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अब तो नींद से जागो, बीमारी रोको
Hardoi
Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। ग्रामीण क्षेत्रों में रोगों का प्रकोप बढ़ता जा रहा, पर स्वास्थ्य विभाग हाथ पर हाथ रखे बैठा है। रात में ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टर नहीं रुकते। गांवों में एएनएम जाती नहीं और आशा बहुओं के किटों में दवाएं नहीं हैं। उल्टी, दस्त, बुखार होने पर लोग झोला छाप डॉक्टरों की शरण में पहुंच रहे हैं।
गर्मी की शुरुआत के साथ रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया है। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से इंतजाम भी किए जाते हैं, पर इस वर्ष अभी तक कुछ नहीं किया गया है। जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी के साथ न्यू पीएचसी पर डॉक्टर मौजूद रहते हैं, पर हकीकत दावों की पोल खोल रही है। एक दो सीएचसी व पीएचसी को छोड़ दें तो कहीं पर भी रात में डॉक्टर नहीं रुकते। न्यू पीएचसी का तो हाल और बुरा है। 57 न्यू पीएचसी में 30 पर संविदा डॉक्टरों की तैनाती थी, पर नवीनीकरण न होने से वहां पर कोई डॉक्टर नहीं है। बची कसर ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम पूरी कर रहीं हैं।
जिले के 1101 ग्राम पंचायतों में चार सौ से ज्यादा एएनएम तैनात हैं, पर वह भी गांव में एक दो बार ही जाती हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में आशा बहुओं को प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सभी गांव पंचायतों में दो-दो आशा बहुएं तैनात हैं। विभाग ने आशा बहुओं को किट देकर प्राथमिक उपचार की दवाई भी दी थी। मंशा थी कि अगर किसी गांव में रात में किसी ग्रामीण को उल्टी दस्त या बुखार आदि हो, तो वह आशा बहू से दवा ले लें और आराम मिलने पर अस्पताल में इलाज कराएं। गत वर्ष यह योजना सफल भी हुई थी, पर इस वर्ष तो इसकी शुरुआत भी नहीं की गई है। हालत यह है कि आशा बहुओं को पैसा नहीं मिला, जिससे वह रुचि नहीं ले रहीं और विभाग ने भी उन्हें कोई दवा मुहैया नहीं कराई। इससे आशा बहुएं खाली किट लिए घूम रही हैं। किसी ग्रामीण को एक गोली की जरूरत पड़ने पर उसे झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाना पड़ता है। उधर, सीएमओ डॉ. एसके तिवारी का क हना है कि जिले में पर्याप्त इंतजाम हैं। डॉक्टरों को रात में रुकने का फरमान है। रही बात आशा बहुओं के पास दवा की मौजूदगी की तो वह भी मुहैया कराई जा रही हैं।
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गर्मी की शुरुआत के साथ रोगों का प्रकोप भी बढ़ गया है। वैसे तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से इंतजाम भी किए जाते हैं, पर इस वर्ष अभी तक कुछ नहीं किया गया है। जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी के साथ न्यू पीएचसी पर डॉक्टर मौजूद रहते हैं, पर हकीकत दावों की पोल खोल रही है। एक दो सीएचसी व पीएचसी को छोड़ दें तो कहीं पर भी रात में डॉक्टर नहीं रुकते। न्यू पीएचसी का तो हाल और बुरा है। 57 न्यू पीएचसी में 30 पर संविदा डॉक्टरों की तैनाती थी, पर नवीनीकरण न होने से वहां पर कोई डॉक्टर नहीं है। बची कसर ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम पूरी कर रहीं हैं।
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जिले के 1101 ग्राम पंचायतों में चार सौ से ज्यादा एएनएम तैनात हैं, पर वह भी गांव में एक दो बार ही जाती हैं। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में आशा बहुओं को प्राथमिक उपचार की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सभी गांव पंचायतों में दो-दो आशा बहुएं तैनात हैं। विभाग ने आशा बहुओं को किट देकर प्राथमिक उपचार की दवाई भी दी थी। मंशा थी कि अगर किसी गांव में रात में किसी ग्रामीण को उल्टी दस्त या बुखार आदि हो, तो वह आशा बहू से दवा ले लें और आराम मिलने पर अस्पताल में इलाज कराएं। गत वर्ष यह योजना सफल भी हुई थी, पर इस वर्ष तो इसकी शुरुआत भी नहीं की गई है। हालत यह है कि आशा बहुओं को पैसा नहीं मिला, जिससे वह रुचि नहीं ले रहीं और विभाग ने भी उन्हें कोई दवा मुहैया नहीं कराई। इससे आशा बहुएं खाली किट लिए घूम रही हैं। किसी ग्रामीण को एक गोली की जरूरत पड़ने पर उसे झोलाछाप डॉक्टर की शरण में जाना पड़ता है। उधर, सीएमओ डॉ. एसके तिवारी का क हना है कि जिले में पर्याप्त इंतजाम हैं। डॉक्टरों को रात में रुकने का फरमान है। रही बात आशा बहुओं के पास दवा की मौजूदगी की तो वह भी मुहैया कराई जा रही हैं।
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