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Hardoi News: सेंसरयुक्त ट्रैक और बिचौलियों के फेर में फंसे आवेदक

Wed, 11 Feb 2026 10:53 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Feb 2026 10:53 PM IST
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Applicants trapped in censored tracks and middlemen
फोटो-24- उपसंभागीय परिवहन कार्यालय। संवाद
हरदोई। जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है। परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और निजी हाथों में सौंपी गई टेस्ट प्रक्रिया ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सेंसरयुक्त ट्रैक पर कुशलता दिखाने के बावजूद आवेदक फेल हो जाते हैं, जबकि बिचौलियों के माध्यम से आने वाले लोगों का काम आसानी से हो रहा है। तमाम आवेदकों को मायूस होकर भटकना पड़ रहा है।
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सरकार ने बिचौलियों पर लगाम लगाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र में दे दी है। निजी क्षेत्र में प्रत्यायन चालन प्रशिक्षण और परीक्षण केंद्र (एडीटीसी सेंटर) पर ड्राइविंग का टेस्ट देना होता है। इसके बाद ही लाइसेंस बन पाता है। सरकार की इस व्यवस्था ने आम लोगों को सुविधा देने के बजाए परेशान ही किया है। लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन और फीस जमा करने के बाद एआरटीओ कार्यालय में बायोमीट्रिक करानी पड़ती है। एडीटीसी सेंटर पर टेस्ट देना होता है। सेंसरयुक्त ट्रैक पर चालकों को प्रशिक्षण के लिए कई बार परेशान होना पड़ता है। आवेदकों को कई बार चक्कर काटने पड़ते हैं और बिना बिचौलियों के लाइसेंस बन ही नही पाता है।
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केस-1- कन्हईपुरवा निवासी किशन वर्मा ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। कहा कि निजी हाथों में जाने से पारदर्शिता बढ़ने के बजाय मनमानी और बढ़ गई है। अधिकारियों की चुप्पी से आवेदक परेशान हो रहे हैं।
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केस-2- हरियावां के सुनील शुक्ला ने बताया कि लाइसेंस बनवाने के लिए कई दिनों से भटक रहे हैं लेकिन काम नहीं हो पाया है। बिचौलिए ने सात हजार रुपये मांगे हैं।




वर्जन

एडीटीसी में पूरे ट्रैक पर कैमरे लगे हैं। वहां तय समय में कई बातों का ध्यान रखते हुए वाहन सफलतापूर्वक चलाना होता है। इसमें कई आवेदक अनावश्यक रूप से संयम खो देते हैं। बिचौलियों के चक्कर में न पकड़कर सीधे विभाग से काम कराएं तो दिक्कत नहीं आएगी। -अरविंद कुमार सिंह, एआरटीओ, हरदोई
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