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कज़ा ने लूट लिया हाय मेरे कासिम को...
Hardoi
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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पिहानी (हरदोई)। इलाके भर में प्रसिद्ध सातवीं मोहर्रम का जुलूस शांतिपूर्वक ढंग से निकला गया। इमाम हुसैन के भतीजे जनाबे कासिम की शहादत पर निकलने वाले अलम, तख्त और ताजिए के इस जुलूस में नौजवानों ने छुरी और ब्लेड का मातम कर अपने सीने लहूलुहान कर लिए। सुन्नियों की मस्जिद सैय्यदना फारूके आजम के निकट जुलूस शांतिपूर्वक ढंग से निकलने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली।
सुबह लगभग सात बजे मोहल्ला मीरसरांय के इमामबाड़े से जुलूस की शुरूआत हुई। दूसरा जुलूस मोहल्ला खुर्मुली के इमामबाड़े से उठा। परंपरागत रास्ते तय करते हुए दोनों जुलूस सुन्नी मस्जिद सैयदना फारूके आजम के निकट चौराहे पर पहुंचे। यहां दोनों जुलूसों का मिलाप कराया गया। अकीदतमंदों ने जुलूस में शामिल इमाम हुसैन के भतीजे जनाबे कासिम की शबीहे ताबूत को बोसे दिए। जुलूस में शामिल अंजुमनों रौनके अज़ा, हुसैनिया, सज्जादिया पियाबाग व दस्ता- ए- हैदरी के सदस्योें ने नौहे पढ़ते हुए जमकर मातम किया। नौजवानों ताज मियां, अलीम, अब्बास, फूल मियां, मोनू, हैदर व हाशिम ने छुरी और ब्लेड का मातम कर अपने सीने जनाबे कासिम की शहादत को गम में लहूलुहान कर लिए।
चौहटटा चौराहे से जुलूस आगे के लिए रवाना हुआ। यहां से इस्लामगंज, यूसुफ जई, नई बस्ती और कटराबाजार होते हुए सदर जहां रौजा गेट के निकट पहुंचा। यहां मोहल्ला लोहानी और छिपीटोला से आए अन्य जुलूसों का भी इसमें विलय हुआ। मिलाप के समय अंजुमनों के सदस्यों ने नौहे पढ़े- कासिम को मौत आलम गुरबत में आई है। मां गमनसीब ने सफे मातम बिछाई है। ये गूंजी मां की सदा हाय मेरे कासिम को, कज़ा ने लूट लिया हाय मेरे कासिम को। इसके बाद जुलूस लोहानी और मुरीदखानी मोहल्लों में जगह- जगह कयाम करता हुआ बस स्टैंड पहुंचा। शाम को बस स्टैंड से जुलूस आगे के लिए रवाना हुआ। अगले दिन भारे को पूरे चौबीस घंटे के बाद जूलूस शिया जामा मस्जिद के निकट से गुजरता हुआ पुन: मोहल्ला मीर सरांय में पहुंच कर होगा।
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छावनी में तब्दील रहा चौहट्टा चौराहा
पिहानी (हरदोई)। शिया समुदाय के जुलूस का गुजर सुन्नियों के कार्यक्रम स्थल मस्जिद सैयदना फारूके आजम के निकट होने के कारण प्रशासन ने पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए। मस्जिद के आसपास बैरीकेडिंग के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस पीएसी को तैनात किया गया था। मस्जिद में नमाजे जोहर अदा किए जाते ही जूलूस आगे बढ़ाया गया। आसपास के घरों की छतों पर भी जवान खड़े किए गए। एसडीएम जेपी सिंह, सीओ पीके मिश्रा, एलआईयू इंस्पेक्टर हारून रशीद व एसओ विजय यादव फोर्स के साथ हालात पर नजर गड़ाए रहे। जुलूस की निगरानी कैमरे से भी की गयी।
नन्हें अजादारों ने छुरी ब्लेड
का मातम कर लाल किए सीने
पिहानी (हरदोई)। जुलूस में शामिल मासूम अजादाराें ने भी हुसैन और उनके भतीजे जनाबे कासिम की शहादत को लेकर कमा और छुरी ब्लेड का मातम कर सीने जख्मी कर अपनी अकीदत का इजहार किया। मासूम मातमदारों में मोहममद फैसल, जीशान, नबी अहमद, मिन्हाज, मसूद अली, रजा अब्बास, अल्मास, साहिल और असद अली आदि ने छुरियों और ब्लेड से मातम किया। रौजा परिसर में नौजावान और बच्चों को कमा भी लगाई गयी। लाल कमा (माथे पर चीरा) का मातम करने वालों में मोहम्मद चार वर्ष, वशीर तीन वर्ष तथा अमीर आठ माह के माथे पर चीरा लगाकर कमा का भी मातम किया गया।
महिलाओं ने भी की उल्लेखनीय भागीदारी
पिहानी (हरदोई)। सातवीं मोहर्रम पर जनाबे कासिम की याद में निकले जुलूस में पुरुषों के साथ ही महिलाओं ने भी उल्लेखीय संख्या में भागीदारी की। 24 घंटे तक नगर का भ्रमण करने वाले इस जुलूस में गमे हुसैन में सियाह लिबास पहने औरतों ने भी मातम करते हुए इमाम और उनके कुम्बे को पुरसा पेश किया। महिलाओं में तख्त पर मन्नते मानने का दौर भी पूरे रास्ते चला।
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सुबह लगभग सात बजे मोहल्ला मीरसरांय के इमामबाड़े से जुलूस की शुरूआत हुई। दूसरा जुलूस मोहल्ला खुर्मुली के इमामबाड़े से उठा। परंपरागत रास्ते तय करते हुए दोनों जुलूस सुन्नी मस्जिद सैयदना फारूके आजम के निकट चौराहे पर पहुंचे। यहां दोनों जुलूसों का मिलाप कराया गया। अकीदतमंदों ने जुलूस में शामिल इमाम हुसैन के भतीजे जनाबे कासिम की शबीहे ताबूत को बोसे दिए। जुलूस में शामिल अंजुमनों रौनके अज़ा, हुसैनिया, सज्जादिया पियाबाग व दस्ता- ए- हैदरी के सदस्योें ने नौहे पढ़ते हुए जमकर मातम किया। नौजवानों ताज मियां, अलीम, अब्बास, फूल मियां, मोनू, हैदर व हाशिम ने छुरी और ब्लेड का मातम कर अपने सीने जनाबे कासिम की शहादत को गम में लहूलुहान कर लिए।
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चौहटटा चौराहे से जुलूस आगे के लिए रवाना हुआ। यहां से इस्लामगंज, यूसुफ जई, नई बस्ती और कटराबाजार होते हुए सदर जहां रौजा गेट के निकट पहुंचा। यहां मोहल्ला लोहानी और छिपीटोला से आए अन्य जुलूसों का भी इसमें विलय हुआ। मिलाप के समय अंजुमनों के सदस्यों ने नौहे पढ़े- कासिम को मौत आलम गुरबत में आई है। मां गमनसीब ने सफे मातम बिछाई है। ये गूंजी मां की सदा हाय मेरे कासिम को, कज़ा ने लूट लिया हाय मेरे कासिम को। इसके बाद जुलूस लोहानी और मुरीदखानी मोहल्लों में जगह- जगह कयाम करता हुआ बस स्टैंड पहुंचा। शाम को बस स्टैंड से जुलूस आगे के लिए रवाना हुआ। अगले दिन भारे को पूरे चौबीस घंटे के बाद जूलूस शिया जामा मस्जिद के निकट से गुजरता हुआ पुन: मोहल्ला मीर सरांय में पहुंच कर होगा।
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छावनी में तब्दील रहा चौहट्टा चौराहा
पिहानी (हरदोई)। शिया समुदाय के जुलूस का गुजर सुन्नियों के कार्यक्रम स्थल मस्जिद सैयदना फारूके आजम के निकट होने के कारण प्रशासन ने पूर्व की घटनाओं से सबक लेते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए। मस्जिद के आसपास बैरीकेडिंग के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस पीएसी को तैनात किया गया था। मस्जिद में नमाजे जोहर अदा किए जाते ही जूलूस आगे बढ़ाया गया। आसपास के घरों की छतों पर भी जवान खड़े किए गए। एसडीएम जेपी सिंह, सीओ पीके मिश्रा, एलआईयू इंस्पेक्टर हारून रशीद व एसओ विजय यादव फोर्स के साथ हालात पर नजर गड़ाए रहे। जुलूस की निगरानी कैमरे से भी की गयी।
नन्हें अजादारों ने छुरी ब्लेड
का मातम कर लाल किए सीने
पिहानी (हरदोई)। जुलूस में शामिल मासूम अजादाराें ने भी हुसैन और उनके भतीजे जनाबे कासिम की शहादत को लेकर कमा और छुरी ब्लेड का मातम कर सीने जख्मी कर अपनी अकीदत का इजहार किया। मासूम मातमदारों में मोहममद फैसल, जीशान, नबी अहमद, मिन्हाज, मसूद अली, रजा अब्बास, अल्मास, साहिल और असद अली आदि ने छुरियों और ब्लेड से मातम किया। रौजा परिसर में नौजावान और बच्चों को कमा भी लगाई गयी। लाल कमा (माथे पर चीरा) का मातम करने वालों में मोहम्मद चार वर्ष, वशीर तीन वर्ष तथा अमीर आठ माह के माथे पर चीरा लगाकर कमा का भी मातम किया गया।
महिलाओं ने भी की उल्लेखनीय भागीदारी
पिहानी (हरदोई)। सातवीं मोहर्रम पर जनाबे कासिम की याद में निकले जुलूस में पुरुषों के साथ ही महिलाओं ने भी उल्लेखीय संख्या में भागीदारी की। 24 घंटे तक नगर का भ्रमण करने वाले इस जुलूस में गमे हुसैन में सियाह लिबास पहने औरतों ने भी मातम करते हुए इमाम और उनके कुम्बे को पुरसा पेश किया। महिलाओं में तख्त पर मन्नते मानने का दौर भी पूरे रास्ते चला।