तक बताए जा रही लाइसेंसों की संख्या 32 हजार के आंकड़े को आधार माना जाए तो कमोवेश जिले में तीन हजार शस्त्र लाइसेंस धारक लापता है। ज्ञात हो कि एनडीएएल यानी नेशनल डाटाबेस आफ आर्म लाइसेंस कार्यक्रम के तहत पूरे देश मेें सभी जिलो में शस्त्र लाइसेंस धारकों का डाटा ऑनलाइन किया जा रहा है। जिसके लिए हरदोई में करीब दो साल से फीडिंग कार्य चल रहा है। अभी तक फीडिंग का आंकड़ा करीब 27850 के आस पास है। करीब 1150 लाइसेंस विरासत के विचाराधीन बताए जा रहे है। इस हिसाब से यह संख्या करीब 29 हजार के आस पास पहुुंच रही । ऐसे में शेष 3 हजार लाइसेंस के बारे में जानकारी महकमे के पास नहीं है।
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पहली से अवैध हो जाएंगे बिना यूनिक कोड वाले लाइसेंस
शस्त्र अनुभाग की पटल प्रभारी मधु शुक्ला ने बताया कि भारत सरकार द्वारा आयुध अधिनियम 1959 की नियमावली में किए गए संशोधन आयुध अधिनियम 2012 के तहत सभी शस्त्र लाइसेंसाें के लिए इलेक्ट्रानिक प्रारूप पर यूनिक कोड होना अनिवार्य है। इसको लेकर पूरे देश में नेशनल डाटाबेस आफ आर्म लाइसेंस एनडीएल कार्यक्रम के तहत आनलाइन फीड़िग कार्य कर यूनिक कोड एलाट किए जा रहे है। फीडिंग कार्य के लिए अंतिम तिथि 30 सिंतबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी गई थी। अगर इस तिथि को शासन ने आगे न बढ़ाया तो नियमानसार बिना यूनिक कोड वाले लाइसेंस 1 जनवरी से अवैध हो जाएंगे ।
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तो बाहर के हैं लाइसेंस
शस्त्र अनुभाग पटल प्रभारी , मधु शुक्ला ने बताया कि 32 हजार शस्त्र लाइसेंस होने के आंकड़ों की जानकारी पूर्व के पटल प्रभारियों द्वारा दी गई थी । वास्तव में अभी तक करीब 27850 लाइसेंस की फीडिंग हुई नियमानुसार एक से अधिक लाइसेंस के लिए एक धारक को एक ही कोड एलाट होता है इस लिए यूनिक कोड एलाट होने की संख्या लगभग 21016 है। करीब 1150 के आसपास विरासत आदि के केस पेंडिग है इनका विवरण तैयार कराया जा रहा है। पुराने आंकड़ों को सही माने तो अब करीब तीन हजार लाइसेंस धारकों का पता नहीं है । वे बाहर के लाइसेंस होने की संभावना है क्योंकि यूनिक कोड सिर्फ उसी जिले से एलाट होता है जहां से लाइसेंस जारी होता है।
आंकड़ों का रिकॉर्ड से कराएंगे मिलान - डीएम
जिलाधिकारी रमेश मिश्रा ने कहा कि अगर 32 हजार लाइसेंस के आंकड़े सही है तो फिर तीन हजार लाइसेंस को लेकर आंकड़ों का मिलान न होना गंभीर मामला है। इसमें लाइसेंस धारकों के लापता होने जैसी बात नहीं है । आंकड़ों की गलती भी हो सकती है। जब तक आंकड़ों का मिलान शस्त्र लाइसेंस रिकार्ड रजिस्टर आदि से नहीं होता तब तक कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी । मैनुअल रिकॉर्ड से आंकड़ों का मिलान कराया जाएगा और शस्त्र लाइसेंसों की संख्या को लेकर तस्वीर साफ की जाएगी ।