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Hardoi News: मेडिकल कॉलेज में 69 वेंटिलेटर, जिंदगी देने लायक एक भी नहीं

Sat, 01 Nov 2025 11:10 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 01 Nov 2025 11:10 PM IST
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69 ventilators in the medical college, not even one capable of saving lives
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में 69 वेंटिलेटर होने के बाद भी एक महिला मजदूर को सांसें नहीं दी जा सकीं। हालत गंभीर होने और वेंटिलेटर की जरूरत बताते हुए उसे मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर किया गया। वहां भी वेंटिलेटर न मिलने पर अंतत: लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया। वहां महिला की मौत हो गई। खास बात यह है कि जनपद में चार साल से 69 वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। अब तक एक भी मरीज को यह वेंटिलेटर सांसें नहीं दे पाए।
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कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर के बीच विभिन्न माध्यमों से वेंटिलेटर स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराए गए थे। कुछ वेंटिलेटर पीएम केयर फंड से मिले थे तो कुछ वेंटिलेटर विभिन्न जनप्रतिनिधियों की निधि से एकत्र हुए बजट से आए थे। वर्ष 2021 में वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज के पास आ गए थे। मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर तो आ गए लेकिन इनका इस्तेमाल एक भी दिन नहीं किया जा सका।
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शुरूआती दौर में वेंटिलेटर चलाने के जानकार कर्मचारी न होने की बात कहकर जिम्मेदार पल्ला झाड़ लेते थे तो अब इस्तेमाल न होने के कारण वेंटिलेटर काम के लायक न होने की बात कह दी जाती है। वेंटिलेटर आईपीडी के नए भवन के एक कमरे में बंद कर रख दिए गए हैं। यहां न तो इनकी सफाई होती है और इस्तेमाल तो खैर दूर की बात है।
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नहीं हुई वेंटिलेटर चलाने की कोई कोशिश
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जेबी गोगोई बताते हैं कि आउटसोर्सिंग के जरिये वेंटिलेटर टेक्नीशियनों की तैनाती की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि शायद पहले कभी कोई प्रयास ही नहीं हुआ। इतने पदों पर भर्ती होती है तो वेंटिलेटर टेक्नीशियन के पद पर भी हो सकती थी।


आरटीआई के जवाब में बताया था, चलाने वाला कोई नहीं
साामाजिक कार्यकर्ता उदित पाठक ने जुलाई में वेंटिलेटर की उपलब्धता और टेक्नीशियन की तैनाती के बारे में जानकारी मांगी थी। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी का जवाब मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने दिया था। इसमें बताया था कि मेडिकल कॉलेज में 69 वेंटिलेटर हैं लेकिन इन्हें चलाने के लिए एक भी टेक्नीशियन नहीं है।




वेंटिलेटरों की सर्विसिंग कराने के लिए कार्यदायी संस्था से संपर्क किया गया था। उन्होंने सर्विसिंग पर अनुमानित खर्च बताने से इन्कार कर दिया। तर्क यह था कि जब तक वेंटिलेटर खोलकर देखा नहीं जाएगा तब तक अनुमानित खर्च नहीं बताया जा सकता। पूरा प्रयास कर है कि एक माह के अंदर कम से कम दो वेंटिलेटर काम लायक बना दिए जाएं। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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