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तालाब सूखने से पशु-पक्षियों के गले सूखे
Hardoi
Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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कछौना। विकास खंड के अंतर्गत करोड़ों रुपए की लागत से खुदवाए गए तालाब अर्थहीन साबित हो रहे हैं। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद भी तालाब सूखे पड़े हुए हैं, जिससे पशु-पक्षी पानी की एक-एक बूंद के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। शासन द्वारा जल संचय करने, ग्रामीण तथा वन्य जंतुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए करोड़ों रुपए की लागत से करीब 300 तालाबों को खुदवाया गया था, लेकिन यह तालाब अर्थहीन साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि मई माह में भीषण गर्मी के चलते सभी तालाब सूखे पड़े हुए हैं। वहीं शासन की सख्त निर्देशों के बावजूद जिम्मेदारों द्वारा इन्हें भरवाया नहीं गया। सूत्रों की मानें तो विकास खंड में उन दो चार तालाबों में पानी भरवाया गया है, जहां पर नहरों व नलकूपों का साधन है, पर यदि गंभीरता से गौर किया जाए तो ऐसे स्थानों पर तालाबों को भरवाया जाना उचित नहीं है, जहां पहले से ही पानी की सुविधा हो। विभाग उन तालाबों की तरफ ध्यान नहीं दे रहा, जो एक लंबे समय से सूखे पड़े हैं। साथ ही आस पड़ोस में काफी दूर तक जल संचय का कोई साधन नहीं है। इस बाबत एडीओ पंचायत लाल चंद्र ने बताया कि नहरों से संबंधित तालाबों को भरवाया गया है। उन्होंने अन्य तालाबों को भरवाने के लिए बजट का अभाव बताया है।
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