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गुरू तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर शबद कीर्तन
Hardoi
Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। सिखों के नौवें गुरू व योद्धा गुरू तेग बहादुर का शहीदी पर्व शनिवार को मनाया गया। नई बस्ती स्थित गुरुद्वारे में सिखों ने शबद व कीर्तन किया। उनके व्यक्तित्व पर भी प्रकाश डाला गया। गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी के सदस्यों ने गुरू तेग बहादुर के बलिदान की चरचा की।
गुरू तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर गुरुद्वारे में तड़के से ही विभिन्न कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई। सिखों ने नवें गुरू श्री तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर गुरुद्वारे में अखंड पाठ का आयोजन किया गया। जिसके बाद मुख्य ग्रंथी भाई गुरुवचन सिंह ने शबद कीर्तन कर उपस्थिति संगत को अपनी वाणी की मधुरता से भाव विभोर कर दिया। गुरुद्वारे के महासचिव जोगिंदर सिंह गांधी ने कहा कि सिखों के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी का महत्व कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। वह एक समर्पित भक्त होने के साथ ही साहसी योद्धा, कवि, दार्शनिक और एक महान व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने देश में धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा तथा व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान दे दिया। अन्याय और अत्याचार का विरोध कर उन्हाेंने राष्ट्रीय एकता अखंडता की खातिर दिल्ली के चांदनी चौक में अपने प्राणों की आहूति दी। उनकी शहीदी सिक्खों के लिए गरिमा की बात है जिस वजह से ही उनका शहीदी पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। गुरुद्वारे में शबद कीर्तन केे साथ ही लंगर भी कराया गया। वहीं सिक्ख धर्म के लोगों के साथ ही अन्य धर्मों के अनुयायियों ने पहुंचकर मत्था टेका। इस मौके पर जगत सिंह, दर्शन सिंह, लखवीर सिंह, रविंदर सिंह, खडग सिंह, अजीव सिंह, गुरूवीर सिंह, दलवीर सिंह, पलविंदर सिंह, तेज पाल और सोसायटी की स्त्री सत्यंग की बीबी रविंदर कौर ने मत्था टेका और अरदास की।
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गुरू तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर गुरुद्वारे में तड़के से ही विभिन्न कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई। सिखों ने नवें गुरू श्री तेग बहादुर के शहीदी पर्व पर गुरुद्वारे में अखंड पाठ का आयोजन किया गया। जिसके बाद मुख्य ग्रंथी भाई गुरुवचन सिंह ने शबद कीर्तन कर उपस्थिति संगत को अपनी वाणी की मधुरता से भाव विभोर कर दिया। गुरुद्वारे के महासचिव जोगिंदर सिंह गांधी ने कहा कि सिखों के नौवें गुरु श्री तेग बहादुर जी का महत्व कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण हैं। वह एक समर्पित भक्त होने के साथ ही साहसी योद्धा, कवि, दार्शनिक और एक महान व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने देश में धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा तथा व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वयं का बलिदान दे दिया। अन्याय और अत्याचार का विरोध कर उन्हाेंने राष्ट्रीय एकता अखंडता की खातिर दिल्ली के चांदनी चौक में अपने प्राणों की आहूति दी। उनकी शहीदी सिक्खों के लिए गरिमा की बात है जिस वजह से ही उनका शहीदी पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। गुरुद्वारे में शबद कीर्तन केे साथ ही लंगर भी कराया गया। वहीं सिक्ख धर्म के लोगों के साथ ही अन्य धर्मों के अनुयायियों ने पहुंचकर मत्था टेका। इस मौके पर जगत सिंह, दर्शन सिंह, लखवीर सिंह, रविंदर सिंह, खडग सिंह, अजीव सिंह, गुरूवीर सिंह, दलवीर सिंह, पलविंदर सिंह, तेज पाल और सोसायटी की स्त्री सत्यंग की बीबी रविंदर कौर ने मत्था टेका और अरदास की।
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