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Hardoi News: फर्जी प्रमाणपत्र बनाने के गिरोह का सरगना निकला अहिराेरी का पंचायत अधिकारी

Fri, 31 Oct 2025 11:18 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई
संवाद न्यूज एजेंसी, हरदोई Updated Fri, 31 Oct 2025 11:18 PM IST
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Ahirori Panchayat officer turns out to be the kingpin of a gang involved in making fake certificates.
फोटो-26-लाल बिहारी। सोशल मीडिया
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- एसटीएफ ने लखनऊ में पांच लोगों को किया है गिरफ्तार
- 1.40 लाख फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। एसटीएफ ने फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोह के पांच लोगों को गिरफ्तार गिरोह का खुलासा किया है। आरोपियों में जिले के अहिरोरी ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी लाल बिहारी पाल भी शामिल है।
अब तक की जांच में लाल बिहारी पाल ही गैंग का लीडर बताया जा रहा है। एसटीएफ का दावा है कि यह लोग अब तक 1.40 लाख फर्जी जन्म और 2500 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर चुके हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि जुलाई में जिले में भी दो ग्राम पंचायतों से 700 से ज्यादा फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी हुए थे। हालांकि इसका खुलासा कर पुलिस आरोपियों को जेल भेज चुकी है।
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एसटीएफ की लखनऊ इकाई ने शुक्रवार को प्रेस नोट जारी कर दावा किया कि फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने वाले गिरोह को पकड़ा है। इसमें लखनऊ जनपद के कृष्णा नगर थाना क्षेत्र के सुभाषनगर निवासी लाल बिहारी पाल, गोंडा के पिपरा बिटोरा मढिया निवासी रवि वर्मा, उसका भाई सोनू वर्मा, इसी गांव का सत्यमोहन वर्मा और वंशराज वर्मा शामिल हैं।
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इन लोगों के पास से पांच मोबाइल फोन, 14 आयुष्मान कार्ड, सात एटीएम, 25 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र पांच मृत्यु प्रमाण पत्र, एक हार्डडिस्क, एक कार, एक ड्राइविंग लाइसें और 27690 रुपये बरामद किए हैं। इनमें लाल बिहारी पाल हरदोई के अहिरोरी विकास खंड में ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर तैनात है। हरदोई के टड़ियावां क्षेत्र के अलीशाबाद और रावल में भी बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए गए थे। एसटीएफ की कार्रवाई को इससे भी जोड़कर देखा जा रहा है।

इनसेट
दो महीने के लिए अवकाश पर था लाल बिहारी
जनपद में फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने का खुलासा होने के बाद लाल बिहारी ने ब्लाक में आना जाना कम कर दिया था। इसके बाद वह 23 अगस्त से 22 अक्तूबर तक के लिए अर्जित अवकाश लेकर चला गया था। अर्जित अवकाश पर जाने की वजह अब लोगों को समझ में आ रही है। दरअसल एसटीएफ का जो दावा है उससे लगता है कि लाल बिहारी लंबे समय से फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के काम में शामिल था।
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