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Hardoi News: मिश्रित मार्शल आर्ट में अचल ने किया चैंपियन बेल्ट पर कब्जा
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फोटो- 37- चेंपियनशिव जीतने पर अचल को बेल्ट पहनाते आयोजक। स्रोत: स्वयं
भरावन। उत्तराखंड के काशीपुर में आयोजित मिश्रित मार्शल आर्ट (एमएमए) चैंपियनशिप में क्षेत्र के खिलाड़ी ने खिताबी मुकाबला जीतकर गौरव बढ़ाया। उन्होंने 56 किलोग्राम भार वर्ग में फ्लाइवेट चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। तीनों मुकाबलों में जीत दर्ज करने पर उन्हें चैंपियन बेल्ट के साथ 11 हजार रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया गया। चैंपियनशिप जीतकर लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया गया।
प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर अतरौली के किसान पुत्र अचल सिंह ने महज छह माह के प्रशिक्षण में बड़ी उपलब्धि हासिल की। 22 वर्षीय अचल सिंह के पिता संतोष सिंह उर्फ बबलू किसान हैं। अचल को बचपन से ही कुश्ती का शौक रहा है। इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने छह माह पहले मिश्रित मार्शल आर्ट (एमएमए) का प्रशिक्षण शुरू किया। सीमित समय में उन्होंने कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास से अपनी प्रतिभा साबित कर दी।
चैंपियनशिप में सात राज्यों और नेपाल के करीब 90 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। अचल ने पहले मुकाबले में दिल्ली, दूसरे में देहरादून और तीसरे मुकाबले में लखनऊ के खिलाड़ी को हराकर खिताब पर कब्जा जमाया। अचल ने बताया कि वह प्रतिदिन चार घंटे अभ्यास करते हैं। साथ ही दुकान पर निजी नौकरी कर अपने दायित्व भी निभाते हैं। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने प्रशिक्षक मनोज कुमार गौतम के मार्गदर्शन को दिया। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का नाम रोशन करना है।
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प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर अतरौली के किसान पुत्र अचल सिंह ने महज छह माह के प्रशिक्षण में बड़ी उपलब्धि हासिल की। 22 वर्षीय अचल सिंह के पिता संतोष सिंह उर्फ बबलू किसान हैं। अचल को बचपन से ही कुश्ती का शौक रहा है। इसी जुनून को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने छह माह पहले मिश्रित मार्शल आर्ट (एमएमए) का प्रशिक्षण शुरू किया। सीमित समय में उन्होंने कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास से अपनी प्रतिभा साबित कर दी।
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चैंपियनशिप में सात राज्यों और नेपाल के करीब 90 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। अचल ने पहले मुकाबले में दिल्ली, दूसरे में देहरादून और तीसरे मुकाबले में लखनऊ के खिलाड़ी को हराकर खिताब पर कब्जा जमाया। अचल ने बताया कि वह प्रतिदिन चार घंटे अभ्यास करते हैं। साथ ही दुकान पर निजी नौकरी कर अपने दायित्व भी निभाते हैं। अपनी सफलता का श्रेय उन्होंने प्रशिक्षक मनोज कुमार गौतम के मार्गदर्शन को दिया। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर देश का नाम रोशन करना है।
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