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Hardoi News: बिना आईडी ही चौराहों पर बिक रहे एक्टिवेट सिम

Sat, 17 May 2025 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 May 2025 11:45 PM IST
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Activated SIM cards are being sold at crossroads without ID
हरदोई। साइबर फ्राॅड, आतंकी घटनाओं समेत गबन आदि में मोबाइल के प्रयोग के खुलासे के बाद भी गली-मोहल्लों और चौराहों पर बिना आईडी के एक्टिवेटेट सिम बिक रहे हैं। एक्टिवेटेट सिम की ब्रिकी के पीछे सेल्युलर कंपनियों में ग्राहकों की संख्या बढ़ाने और सिम बिक्री का लक्ष्य मुख्य कारण माना जा रहा है। निजी क्षेत्र की सेल्युलर कंपनियां सिम की खरीदारी के लिए ग्राहकों को लुभावने ऑफर भी देती हैं।
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चंडीगढ़ और आतंकी घटनाओं समेत साइबर फ्राॅड में सिम के उपयोग के बाद भी जागरूकता पर सिम बिक्री की प्रतिस्पर्धा भारी पड़ रही है। वहीं, सेल्युलर कंपनियों के लुभावने ऑफर ने सिम की बिक्री की संख्या काफी बढ़ा दी है, लेकिन लगातार उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या सीमित है। जिले में करीब आठ से अधिक प्रीपेड सिम ग्राहकों की तरफ से नियमित रीचार्ज न कराने से डी-एक्टिवेड मोड पर चले गए हैं। प्रीपेड सिम पर लुभावने ऑफर ने पोस्टपेड उपभाेक्ताओं की संख्या में कमी की है। पोस्टपेड मोबाइल ग्राहकों की संख्या अंगुलियों पर गिनने भर की है, जबकि प्रीपेड सिम के यूजर्स की संख्या करीब 25 लाख के पार होगी।
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ऑनलाइन देखकर मनचाहा नंबर भी आसानी से मिल जाता
साइबर अपराध में मोबाइल के दुरुपयोग के बाद भी इसे लेकर सजगता नहीं दिखाई दे रही है। गली-चौराहों पर बिकने वाले मोबाइल सिम के काउंटर पर ऑनलाइन देखकर मनचाहे सेल्युलर कंपनी का मनचाहा मोबाइल नंबर भी आसानी से मिल जा रहा है। बस ऐसे सिम पाने के लिए उपभोक्ता को सामान्य सिम से अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। ऑनलाइन पसंद कर लिए गए सिम को सादे सिम पर फीड कर दिया जाता है और ऐसे सिम 24 घंटे के अंदर काम करना शुरू कर देते हैं।
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साइबर अपराध के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सिम की इनकमिंग कर देते बंद
मोबाइल पर आने वाली कई बार कॉल अनजाने नंबर से होती है। इसमें कुछ कॉल परिचितों की होती हैं और उन पर बात भी होती और वापस कॉल करने पर कॉल भी होती है। साइबर अपराध के लिए उपयोग में लाए जाने वाले सिम से कॉल तो आती है और अपराधी विभिन्न प्रकार की बातों में उलझाकर और डराकर फ्रॉड कर लेते हैं। कुछ एक मामलों में कॉल को रिसीव न किए जाने से ऐसे नंबर की कॉल मिस्ड कॉल में चली जाती है। कई बार उपभोक्ता अनजाने नंबर को किसी अपने परिचित का समझकर वापस कॉल करते हैं तो इन नंबरों पर घंटी ही नहीं जाती। कॉल करने पर सीधे कॉल समाप्त हो जाती है। इससे उन लोगों के बारे में पता करना कठिन हो जाता है।
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जिले की सीमा में उपभोक्ता और अनजान नंबर कॉलर आईडी में आंध्र प्रदेश का होता प्रदर्शित
बहरहाल कुछ भी हो, संचार क्रांति और तकनीकी व्यवस्था बेहतर हुई है। जिले की सीमा में रहने वाले उपभोक्ता जिले में ही लगे मोबाइल टावरों से सिग्नल हासिल कर आपस में एक-दूसरे को कॉल कर बातचीत करते हैं। ऐसे में अनजान नंबर से आने वाली कॉल में मोबाइल पर ऐसे नंबर कॉलर आईडी में आंध्र प्रदेश के प्रदर्शित होते हैं। खासकर ऐसी कॉलर आईडी निजी क्षेत्र की सेल्युलर कंपनियों के उपभोक्ताओं में अधिक प्रदर्शित हो रही हैं, जबकि मोबाइल टावर को लगाए जाने के साथ ही उन्हें ग्लोबल पोजेशिनिंग सिस्टम (जीपीएस) मैप्ड किए जाने की व्यवस्था है।

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बीएसएनएल के प्रीपेड उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई है। नए सिम की बिक्री और पुराने सिम को 5 जी में अपडेट किए जाने के लिए दूर संचार विभाग का ग्राहक सेवा केंद्र संचालित है। आधार के बिना सिम नहीं दिया जा रहा है। वैसे तो जिले में बीएसएनएल के करीब दो लाख प्रीपेड सिम हैं, लेकिन उसमें करीब 35 हजार सिम ही एक्टिवेट मोड पर हैं। -अशोक कुमार वैश्य, उप खंड अधिकारी, बीएसएनएल
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