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Hardoi News: आनंद महिंद्रा ने कहा, इरफान जैसे नवोंमेषी व जुनूनी वास्तुकारों की जरूरत है
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संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। शाहाबाद के मोहल्ला खेड़ाबीबीजई निवासी इरफान उर्फ पप्पू बाबा ने 12 साल की मेहनत से मिट्टी का टीला काट-काटकर बेसमेंट में दो मंजिला मकान बना दिया। केवल खुरपी व फावड़ा से तराशे गए महलनुमा मकान की खबरों के प्रकाशित होने पर महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन ने गुुरुवार को अपने ट्वीटर हैंडल इसकी तारीफ की है।
आनंद महिंद्रा ने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि हरदोई में एक शख्स ने 12 साल की अवधि में यह भूमिगत घर बनाया। इसे कुछ ऐसी चीज के रूप में वर्णित किया गया है जो बिल्कुल लीक से हटकर है, लेकिन यह खूबसूरती की चीज है। वह आदमी एक मूर्तिकार है... हमें उसके जैसे कई और नवोंमेषी और जुनूनी वास्तुकारों की जरूरत है।
शाहबाद के एक व्यक्ति ने अपने जुनून और हुनर के दम से फिर मोहल्ले को नई पहचान दिलाई है। साल 2010 से फकीर की तरह कर रहे जीवनयापन इरफान उर्फ पप्पू ने साल 2010 तक एक आम इंसान की तरह जीवन बिताया। बताया कि पिता के निधन के बाद शाहाबाद क्षेत्र के एक चुनाव में भाग लिया।
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इसमें निराशा हाथ लगी। मां व अन्य सदस्य पैतृक घर में ही रहते हैं, लेकिन साल 2011 से फकीरी के जीवन में कदम रख लिया। घर-परिवार छोड़कर निर्जन स्थान पर इसी टीले में गुफा बनाने में जुट गए जो, अब एक महल की तरह बनकर तैयार हो गया।
12 साल की मेहनत से मिट्टी के ऊंचे टीले को काट-काटकर बेसमेंट सहित दो मंजिला महल नुमा मकान बना दिया है। 11 कमरों के इस महल में बैठक, रसोई कक्ष के साथ ही इबादत के लिए मस्जिद भी बनाई है। गैलरी में खूबसूरत नक्काशी की गई है।
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हरदोई। शाहाबाद के मोहल्ला खेड़ाबीबीजई निवासी इरफान उर्फ पप्पू बाबा ने 12 साल की मेहनत से मिट्टी का टीला काट-काटकर बेसमेंट में दो मंजिला मकान बना दिया। केवल खुरपी व फावड़ा से तराशे गए महलनुमा मकान की खबरों के प्रकाशित होने पर महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन ने गुुरुवार को अपने ट्वीटर हैंडल इसकी तारीफ की है।
आनंद महिंद्रा ने ट्वीटर हैंडल पर लिखा है कि हरदोई में एक शख्स ने 12 साल की अवधि में यह भूमिगत घर बनाया। इसे कुछ ऐसी चीज के रूप में वर्णित किया गया है जो बिल्कुल लीक से हटकर है, लेकिन यह खूबसूरती की चीज है। वह आदमी एक मूर्तिकार है... हमें उसके जैसे कई और नवोंमेषी और जुनूनी वास्तुकारों की जरूरत है।
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शाहबाद के एक व्यक्ति ने अपने जुनून और हुनर के दम से फिर मोहल्ले को नई पहचान दिलाई है। साल 2010 से फकीर की तरह कर रहे जीवनयापन इरफान उर्फ पप्पू ने साल 2010 तक एक आम इंसान की तरह जीवन बिताया। बताया कि पिता के निधन के बाद शाहाबाद क्षेत्र के एक चुनाव में भाग लिया।
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इसमें निराशा हाथ लगी। मां व अन्य सदस्य पैतृक घर में ही रहते हैं, लेकिन साल 2011 से फकीरी के जीवन में कदम रख लिया। घर-परिवार छोड़कर निर्जन स्थान पर इसी टीले में गुफा बनाने में जुट गए जो, अब एक महल की तरह बनकर तैयार हो गया।
12 साल की मेहनत से मिट्टी के ऊंचे टीले को काट-काटकर बेसमेंट सहित दो मंजिला महल नुमा मकान बना दिया है। 11 कमरों के इस महल में बैठक, रसोई कक्ष के साथ ही इबादत के लिए मस्जिद भी बनाई है। गैलरी में खूबसूरत नक्काशी की गई है।