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‘संस्कारों के अभाव में भटक रही युवा पीढ़ी’
Hardoi
Updated Tue, 17 Dec 2013 05:45 AM IST
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हरदोई। गायत्री तीर्थ शांतिकुंञ्ज हरिद्वार से आये आचार्य सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि बच्चे के संस्कारों पर अभिभावकों को ध्यान देने की जरूरत हैं। संस्कारों के अभाव में ही युवा पीढ़ी दिशाहीन होकर कुमार्ग की ओर उमभनुख हो रही है। उन्होंने 16 संस्कारों पर विस्तृत चर्चा करते हुए कहा कि भौतिक संसाधनों से संपंन्न होेने के बाद भी मनुष्य गृह क्लेश जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में उसे गायत्री मंत्र का यथाविधि जाप करते हुए सद्मार्ग पर चलना चाहिए तभी उसे मुक्ति मिलेगी। वह सोमवार को नगर के घंटाघर परिसर में आयोजित प्रज्ञापुराण एवं नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ के दूसरे दिन श्रृद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।
आचार्य सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि मनुष्य शरीर में सत्चिंतन रूपी देवता और दुश्चिंतन रूपी दानव दोनों ही विद्यमान है। मनुष्य शरीर में तो ये निराकार होते है लेकिन साकार होकर मनुष्य का पशु बना देते है। विचारों में देवत्व की स्थापना के लिए यज्ञों की महिमा और पुराण व कथाओं का महत्व है। उन्होंने गायत्री महायज्ञ पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए लोगों से सद्मार्ग पर चलने का आह्वाहन किया। इस मौके पर नगर के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। मंगलवार को सुबह 8 से 9 बजे तक संस्कृत विश्व विद्यालय से प्रशिक्षित अनुराग सोनी द्वारा योग व प्राणायाम सिखाया जाएगा।
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आचार्य सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि मनुष्य शरीर में सत्चिंतन रूपी देवता और दुश्चिंतन रूपी दानव दोनों ही विद्यमान है। मनुष्य शरीर में तो ये निराकार होते है लेकिन साकार होकर मनुष्य का पशु बना देते है। विचारों में देवत्व की स्थापना के लिए यज्ञों की महिमा और पुराण व कथाओं का महत्व है। उन्होंने गायत्री महायज्ञ पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए लोगों से सद्मार्ग पर चलने का आह्वाहन किया। इस मौके पर नगर के कई प्रमुख लोग मौजूद रहे। मंगलवार को सुबह 8 से 9 बजे तक संस्कृत विश्व विद्यालय से प्रशिक्षित अनुराग सोनी द्वारा योग व प्राणायाम सिखाया जाएगा।
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