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देरी के फंडे पर ब्याज का डंडा
Hardoi
Updated Sat, 05 Apr 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। शासन द्वारा केसीसी योजना में समय से पैसा जमा करने पर दी गई कम ब्याज लगने की सुविधा पर ऋण अदायगी में देरी का फंडा ज्यादा ब्याज का डंडा चलवा रहा है, जिससे शासन की मंशा को करारा झटका लगने के साथ ही बैंकों में एनपीए को लेकर चिंता बढ़ जाती है।
बैंकर्स का कहना है कि किसानों को केसीसी में दी जाने वाली कम ब्याज की सुविधा का लाभ समय से ऋण अदायगी कर अवश्य उठाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि कम ब्याज एवं समय सीमा के भीतर ऋण अदायगी समय के प्रति जागरूकता न होने से ज्यादातर किसानों को केसीसी पर पूरा ब्याज चुकाना पड़ता है या फिर वे डिफाल्टर हो जाते हैं, जिससे सरकार की मंशा को करारा झटका लगता है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही बैंकों ने जहां समय से पैसा जमा करने वालों को ब्याज में छूट देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं समय से अदायगी न करने वालों पर पूरा ब्याज लगाने एवं डिफाल्टर की श्रेणी में डालने का काम शुरू कर दिया है।
केंद्र सरकार की मंशा है कि किसानों को फसलों को होने वाले धन की जरूरत को इधर-उधर हाथ न फैलाना पड़े, इसके लिए केसीसी बनाने के निर्देश दिए गए थे। यहां दो लाख से ज्यादा केसीसी धारक योजना से जुड़ चुके हैं। कई फसलों के लिए अलग-अलग लोन लिमिट भूमि के क्षेत्रफल पर बनाई जाती हैं। सामान्य तौर पर केसीसी पर 7 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित है, पर ज्यादातर किसान साल भर बाद जमा निकासी करते या और फिर देर कर देते हैं, जिससे उन्हें ये लाभ नहीं मिल पाता है। एलडीएम पीके सिंह कहते हैं कि किसानों को इस ओर सजग रहकर काम करना चाहिए, ताकि उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ मिल सके।
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बैंकर्स का कहना है कि किसानों को केसीसी में दी जाने वाली कम ब्याज की सुविधा का लाभ समय से ऋण अदायगी कर अवश्य उठाना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि कम ब्याज एवं समय सीमा के भीतर ऋण अदायगी समय के प्रति जागरूकता न होने से ज्यादातर किसानों को केसीसी पर पूरा ब्याज चुकाना पड़ता है या फिर वे डिफाल्टर हो जाते हैं, जिससे सरकार की मंशा को करारा झटका लगता है। नया वित्तीय वर्ष शुरू होते ही बैंकों ने जहां समय से पैसा जमा करने वालों को ब्याज में छूट देने की तैयारियां शुरू कर दी हैं, वहीं समय से अदायगी न करने वालों पर पूरा ब्याज लगाने एवं डिफाल्टर की श्रेणी में डालने का काम शुरू कर दिया है।
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केंद्र सरकार की मंशा है कि किसानों को फसलों को होने वाले धन की जरूरत को इधर-उधर हाथ न फैलाना पड़े, इसके लिए केसीसी बनाने के निर्देश दिए गए थे। यहां दो लाख से ज्यादा केसीसी धारक योजना से जुड़ चुके हैं। कई फसलों के लिए अलग-अलग लोन लिमिट भूमि के क्षेत्रफल पर बनाई जाती हैं। सामान्य तौर पर केसीसी पर 7 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित है, पर ज्यादातर किसान साल भर बाद जमा निकासी करते या और फिर देर कर देते हैं, जिससे उन्हें ये लाभ नहीं मिल पाता है। एलडीएम पीके सिंह कहते हैं कि किसानों को इस ओर सजग रहकर काम करना चाहिए, ताकि उन्हें कम ब्याज दरों का लाभ मिल सके।
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