फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hardoi News ›   ‘नई नस्ल को बर्बादी से बचाएं’

‘नई नस्ल को बर्बादी से बचाएं’

Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
Hardoi
Hardoi Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
पिहानी (हरदोई)। विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान मौलाना महफूजुरुर्रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी ने कहा कि आधुनिक सह शिक्षा ने समाज को विनाश के गर्त में धकेल दिया है। नई तालीम बुरी नहीं है, पर नई तहजीब बुरी है। इसलाम क्षेत्रीय धर्म नहीं, एक अंतरराष्ट्रीय धर्म है। उन्होंने देशवासियों से उन्होंने मानवता से पशुता की ओर बढ़ती नई नस्ल को बर्बादी से बचाने की अपील की।
विज्ञापन

मदरसा इमदादुल इस्लाम मेरठ में शेखुल हदीस व प्राचार्य मौलाना जमाली शनिवार को स्व. मौलाना जमालुद्दीन की याद में आयोजित दो दिवसीय जलसे के आखिरी दिन भीड़ को खिताब फरमा रहे थे। मौलाना ने कहा कि कई धार्मिक पुस्तकों में नबी-ए-करीम मोहम्मद साहब के आने की खबर दी गई है। आपकी आमद से संबंधित तमाम जरूरी बातें पहले की आसमानी किताबों में मौजूद हैं। सृष्टि के रचयिता ने जरूरत और क्षेत्रीय कल्चर के लिए वैसे ही नबी और रसूल भेजे, जैसी जरूरत समझी। उन्होंने कहा कि हमारी नई नस्ल बुजुर्गों की कद्र नहीं कर रही है। तरक्की की दौड़ में आज के मानव को इंसानियत और हैवानियत की तमीज नहीं रही। बेहयाई को शान समझा जाने लगा है।
विज्ञापन

मौलाना ने कहा इस्लाम वह एकमात्र धर्म है, जिसमें सबसे पहला आदेश शिक्षा के लिए दिया गया है। हमें कुरान में चौदह सौ बरस पहले ही हर तरह का ज्ञान दे दिया गया। आज जो कुछ नया हम देख रहे हैं, वह सब कुरान में पहले से मौजूद है। मां-बाप से मुखातिब मौलाना ने कहा कि अपने बच्चों को कत्ल न करें। कत्ल करने का मतलब यह नहीं कि उन्हें तलवार या गोली से मार दी जाए, बल्कि बच्चों को शिक्षा न दिलाना भी कत्ल करना है। इससे पूर्व दारूल उलूम फारूकिया काकोरी के प्रबंधक मौलाना अब्दुल अली फारूकी ने कहा कि मोमिन की पहचान यही है कि वह मौत से खौफजदा नहीं होता। ऐसे लोगों पर कभी दुनिया हावी नहीं हो सकती, जो मौत से नहीं डरते। रसूल और सहाबा के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मुसलमान सहाबा और रसूल की जिंदगी को अपनी जिंदगियों में भी उतारें।
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे पूर्व जलसे की शुरुआत तिलावते कुरान के साथ हुई। मौलाना शाहीन जमाली के साथ नई नस्ल के सीधे रास्ते पर आने की दुआएं मांगी गईं। आयोजक मोईनुद्दीन अंसारी व गयासुद्दीन ने व्यवस्थाएं देखीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed