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महापुरुषों के जीवन से मिलती प्रेरणा
Hardoi
Updated Fri, 28 Feb 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। महर्षि दयानंद जयंती से शुरू हुए वैचारिक क्रांति सप्ताह के अंतर्गत गुरुवार को शहीद उद्यान में दयानंद बोधोत्सव के साथ ही चंद्रशेखर आजाद का बलिदान दिवस मनाया गया। आर्य समाज, वेद मंदिर श्रद्धानंदनगर, राष्ट्रीय चेतना मंच, अखिल विश्व शांति समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में एक हवन पूजन भी किया गया और लोगों को महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महापुरुषों की स्मृति में हवन करके की गई। आर्य समाज, वेद मंदिर श्रद्धानंदनगर, राष्ट्रीय चेतना मंच, अखिल विश्व शांति समिति के पदाधिकारियों ने यज्ञ में आहुतियां डाल महापुरुषों के जीवन पर चर्चा की। संस्थाध्यक्ष आचार्य सत्यवीर प्रकाश आर्य ने कहा कि शिवरात्रि के दिन महर्षि दयानंद को ईश्वर के सच्चे स्वरूप को जानने की प्रेरणा मिली। अपने कठोर तप, योगाभ्यास, अखंड ब्रह्मचर्य से उन्होंने परमात्मा का बोध हुआ और बताया कि ईश्वर को प्राप्त करने को बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। संस्थाध्यक्ष ने कहा कि महर्षि के शिष्य राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आए क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद भी उनसे प्रभावित थे और आज के ही दिन वह कलकत्ता के अल्फ्रेड पार्क में वह शहीद हुए।
कहा कि वैचारिक क्रांति की दिशा में दोनों महापुरुषों का जीवन देश को सदैव प्रेरणा देता रहेगा। धर्मेंद्र अस्थाना ने कहा कि महापुरुषों का जीवन राष्ट्र व समाज की सेवा को शिक्षा देता है। जयदेवी गुप्ता ने कहा कि महर्षि दयानंद ने ही नारी शिक्षा व सम्मान पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रज्ञा आर्य ने भजन सुनाया। इस दौरान राधेश्याम कपूर, शिव मंगल दीक्षित, उमेश कुमार वर्मा, सरस्वती देवी, सुयश प्रकाश, शक्ति प्रकाश, अनुराग, शांती सिंह, सावित्री देवी मौजूद थे। उधर, क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्य तिथि गुरुवार को पतंजलि योग समिति द्वारा भी मनाई गई। शहीद उद्यान में पतंजलि योग समिति ने निशुल्क योगाभ्यास करवाया और महाशिवरात्रि की बधाइयां दी।
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जिलाध्यक्ष हरिवंश सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने देश को आजाद कराने में उन्होंने अपनी जान न्योछावर कर दिया। जीवन पर्यंत अंग्रेज उनको गिरफ्तार नहीं कर सके। इस दौरान महा सिंह, प्रतिभा गुप्ता, राम नरेश गुप्ता, ऋषिकांत तिवारी, देवेश सिंह, मुन्नू सिंह राठौर, ललित गुप्ता व सुभाष चंद्र मौजूद थे।
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कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महापुरुषों की स्मृति में हवन करके की गई। आर्य समाज, वेद मंदिर श्रद्धानंदनगर, राष्ट्रीय चेतना मंच, अखिल विश्व शांति समिति के पदाधिकारियों ने यज्ञ में आहुतियां डाल महापुरुषों के जीवन पर चर्चा की। संस्थाध्यक्ष आचार्य सत्यवीर प्रकाश आर्य ने कहा कि शिवरात्रि के दिन महर्षि दयानंद को ईश्वर के सच्चे स्वरूप को जानने की प्रेरणा मिली। अपने कठोर तप, योगाभ्यास, अखंड ब्रह्मचर्य से उन्होंने परमात्मा का बोध हुआ और बताया कि ईश्वर को प्राप्त करने को बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। संस्थाध्यक्ष ने कहा कि महर्षि के शिष्य राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आए क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद भी उनसे प्रभावित थे और आज के ही दिन वह कलकत्ता के अल्फ्रेड पार्क में वह शहीद हुए।
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कहा कि वैचारिक क्रांति की दिशा में दोनों महापुरुषों का जीवन देश को सदैव प्रेरणा देता रहेगा। धर्मेंद्र अस्थाना ने कहा कि महापुरुषों का जीवन राष्ट्र व समाज की सेवा को शिक्षा देता है। जयदेवी गुप्ता ने कहा कि महर्षि दयानंद ने ही नारी शिक्षा व सम्मान पर जोर दिया। कार्यक्रम में प्रज्ञा आर्य ने भजन सुनाया। इस दौरान राधेश्याम कपूर, शिव मंगल दीक्षित, उमेश कुमार वर्मा, सरस्वती देवी, सुयश प्रकाश, शक्ति प्रकाश, अनुराग, शांती सिंह, सावित्री देवी मौजूद थे। उधर, क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्य तिथि गुरुवार को पतंजलि योग समिति द्वारा भी मनाई गई। शहीद उद्यान में पतंजलि योग समिति ने निशुल्क योगाभ्यास करवाया और महाशिवरात्रि की बधाइयां दी।
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जिलाध्यक्ष हरिवंश सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ने देश को आजाद कराने में उन्होंने अपनी जान न्योछावर कर दिया। जीवन पर्यंत अंग्रेज उनको गिरफ्तार नहीं कर सके। इस दौरान महा सिंह, प्रतिभा गुप्ता, राम नरेश गुप्ता, ऋषिकांत तिवारी, देवेश सिंह, मुन्नू सिंह राठौर, ललित गुप्ता व सुभाष चंद्र मौजूद थे।