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Hardoi News: सालाना सात करोड़ खर्च फिर भी रास्ते पथरीले, पुलिया टूटी
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संडीला। औद्योगिक विकास के प्रति सरकार की संवेदनशीलता पर टूटी पुलिया व पथरीले रास्ता ब्रेकर का काम कर रहे हैं। चार फेज में विकसित औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन कर रहीं करीब 200 फैक्टरियां के उद्यमी यूपीसीडा को रखरखाव शुल्क के तौर पर करीब सात करोड़ रुपये सालाना देते हैं। रखरखाव शुल्क देने के बाद भी टूटी पुलिया और पथरीले रास्ते औद्योगिक विकास में बाधक बन रहे है।
सरकार संडीला औद्याेगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। बड़े-बडे उद्यमों की स्थापना के लिए उद्यमियों को यहां पर आमंत्रित किया जा रहा है लेकिन, औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं। क्षेत्र के मार्गों पर संभल कर नहीं चले तो, हादसा का शिकार हो सकते हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ व जिला मुख्यालय से औद्योगिक क्षेत्र की दूरी करीब-करीब 55 किलोमीटर है। यहां पर चार फेज में औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया है।
छोटी व बड़ी लगभग दो सौ से ढाई सौ फैक्टरियां लगी हुई हैं। यूपीसीडा की ओर से उद्यमियों से प्रति वर्ग मीटर 20 रुपये सालाना रखरखाव शुल्क लिया जा रहा है। करीब दो फैक्टरियां से उद्यमी प्रतिवर्ष सात करोड़ रुपये देते हैं। ऐसे ही यहां पर फैक्टरियों में होने वाले उत्पादन पर प्रतिवर्ष करीब 200 करोड़ की जीएसटी सरकार को प्राप्त हो रही है।
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यहां के औद्योगिक क्षेत्र से देश व प्रदेश के कई जिलों में तैयार माल जाता है और कच्चा माल आता भी है। बावजूद यहां के मार्गों का हाल बहुत खराब है। फेज-एक में पारस दूध डेयरी के पास वाले मोड़ पर मार्ग पूरी तरह से उखड़ गया है। मार्ग में गड्ढे हो गए हैं और यही हाल फेज-दो में ज्ञानधारा डेयरी के पास से निकले मार्ग में तो गड्ढों के अलावा कुछ भी नहीं है। बरसात में इन बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने के कारण कच्चा माल लेकर आने वाले वाहन आए दिन पलटते रहते थे। इससे उद्यमियों का काफी नुकसान हो जाता है। फेज-दो में बरसात के समय उद्यमियों को सबसे ज्यादा समस्या होती है। बरसात के पानी के निकास का सही इंतजाम न होने के कारण पानी फैक्टरियों में भर जाता है।
चैप्टर चेयरमैन अमित भदौरिया ने बताया कि उद्यमियों को मार्गों, पुलिया की मरम्मत न होने से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन व प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उद्यमी अमरेश सिंह ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र की पुलिया टूटी है और फैक्ट्री जाने में अगर जरा सी भी चूक हुई तो वाहन फंस जाते हैं। कई बार तो वाहन पलटने के कारण नुकसान भी हो जाता है।
उद्यमी वैभव गोयल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के कुछ मार्ग तो बन गए हैं लेकिन, अधिकतर मार्गों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। इससे आए दिन हादसा होता है। रखरखाव की ओर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।
सड़कों के खराब होने और पुलिया टूटी होने की जानकारी है। फेज-एक में काम चल रहा है, इसके बाद फेज-दो में जो काम रह गया है उसको कराया जाएगा। जल्द से जल्द उद्यमियों की समस्याओं को दूर करा दिया जाएगा।
- बीएन श्रीवास्तव, सहायक प्रबंधक, यूपीसीडा।
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सरकार संडीला औद्याेगिक क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है। बड़े-बडे उद्यमों की स्थापना के लिए उद्यमियों को यहां पर आमंत्रित किया जा रहा है लेकिन, औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रहीं। क्षेत्र के मार्गों पर संभल कर नहीं चले तो, हादसा का शिकार हो सकते हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ व जिला मुख्यालय से औद्योगिक क्षेत्र की दूरी करीब-करीब 55 किलोमीटर है। यहां पर चार फेज में औद्योगिक क्षेत्र बनाया गया है।
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छोटी व बड़ी लगभग दो सौ से ढाई सौ फैक्टरियां लगी हुई हैं। यूपीसीडा की ओर से उद्यमियों से प्रति वर्ग मीटर 20 रुपये सालाना रखरखाव शुल्क लिया जा रहा है। करीब दो फैक्टरियां से उद्यमी प्रतिवर्ष सात करोड़ रुपये देते हैं। ऐसे ही यहां पर फैक्टरियों में होने वाले उत्पादन पर प्रतिवर्ष करीब 200 करोड़ की जीएसटी सरकार को प्राप्त हो रही है।
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यहां के औद्योगिक क्षेत्र से देश व प्रदेश के कई जिलों में तैयार माल जाता है और कच्चा माल आता भी है। बावजूद यहां के मार्गों का हाल बहुत खराब है। फेज-एक में पारस दूध डेयरी के पास वाले मोड़ पर मार्ग पूरी तरह से उखड़ गया है। मार्ग में गड्ढे हो गए हैं और यही हाल फेज-दो में ज्ञानधारा डेयरी के पास से निकले मार्ग में तो गड्ढों के अलावा कुछ भी नहीं है। बरसात में इन बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भर जाने के कारण कच्चा माल लेकर आने वाले वाहन आए दिन पलटते रहते थे। इससे उद्यमियों का काफी नुकसान हो जाता है। फेज-दो में बरसात के समय उद्यमियों को सबसे ज्यादा समस्या होती है। बरसात के पानी के निकास का सही इंतजाम न होने के कारण पानी फैक्टरियों में भर जाता है।
चैप्टर चेयरमैन अमित भदौरिया ने बताया कि उद्यमियों को मार्गों, पुलिया की मरम्मत न होने से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शासन व प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उद्यमी अमरेश सिंह ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र की पुलिया टूटी है और फैक्ट्री जाने में अगर जरा सी भी चूक हुई तो वाहन फंस जाते हैं। कई बार तो वाहन पलटने के कारण नुकसान भी हो जाता है।
उद्यमी वैभव गोयल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र के कुछ मार्ग तो बन गए हैं लेकिन, अधिकतर मार्गों में गड्ढे ही गड्ढे हैं। इससे आए दिन हादसा होता है। रखरखाव की ओर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है।
सड़कों के खराब होने और पुलिया टूटी होने की जानकारी है। फेज-एक में काम चल रहा है, इसके बाद फेज-दो में जो काम रह गया है उसको कराया जाएगा। जल्द से जल्द उद्यमियों की समस्याओं को दूर करा दिया जाएगा।
- बीएन श्रीवास्तव, सहायक प्रबंधक, यूपीसीडा।