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Hardoi News: संस्थागत प्रसव के दावों के बीच घर में गूंजी किलकारी, सिस्टम पर सवाल

Tue, 10 Mar 2026 11:09 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:09 PM IST
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Amid claims of institutional delivery, a cry echoed in the house, questions raised on the system
हरदोई। एक तरफ संस्थागत प्रसवों को बढ़ाने के दावे किए जा रहे हैं दूसरी ओर धरातल पर स्थिति कुछ और ही है। सभी प्रसव संस्थागत ही हो इसके लिए आशा से लेकर एएनएम तक सक्रिय हैं। फिर भी भरखनी ब्लॉक के माननगला गांव में एक प्रसूता का घर पर ही प्रसव हो गया। मामला दो माह पुराना है लेकिन अब सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल मच गई है। सीडीओ ने भी इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
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सरकार जननी सुरक्षा योजना जैसी योजनाओं पर करोड़ों खर्च कर रही है ताकि महिलाओं के प्रसव असुरक्षित तरीके से घर पर न होकर सुरक्षित ढंग से संस्थागत हों। गर्भवती महिलाओं पर निगरानी करने के लिए आशा कार्यकर्ता, नियमित टीकाकरण के लिए एएनएम, चेकअप के लिए सीएचओ और चिकित्सक तक तैनात हैं फिर भी स्थिति यह है कि चोरी छिपे घरों पर प्रसव हो जाते हैं। पहले तो स्वास्थ्य विभाग को ही पता नहीं चलता है और जब मामला प्रकाश में आता है तो उस पर लीपापोती की जाती है।
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भरखनी के माननगला में भी यही हुआ। विभागीय जानकारी के अनुसार दो माह पहले गांव निवासी अरविंद की पत्नी सोनी को प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों के अनुसार उन्होंने सरकारी सेवाओं का लाभ लेने का प्रयास किया लेकिन कोई सुविधा नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने घर पर ही प्रसव कराया। इसकी जानकारी होने पर भरखनी सीएचसी प्रभारी ने समय से एंबुलेंस न पहुंचने की बात कही। हालांकि, इसके बाद एंबुलेंस प्रभारी की ओर से भी जानकारी ली गई। वहीं, मुख्य विकास अधिकारी सान्या छाबड़ा ने भी सीएचसी प्रभारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से सूचनाएं तलब की हैं।
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ट्रैकिंग पर खड़े हो रहे सवाल

गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग से लेकर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने की जिम्मेदारी आशा बहुओं और एएनएम की होती है। माननगला गांव की इस घटना ने साफ कर दिया है कि निगरानी तंत्र सही ढंग से काम नहीं कर रहा है। ऐसे में एक प्रसूता को मजबूरन घर पर ही असुरक्षित प्रसव का सहारा लेना पड़ा।


कागजों पर ही सक्रिय हो रहा सिस्टम

संस्थागत प्रसव का सिस्टम कागज पर ही दुरुस्त होता नजर आ रहा है। जिले में एएनएम को भी प्रसव कराने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिले में एएनएम ने अभी तक 1,863 प्रसव कराए हैं। जब एएनएम भी प्रसव करा रही हैं ऐसे में घर पर ही प्रसव होना स्वास्थ्य विभाग की नाकामी को दर्शा रहा है।




संस्थागत प्रसव में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भरखनी में घर पर हुए प्रसव के बाद अब सभी प्रभारियों को क्षेत्रीय आशा और एएनएम के साथ बैठक कर गर्भवतियों का चिह्नीकरण और फॉलोअप करते रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने के लिए कहा गया है। -डॉ. भवनाथ पांडेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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