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मनरेगा में औरतों ने भी फूंकी जान
Hardoi
Updated Sat, 12 May 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। जिले की महिलाएं अपने को अबला नहीं, बल्कि सबला साबित करने में कोई कोर कसर नहीं रख रही। घर में चौका चूल्हा करने के बाद भी वह मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रही हैं। वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत कुल सृजित 81 लाख मानव दिवसों में से तीन लाख 53 हजार से ज्यादा मानव दिवस मेहनतकश महिलाओं ने अपने नाम करवा लिए।
रिपोर्ट देखकर यह कहना गलत न होगा कि परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान करने को पुरुषों के साथ महिलाएं भी घरों की चौखट से बाहर आई हैं। एक समय वह भी था कि जब जिले के अफसरों को महिला जॉब कार्डधारकों को काम ढूंढना पड़ता था। यदा कदा मिल भी जाती थीं, तो उन्हें काम करने को प्रोत्साहित करना पड़ता था, पर अब ऐसा नहीं है। अपने दायित्वों को समझते हुए एवं अपने परिवार को आर्थिक सुदृता प्रदान करने को महिलाएं घूंघट की ओट के साथ ही घरों की दहलीज से भी बाहर आ रही हैं। मनरेगा में ही वित्तीय वर्ष 11-12 में 81,29,018 मानव दिवसों का सृजन किया गया, उसमें महिला के नाम पर 3,53,410 मानव दिवसों का सृजन किया गया।
अफसरों की मानें तो महिलाओं को काम को प्रोत्साहित क रने को शासन की ओर से ही रेट्स आफ शेड्यूल को पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कम किया गया। साइट पर काम करने वाली अन्य महिलाआें के बच्चों को संभालने को भी एक महिला मजदूर की जिम्मेदारी को सुनिश्चित किया गया।उनके काम को हल्का करने के बाद अपने आप महिला मजदूरों में जागृति आई है। शासन को गई रिपोर्ट में कहा गया कि अहिरोरी ब्लाक में सृजित दिवस 24,284, बावन 7,316, बेहंदर 13,123, भरावन 30,206, भरखनी 21,183, बिलग्राम 16,579, हरियावां 31,304, हरपालपुर 32,652, कछौना 4,393, कोथावां 32,880, माधौगंज 6,547, मल्लावां 4,238, पिहानी 10,509, सांडी 11,796, संडीला 20,369, शाहाबाद 21,830, सुरसा 11,047, टड़ियावां 6,314 एवं टोडरपुर में 46,810 मानव दिवसों का सृजन महिलाओं के नाम पर किया गया है।
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रिपोर्ट देखकर यह कहना गलत न होगा कि परिवार को आर्थिक मजबूती प्रदान करने को पुरुषों के साथ महिलाएं भी घरों की चौखट से बाहर आई हैं। एक समय वह भी था कि जब जिले के अफसरों को महिला जॉब कार्डधारकों को काम ढूंढना पड़ता था। यदा कदा मिल भी जाती थीं, तो उन्हें काम करने को प्रोत्साहित करना पड़ता था, पर अब ऐसा नहीं है। अपने दायित्वों को समझते हुए एवं अपने परिवार को आर्थिक सुदृता प्रदान करने को महिलाएं घूंघट की ओट के साथ ही घरों की दहलीज से भी बाहर आ रही हैं। मनरेगा में ही वित्तीय वर्ष 11-12 में 81,29,018 मानव दिवसों का सृजन किया गया, उसमें महिला के नाम पर 3,53,410 मानव दिवसों का सृजन किया गया।
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अफसरों की मानें तो महिलाओं को काम को प्रोत्साहित क रने को शासन की ओर से ही रेट्स आफ शेड्यूल को पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में कम किया गया। साइट पर काम करने वाली अन्य महिलाआें के बच्चों को संभालने को भी एक महिला मजदूर की जिम्मेदारी को सुनिश्चित किया गया।उनके काम को हल्का करने के बाद अपने आप महिला मजदूरों में जागृति आई है। शासन को गई रिपोर्ट में कहा गया कि अहिरोरी ब्लाक में सृजित दिवस 24,284, बावन 7,316, बेहंदर 13,123, भरावन 30,206, भरखनी 21,183, बिलग्राम 16,579, हरियावां 31,304, हरपालपुर 32,652, कछौना 4,393, कोथावां 32,880, माधौगंज 6,547, मल्लावां 4,238, पिहानी 10,509, सांडी 11,796, संडीला 20,369, शाहाबाद 21,830, सुरसा 11,047, टड़ियावां 6,314 एवं टोडरपुर में 46,810 मानव दिवसों का सृजन महिलाओं के नाम पर किया गया है।
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