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करोड़ों स्वाहा, पर बेहतर न हो सका ‘स्वास्थ्य’

Hardoi Updated Tue, 12 Feb 2013 05:30 AM IST
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‘जिले की चिकित्सा व्यवस्था चुस्त दुरुस्त रखने का विभाग भले ही दावा करे, पर हकीकत यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में पीएचसी-सीएचसी पर अव्यवस्थाएं हावी हैं। कहीं पर डॉक्टर नदारद तो कहीं पर मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही है। अधिकांश स्वास्थ्य केंद्रों पर गंदगी का फैली रहती है। इसका खुलासा बीते दिनों संडीला तहसील स्थित सीएचसी व पीएचसी का निरीक्षण करने पहुंचे अपर निदेशक स्वास्थ्य के सामने हो गया। उन्होंने मातहतों को लताड़ लगाई। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है।’
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संडीला/अतरौली/बेहंदर/कोथावां। मरीजों के उपचार को ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित सीएचसी व पीएचसी पर प्रतिवर्ष करोड़ों का बजट खर्च हो रहा है, पर यहां व्यवस्थाएं बदहाल हैं। कहीं पलंग पर गंदी चादर बिछी है, तो कहीं परिसर में कूड़ा नजर आता है। कई केंद्रों पर जनरेटर खराब होने से मरीजों को बिजली संकट से जूझना पड़ रहा है। अतरौली स्थित एक केंद्र पर तो पेयजल का संकट है। हर बार निरीक्षण में बड़े अफसर निर्देश भी देते हैं, पर कुछ सुधार नहीं हो रहा। अपर निदेशक स्वास्थ्य के आदेश पर कितना अमल हुआ, इसका नजारा दूसरे दिन देखने को मिल गया।

संडीला खंड के दोनों ही स्वास्थ्य केंद्रों पर जगह-जगह गंदगी लगी है, वहीं प्रसव कक्ष में भी सफाई के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। यहां मौजूद मरीज व उनके तीमारदारों ने नाम न छापने की शर्त पर व्यवस्था पर रोष जताया। बोले एक-एक चादर कई कई दिनों तक बिछी रहती है। अफसरों के आने पर चादर बदली जाती है, पर उनके जाते ही व्यवस्था फिर जस की तस हो जाती। यहां तैनात कर्मचारी भी मनमानी करने से नहीं चूकते। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। अतरौली सीएचसी पर दर्द से कराह रही सागरगढ़ी निवासी निर्मला (50) को ठेलिया पर लेकर परिजन अस्पताल पहुंचे, पर यहां डॉक्टर के न होने पर उनको परेशान होना पड़ा।
एक बजे के बाद डॉक्टर ने सीएचसी पर पहुंचकर महिला को देखा। सीएचसी पर 8 डॉक्टर तैनात है, किंतु इमरजेंसी मरीज की परेशानी घट नहीं रही। कई मरीजों को दवा के लिए भटकना पड़ता। इस केंद्र पर भी गंदगी अकसर बनी रहती। उधर, केंद्र प्रभारी डा. सुशील कुमार ने कहा कि उनका प्रयास रहता है कि किसी मरीज को परेशान न होना पडे़े। इसी तरह बेहंदर पीएचसी पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। मरीजों को डॉक्टर के इंतजार में घंटों बैठना पड़ता है। इस केंद्र का जनरेटर खराब होने से मरीजों व उनके तीमारदारों को बिजली की समस्या से जूझना पड़ता है। केें द्र प्रभारी डा. किस्लै बाजपेई ने बताया कि जनरेटर बहुत पुराना होने से अकसर खराब रहता है, इसकी मरम्मत को अफसरों को पत्र लिखा गया है।
उधर, कोथावां सीएचसी तक मरीजों को पहुंचने के लिए खस्ताहाल सड़क से गुजरकर जाना पड़ता है, जिससे मरीजों को पसीना आ जाता है। यदि वह केंद्र तक आ भी जाएं तो यहां की अव्यवस्थाओं से उन्हें जूझना पड़ता। इधर, हर्रैया, जनिगांव, भटपुर, ढ़िकुन्नी आदि में डॉक्टरों की अनुपस्थिति गंभीर समस्या बनी हुई है। गौसगंज सीएचसी पर प्रसूताओं को बेड पर बिछी गंदी चादर पर लेटना पड़ता है। यदि उन्हें आपत्ति होती है तो बगैर चादर के ही लेटती हैं। इस केंद्र पर प्रसूताओं को सर्दी लगने पर उन्हें रजाई का इंतजाम भी अपने घर से ही करना पड़ता है।
अतरौली सीएचसी की नव निर्मित टंकी खराब होने से मरीज व उनके तीमारदारों को पानी के लिए भटकना पड़ता है। कई बार हैंडपंप लगवाने की मांग की गई, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इसके अलावा तहसील क्षेत्र में दो विधानसभाएं हैं। इनकी दोनों सीटों पर सपा का परचम हैं। इसके बावजूद विधायकों ने भी इन केेंद्रों का जायजा लेना मुनासिब नहीं समझा। इस बाबत विधायकों से बातचीत करने की कोशिश की गई, पर संपर्क ही नहीं हो सका। उधर, अब क्षेत्रीय जनता को उम्मीद है कि नितिन अग्रवाल के स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनने से ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधा भी दुरुस्त होगी।
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‘जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को वह खुद पीएचसी व सीएचसी का औचक निरीक्षण कर रहे है। सफाई व्यवस्था भी दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं। भरावन सीएचसी पर इंडियामार्का हैंडपंप लगाने को जल निगम को पत्र लिखा जा चुका है। आकस्मिक जांच कर डॉक्टरों की उपस्थिति देखी जाएगी। अनुपस्थित मिलने पर कार्रवाई होगी।’ डा. अनुराग भार्गव, सीएमओ

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