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किसानों के लिए अभिशाप नहीं संजीवनी है पराली
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फोटो-26-अम्मार जैदी। संवाद
- फोटो : HARDOI
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हरदोई। पराली किसानों के लिए अभिशाप नहीं है। ये खेतों के लिए संजीवनी है। किसानों को इस बात को समझना चाहिए कि मिट्टी की आवश्यकताओं को पूरा करने में पराली महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कहीं न कहीं इसको जलाने से किसान अपना ही नुकसान कर रहे हैं।
ये बात रविवार को पिहानी निवासी प्रगतिशील किसान अम्मार जैदी ने कही। उन्होंने रविवार को अपने खेतों से ही अमर उजाला फेसबुक लाइव के जरिये किसानों को पराली के फायदे बताए। उनका कहना है कि पराली का खेतों में उपयोग आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए कोई विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती और अतिरिक्त खर्चा भी नहीं आता। पराली में ऐसे तत्व होते हैं, जो मिट्टी की जरूरत के हैं। किसानों को समझना चाहिए कि जिसे वह व्यर्थ समझ रहे हैं, वही खेत में जान डालती है।
सवाल : फसल के अपशिष्ट हटाने के लिए जो यंत्र हैं, वह कारगर नहीं हैं। कोई अन्य उपाय बताएं? - जयदेव सिंह गौतम
जवाब : धान का अपशिष्ट (पराली) हटाने के लिए किसी विशेष यंत्र की आवश्यकता नहीं है। हैरो या कल्टीवेटर से खेत में ही पराली को मिट्टी में मिला देना है। तीन या चार दिन खेत खाली छोड़ने के बाद इसमें पानी भरवा देना है और फिर जुताई कर देनी है।
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सवाल : खेत में लगे गेहूं के डंठल को खाद के रूप में कैसे उपयोग करें? - भारत शाहू
जवाब : गेहूं के अपशिष्ट को भी पराली की तरह ही खेत में जोत देना चाहिए। इससे भी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। हालांकि गेहूं के अवशेष से अधिकांश लोग भूसा करा लेते हैं, लेकिन इसके बाद भी जो अवशेष बचते हैं, उन्हें खेतों में ही पड़े रहने देना चाहिए।
सवाल : पराली निस्तारण में डी कंपोजर कितना कारगर है? - विवेक कृष्ण सिकरवार
जवाब : पराली के निस्तारण में डी कंपोजर काफी कारगर है। डी कंपोजर से बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। डी कंपोजर का मतलब कोई नुकसान दायक चीज नहीं है। अगर डी कंपोजर नहीं मिलता है, तो यूरिया पराली में डालकर डी कंपोजर के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
सवाल : पराली जलाने पर किसानों पर मुकदमा होना क्या ज्यादती नहीं है ? - राकेश पांडेय
जवाब : पराली कोई भी किसान इसलिए नहीं जलाता कि प्रदूषण हो, इसलिए जलाता है कि उसे पता ही नहीं है कि ये खेत के लिए कितनी फायदेमंद है। मुकदमा लिखाने की जगह गांव-गांव जागरुकता गोष्ठी की जानी चाहिए। किसानों को बताया जाना चाहिए कि पराली खेतों के लिए फायदेमंद है।
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ये बात रविवार को पिहानी निवासी प्रगतिशील किसान अम्मार जैदी ने कही। उन्होंने रविवार को अपने खेतों से ही अमर उजाला फेसबुक लाइव के जरिये किसानों को पराली के फायदे बताए। उनका कहना है कि पराली का खेतों में उपयोग आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए कोई विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती और अतिरिक्त खर्चा भी नहीं आता। पराली में ऐसे तत्व होते हैं, जो मिट्टी की जरूरत के हैं। किसानों को समझना चाहिए कि जिसे वह व्यर्थ समझ रहे हैं, वही खेत में जान डालती है।
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सवाल : फसल के अपशिष्ट हटाने के लिए जो यंत्र हैं, वह कारगर नहीं हैं। कोई अन्य उपाय बताएं? - जयदेव सिंह गौतम
जवाब : धान का अपशिष्ट (पराली) हटाने के लिए किसी विशेष यंत्र की आवश्यकता नहीं है। हैरो या कल्टीवेटर से खेत में ही पराली को मिट्टी में मिला देना है। तीन या चार दिन खेत खाली छोड़ने के बाद इसमें पानी भरवा देना है और फिर जुताई कर देनी है।
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सवाल : खेत में लगे गेहूं के डंठल को खाद के रूप में कैसे उपयोग करें? - भारत शाहू
जवाब : गेहूं के अपशिष्ट को भी पराली की तरह ही खेत में जोत देना चाहिए। इससे भी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। हालांकि गेहूं के अवशेष से अधिकांश लोग भूसा करा लेते हैं, लेकिन इसके बाद भी जो अवशेष बचते हैं, उन्हें खेतों में ही पड़े रहने देना चाहिए।
सवाल : पराली निस्तारण में डी कंपोजर कितना कारगर है? - विवेक कृष्ण सिकरवार
जवाब : पराली के निस्तारण में डी कंपोजर काफी कारगर है। डी कंपोजर से बैक्टीरिया सक्रिय हो जाते हैं। डी कंपोजर का मतलब कोई नुकसान दायक चीज नहीं है। अगर डी कंपोजर नहीं मिलता है, तो यूरिया पराली में डालकर डी कंपोजर के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है।
सवाल : पराली जलाने पर किसानों पर मुकदमा होना क्या ज्यादती नहीं है ? - राकेश पांडेय
जवाब : पराली कोई भी किसान इसलिए नहीं जलाता कि प्रदूषण हो, इसलिए जलाता है कि उसे पता ही नहीं है कि ये खेत के लिए कितनी फायदेमंद है। मुकदमा लिखाने की जगह गांव-गांव जागरुकता गोष्ठी की जानी चाहिए। किसानों को बताया जाना चाहिए कि पराली खेतों के लिए फायदेमंद है।