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Hardoi News: नाबालिग से दुष्कर्म में अभियुक्त को दस साल की सजा

Tue, 31 Mar 2026 11:28 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 31 Mar 2026 11:28 PM IST
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Accused sentenced to ten years in prison for raping a minor
हरदोई। नाबालिग से दुष्कर्म के साढ़े 10 साल पुराने मामले में एक शख्स को दोषी करार दिया गया है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट मनमोहन सिंह ने अभियुक्त को 10 साल की सजा सुनाई है। 20 हजार रुपये का जुर्माना भी अभियुक्त पर किया है। जुर्माना न देने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भी काटनी होगी। जुर्माने की आधी रकम बतौर क्षतिपूर्ति पीड़िता को भी देने के आदेश अपर जिला जज ने दिए हैं।
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शाहाबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी महिला ने 22 अक्तूबर 2015 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि 10 अक्तूबर 2015 को अपने चचेरे नाना प्यारे के साथ हर्रई गई थी। आरोप था कि प्यारे ने उसकी बेटी को शाहाबाद के गढ़ीचांद खां निवासी रंजीत और गुलवीर के हाथों बीस हजार रुपये में बेच दिया था। दोनों ने उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया था। आरोप लगाया था कि दोनों आरोपी शातिर अपराधी हैं। फर्जीवाड़े, लूट और चाेरी की घटनाएं अंजाम देते हैं। जान से मार डालने का शक भी जाहिर किया था। पुलिस ने अपहरण की धारा में तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
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इसके 10 दिन बाद पुलिस ने किशोरी को शाहाबाद से ही सकुशल खोज लिया था। विवेचना के बाद पुलिस ने रंजीत के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। गुलवीर व प्यारे का नाम निकाल दिया था। अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाहों को पेश किया गया। इसके साथ ही 10 अभिलेखीय साक्ष्य भी पेश किए गए। दोनों पक्षों के तर्को को सुनने व पत्रावली पर मौजूद सबूतों के आधार पर अपर जिला जज मनमोहन सिंह ने सजा सुनाई है।
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प्रेम प्रसंग में बनाए थे संबंध...नाबालिग की सहमति बेबुनियाद
नाबालिग ने पुलिस और मजिस्ट्रेट को दिए बयान में बताया था कि पिता की मौत होने के बाद उसकी मां ने दूसरी शादी कर ली थी। वह अपने नाना के घर गई थी। नाना के घर रंजीत का भी आना जाना था। इसी दौरान दोनों का संपर्क हुआ था। बताया था कि रंजीत से उसके कई बार संबंध बने थे। पीड़िता व गवाहों के बयानों को पढ़ने के बाद कोर्ट ने कहा की गवाही से स्पष्ट है कि दोनों के मध्य प्रेम प्रसंग था और इसी को लेकर आपसी संबंध बने थे। पीड़िता की उम्र 11 साल तीन माह है। कानून की नजर में 18 वर्ष से कम आयु की महिला की सहमति महत्वहीन है। उसकी सहमति किसी भी आरोपी को दोष मुक्त कराए जाने का आधार नहीं बन सकती है, यही टिप्पणी करते हुए अपर जिला जज ने सजा सुनाई है।
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