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मौसम के तेवर से बागवान सकते में
Hardoi
Updated Sat, 18 Jan 2014 05:48 AM IST
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हरदोई। दिन प्रतिदिन तीखे हो रहे मौसम के तेवरों से पाला पड़ने का अहसास होने लगा है। घने काले कोहरे से वातावरण पाला पड़ने जैसा बन गया है, जिससे बागवानी करने वाले किसानों को नए बागानों की चिंता सताने लगी है, वहीं इस ओर चिंतित कृषि वैज्ञानिकों ने बागवानों को पतावर लगाकर बागों के नन्हें पौधों को ठंड से बचाने की सलाह दी हैं।
ज्ञात हो कि जिले में किसान बागवानी के प्रति भी आकर्षित हुए हैं। यहां आम, अमरूद, आंवला, रजनीगंधा, पपीता, गेंदा, गुलाब आदि की बागवानी होने लगी है। पर, किसानों को इसके प्रबंधन से लेकर शुरुआती दौर की लागत पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि पौधों को तैयार करने से लेकर रखवाली पर खास ध्यान देना पड़ता है। कृषि वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार कहते हैं कि जब तक पौधा एक वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता, तब तक उसकी देखभाल में उसी तरह से ध्यान रखना पड़ता है, जैसे छोेटे बच्चे की देखभाल में ध्यान रखा जाता हैं। नन्हें पौधे यानी एक वर्ष की कम आयु वाले पौधों के लिए अत्यधिक सर्दी और गर्मी दोनों ही नुकसान दायक होता है।
खास तौर से फूल देनेे वाले पौधों पर तापमान का स्तर का फर्क अवश्य पड़ता हैं। सर्दी में तापमान का स्तर 10 डिग्री से नीचे आने पर या फिर पाला पड़ने पर नन्हें पौधों पर ठंड का असर दिखाई पड़ने लगता हैं और पौधों की पत्तियां मुरझाने के साथ ही तने पर पीलापन आने लगता है। ऐसे में किसानों को बाग में पतावर लगाकर पौधों को ठंड से बचाने का काम करना चाहिए। बताया कि अगर ठंड से पौधे सूखने लगे तो उस समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ऐसा करने से पौधों पर ठंड का असर तो कम होगा, साथ ही उसे पानी के तत्वों से ऊर्जा भी मिल जाएगी।
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उधर, मौसम के तीखे तेवरों से पड़ रहे पाले से गेंदा और गुलाब के पौधे मुरझाने लगे हैं, पर कुछ समय पहले बाजार में आए चाइना केल के पौधों के फूल खिल रहे हैं, जिससे इस मौसम में भी चाइना केल के पौधों की मांग है और लोग से उसे अपने बगीचों के साथ ही लान में लगा रहे है। फाइवर की तरह दिखने वाले चाइना केल के फूल दूर से भले ही आर्टिफिशियल लगते हैं, पर वे प्रकृति का अनूठा तोहफा है, जो सर्दी भरे मौसम में भी खिल रहे हैं।
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ज्ञात हो कि जिले में किसान बागवानी के प्रति भी आकर्षित हुए हैं। यहां आम, अमरूद, आंवला, रजनीगंधा, पपीता, गेंदा, गुलाब आदि की बागवानी होने लगी है। पर, किसानों को इसके प्रबंधन से लेकर शुरुआती दौर की लागत पर ज्यादा ध्यान देना पड़ता है, क्योंकि पौधों को तैयार करने से लेकर रखवाली पर खास ध्यान देना पड़ता है। कृषि वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार कहते हैं कि जब तक पौधा एक वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेता, तब तक उसकी देखभाल में उसी तरह से ध्यान रखना पड़ता है, जैसे छोेटे बच्चे की देखभाल में ध्यान रखा जाता हैं। नन्हें पौधे यानी एक वर्ष की कम आयु वाले पौधों के लिए अत्यधिक सर्दी और गर्मी दोनों ही नुकसान दायक होता है।
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खास तौर से फूल देनेे वाले पौधों पर तापमान का स्तर का फर्क अवश्य पड़ता हैं। सर्दी में तापमान का स्तर 10 डिग्री से नीचे आने पर या फिर पाला पड़ने पर नन्हें पौधों पर ठंड का असर दिखाई पड़ने लगता हैं और पौधों की पत्तियां मुरझाने के साथ ही तने पर पीलापन आने लगता है। ऐसे में किसानों को बाग में पतावर लगाकर पौधों को ठंड से बचाने का काम करना चाहिए। बताया कि अगर ठंड से पौधे सूखने लगे तो उस समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए, ऐसा करने से पौधों पर ठंड का असर तो कम होगा, साथ ही उसे पानी के तत्वों से ऊर्जा भी मिल जाएगी।
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उधर, मौसम के तीखे तेवरों से पड़ रहे पाले से गेंदा और गुलाब के पौधे मुरझाने लगे हैं, पर कुछ समय पहले बाजार में आए चाइना केल के पौधों के फूल खिल रहे हैं, जिससे इस मौसम में भी चाइना केल के पौधों की मांग है और लोग से उसे अपने बगीचों के साथ ही लान में लगा रहे है। फाइवर की तरह दिखने वाले चाइना केल के फूल दूर से भले ही आर्टिफिशियल लगते हैं, पर वे प्रकृति का अनूठा तोहफा है, जो सर्दी भरे मौसम में भी खिल रहे हैं।