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ब्योरा न मिलने पर नोटिस
Hardoi
Updated Wed, 10 Sep 2014 05:31 AM IST
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हरदोई। मनरेगा के अंतर्गत जिले में व्यय की गई धनराशि के अभिलेख नहीं मिल रहे हैं। हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने अभिलेख तलब किए हैं, पर जनपद की एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के सापेक्ष एक सैकड़ा गांवों में भी अभिलेख नहीं मिले। जनपद की ऐसी स्थिति पर डीएम ने काफी नाराजगी व्यक्त की और मंगलवार को सभी बीडीओ व कार्यदायी संस्थाओं को नोटिस भेज दिया।
उन्हाेंने अभिलेख मुहैया कराने का अंतिम अवसर देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। रोजगार देने के लिए वित्तीय वर्ष 06-07 में शुरू हुई मनरेगा योजना में जमकर हेरफेर हुआ। मनरेगा की धनराशि का दुरुपयोग इस कदर हुआ कि जिम्मेदारों ने व्यय राशि का हिसाब रखना भी उचित नहीं समझा। अब स्थिति यह है कि ग्राम पंचायतों में अभिलेख ही नहीं मिल रहे, जो अफसरों के माथे पर सिकन डाले हुए हैं। ज्ञात हो कि मनरेगा में हुए अरबों की राशि के गबन पर हाईकोर्ट ने वित्तीय वर्ष 07-08 से वर्ष 10-11 के बीच कार्यों की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने जनपदों से अभिलेख मांगे हैं जिसको देने में अब जिम्मेदारों के पसीने छूट रहे हैं। एक ओर सीबीआई द्वारा अभिलेख देने को रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों से अभिलेख मौजूद नहीं हैं।
गौरतलब हो कि जिले की 19 विकास खंडों में कुल 1101 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जिले की सिर्फ 10 विकास खंडों की मात्र 749 ग्राम पंचायतों से ही मनरेगा के अभिलेख मिले हैं, जबकि अन्य विकास खंडों की ग्राम पंचायतों के अभिलेखों का कोई अता पता नहीं है। इस स्थिति पर डीएम रमेश मिश्रा ने सभी बीडीओ और कार्यदायी संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी की है। डीएम ने सभी को अंतिम अवसर देते हुए अभिलेख मुहैया न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
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उन्हाेंने अभिलेख मुहैया कराने का अंतिम अवसर देते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी। रोजगार देने के लिए वित्तीय वर्ष 06-07 में शुरू हुई मनरेगा योजना में जमकर हेरफेर हुआ। मनरेगा की धनराशि का दुरुपयोग इस कदर हुआ कि जिम्मेदारों ने व्यय राशि का हिसाब रखना भी उचित नहीं समझा। अब स्थिति यह है कि ग्राम पंचायतों में अभिलेख ही नहीं मिल रहे, जो अफसरों के माथे पर सिकन डाले हुए हैं। ज्ञात हो कि मनरेगा में हुए अरबों की राशि के गबन पर हाईकोर्ट ने वित्तीय वर्ष 07-08 से वर्ष 10-11 के बीच कार्यों की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई ने जनपदों से अभिलेख मांगे हैं जिसको देने में अब जिम्मेदारों के पसीने छूट रहे हैं। एक ओर सीबीआई द्वारा अभिलेख देने को रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राम पंचायतों से अभिलेख मौजूद नहीं हैं।
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गौरतलब हो कि जिले की 19 विकास खंडों में कुल 1101 ग्राम पंचायतें हैं, लेकिन स्थिति यह है कि जिले की सिर्फ 10 विकास खंडों की मात्र 749 ग्राम पंचायतों से ही मनरेगा के अभिलेख मिले हैं, जबकि अन्य विकास खंडों की ग्राम पंचायतों के अभिलेखों का कोई अता पता नहीं है। इस स्थिति पर डीएम रमेश मिश्रा ने सभी बीडीओ और कार्यदायी संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी की है। डीएम ने सभी को अंतिम अवसर देते हुए अभिलेख मुहैया न कराने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
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